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यूनेस्को ने बंगाल की दुर्गापूजा को सांस्कृतिक विरासत का दर्जा दिया

 

 

यूनेस्को ने बुधवार को बंगाल की दुर्गापूजा को सांस्कृतिक विरासत का दर्जा दिया है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूनेस्को की इस घोषणा पर खुशी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि यह हर देशवासी के लिए गर्व का पल है। उधर, बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि यह हर बंगाली के लिए गर्व का पल है। दुर्गा पूजा हमारे लिए पूजा से बढ़कर है। यह हमारे लिए भावना है।

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यूनेस्को ने कहा कि हम भारत और भारतीयों को बधाई देते हैं। हमें उम्मीद है कि दुर्गा पूजा को इंसािनयत की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की लिस्ट में शामिल किए जाने के बाद स्थानीय लोग इसे लेकर और ज्यादा उत्साहित होंगे। सांस्कृतिक विरासत केवल निशानियों और वस्तुओं का संकलन नहीं है, इसमें परंपराएं और हमारे पूर्वजों की भावनाएं भी शामिल हैं, जो आने वाली पीढ़ियों को मिलती हैं।

धर्म और जाति का विभाजन टूटता है
यूनेस्को ने बुधवार को लिखा कि दुर्गा पूजा के दौरान, वर्ग, धर्म और जातीयता का विभाजन टूट जाता है। दुर्गा पूजा को धर्म और कला के पब्लिक परफॉर्मेंस के सबसे अच्छे उदाहरण के साथ-साथ सहयोगी कलाकारों और डिजाइनरों के लिए एक बड़े मौके के रूप में देखा जाता है।
रामलीला और कुंभ भी इसी लिस्ट में
आपको बता दें कि इस लिस्ट में साल 2016 में नवरोज और योग को भी शामिल किया गया था। इसके अलावा 2008 में रामलीला और 2017 में कुंभ मेले को भी इस लिस्ट में महत्वपूर्ण जगह मिली थी।

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