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अध्यादेश जारी नहीं करने के निष्कर्ष में पहुँची हैं राष्ट्रपति

 

काठमांडू, २८ मंसिर –

 


सरकार द्वारा मुलुकी फौजदारी कार्यविधि संहिता संशोधन अध्यादेश को जारी करें कहकर यह अध्यादेश राष्ट्रपति तक पहुँचाया गया था लेकिन राष्ट्रपति अध्यादेश जारी नहीं करने के निष्कर्ष में पहुँची हैं । सूत्रों के अनुसार राष्ट्रपति का कहना है कि ताजा जनादेश प्राप्त होने के परिप्रेक्ष्य में काम चलाउ की हैसियत की सरकार लोकतन्त्र और संसदीय मूल्य–मान्यता के विपरीत विवादास्पद अध्यादेश लाना चाहती है ।
राष्ट्रपति के राजनीतिक सल्लाहकार लालबाबुप्रसाद यादव ने कहा कि सर्वोच्च अदालत में विचाराधीन मुद्दों के साथ जोड़कर अध्यादेश को आगे बढ़ाकर कार्यकारी प्रमुख ने न्यायालय पर ही हस्तक्षेप करने के कारण राष्ट्रपति अध्यादेश पर गंभीर अध्ययन कर रही हैं । नियन्त्रण और सन्तुलन सम्बन्धी सिद्धान्त समेत पर नजर रखते हुए अध्यादेश के सम्बन्ध में राष्ट्रपति भण्डारी ने संविधान सम्मत निर्णय करेंगी ।
‘संसदीय प्रणाली में काम चलाउ हैसियत की सरकार अध्यादेश ला सकत्ी है या नहीं यही एक प्रश्न है । लोकतन्त्र में नियन्त्रण और सन्तुलन है एक तरफ सर्वोच्च अदालत में मुद्दा चल रहा है और दूसरी तरफ देश के कार्यकारी प्रमुख इसी विषय में अध्यादेश लाना चाहती है । ये तो न्यायालय के पर ही हस्तक्षेप हुई न ? हुई की नहीं ? हम क्या चाह रहे हैं कानूनी राज अर्थात कानून की शासन या शासन के लिए कानून ? यादव ने कहा कि इसलिए अभी राष्ट्रपति अध्यादेश का अध्ययन कर रही हैं । वो नेपाल और नेपाली की, लोकतन्त्र और संसदीय प्रणाली के हित में ही करेंगी निर्णय ।
राष्ट्रिय मानव अधिकार आयोग सहित मानव अधिकारवादी संघ–संस्था, नेपाल बार एसोसिएसन, नागरिक अगुवासहित और भी बहुत से संघ–संस्थाओं ने अन्तर्राष्ट्रीय कानून, देश के संविधान विपरीत अध्यादेश जारी नहीं करने का राष्ट्रपति को लगातार दबाब देती आ रही है ।

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