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सर्वोच्च अदालत में मंत्रीपरिषद विस्तार संबंधी रिट पर राष्ट्रपति कार्यालय का जवाब पेश

 

काठमांडू।

राष्ट्रपति कार्यालय ने सर्वोच्च न्यायालय को पेश किया है कि मंत्रिपरिषद के विस्तार में राष्ट्रपति विद्यादेवी भंडारी की भूमिका संवैधानिक है।

सर्वोच्च अदालत ने  कार्यवाहक प्रधानमंत्री केपी ओली द्वारा  मंत्रिपरिषद के विस्तार और हेरफेर के खिलाफ दायर रिट याचिका की सुनवाई में राष्ट्रपति कार्यालय से भी जवाब मांगा था. शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट को एक लिखित जवाब में राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा कि राष्ट्रपति की भूमिका संवैधानिक है।

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लिखित उत्तर में यह भी उल्लेख किया गया है कि राष्ट्रपति की कार्रवाई के खिलाफ अदालत में कोई मामला दायर नहीं किया जा सकता। “संविधान के अनुच्छेद 66, खंड (2) में यह प्रावधान है कि राष्ट्रपति द्वारा किया जाने वाला कोई भी कार्य संविधान या संघीय कानून के प्रावधानों को छोड़कर, मंत्रिपरिषद की सिफारिश और सहमति से होगा।

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने एक अंतरिम आदेश जारी कर कहा था कि प्रतिनिधि सभा के भंग होने के बाद मंत्रिपरिषद का विस्तार करना असंवैधानिक है। सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद मौजूदा कैबिनेट में केवल पांच सदस्य हैं।

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