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गुल्जार–ए– अदब द्वारा  मासिक गजल गोष्ठी

 

नेपालगन्ज/(बाँके) पवन जायसवाल । बाँके जिला के नेपालगन्ज में रहे उर्दू साहित्यकारों की संगठन गुल्जार–ए– अदब ने अपनी  मासिक गजल गोष्ठी श्रावण २७ गते शनिवार को किया है ।

गुल्जार–ए–अदब बाँकेद्वारा प्रत्येक महीने के अन्तिम शनिवार को उर्दू साहित्यकारोंद्वारा मासिक गजल गोष्ठी कार्यक्रम होत ीआ रही है उसी अनुसार नेपालगन्ज उप–महानगरपालिका वार्ड नं.–८ स्थित रही महेन्द्र पुस्तकाल के सभा हाल में “फिर यूँ हुआ कि वो भी सर –ए–दार आ गया ” मिश्ररे पर साहित्यकारों ने अपनी–अपनी गजल वाचन किया था ।

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नेपालगंज के उर्दू साहित्यकार सैयद असफाक रसूल नेपाली के अध्यक्षत में, अन्सर नेपालीद्वारा सञ्चालित कार्यक्रम में वरिष्ठ उर्दू शायर तथा गुल्जार–ए–अदब बाँके के अध्यक्ष हाजी अब्दुल लतीफ शौक, सैयद असफाक रसूल नेपाली, गुल्जार–ए–अदब बाँके के सचिव मोहम्मद मुस्तफा अहशन कुरैशी, जमील अहमद हाशमी, अन्सर नेपाली लगायत उर्दू साहित्यकारों गजल वाचन किये थे । वह कार्यक्रम में वरिष्ठ कथाकार सनत कुमार रेग्मी, बव्बु फारुकी लगायत लोगों की सहभागिता रही थी ।

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उसी कार्यक्रम में मोहम्मद मुस्तफा अहसन कुरैशीद्वारा वाचन किया गया ः–

क्या सच छुपा सकेंगे सियासत के बाजीगर,

सच लिखने के लिए जो कलम कार आ गया ।

अन्सर नेपालीद्वारा वाचन किया गया ः–

ऐसा खुला है मक्र का बाजार शहेर में,

हर शक्स आज बिकने को तैयार आ गया ।

सैयद असफाक रसूल नेपालीद्वारा वाचन किया गया ः–

वादा निभाया नाना का उम्मद के वास्ते,

फिर यूँ हुआ कि वो भी सर –ए–दार आ गया ।

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