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डीएवी विद्यालय में “एक आध्यात्मिक सन्ध्या” रामायण नाटिका, फ़ोटो सहित

 

 काठमांडू, 25 जनवरी ।  डीएवी विद्यालय ने अपने अनेक कार्यक्रमों में से एक कार्यक्रम “एक आध्यात्मिक सन्ध्या” के तहत रामायण की भव्य गीती नाटिका प्रस्तुत की । कार्यक्रम 24 जनवरी को प्रस्तुत किया गया ।  कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री कल्याणजी तिमल्सिना, राष्ट्रीय सहसंघचालक हिन्दू स्वयंसेवक संघ नेपाल थे । विशिष्ट अतिथि में प्रा.डा. भागवत ढकाल, प्राचार्य बाल्मिकी विद्यापीठ और श्री स्वामी राममणी दास (इस्कन) थे । अतिथियों में भुवन पंगरिया, सह-संगठन सचिव पशुपति शिक्षा प्रसार समिति, श्री सुनिल अग्रवाल, कोषाध्यक्ष हिन्दू स्वयंसेवक संघ, महावीर घिरैया, महासचिव जन कल्याण प्रतिष्ठान, श्री सच्चिदानन्द मिश्र, हिमालीनी हिन्दी मासिक पत्रिका के सञ्चालक, पदम बिष्ट, हिन्दू स्वयंसेवक संघ, प्रा. रजनी ढकाल जैसे समाज के गण्य-मान्य व्यक्तियों की गरिमामय उपस्थिति थी । कार्यक्रम में लगभग ६०० से ज्यादा लोग उपस्थित थे ।

   कार्यक्रम का आरंभ श्लोक वाचन तथा दीप प्रज्वलन से हुआ । कार्यक्रम में विद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा रामायण के सातों काण्ड (बाल काण्ड, अयोध्या काण्ड, अरण्य काण्ड, किस्किन्धा काण्ड, सुन्दर काण्ड, युद्ध काण्ड और उत्तर काण्ड) पर आधारित गीती नाटिका भव्य और दिव्य रूप से प्रस्तुत किया गया । उपस्थित महानुभावों ने मन्त्रमुग्ध होकर नाटिका का आनन्द उठाया । गीति नाटिका का वर्णन अत्यन्त रोचक और मधुर ढंग से विद्यालय के हिन्दी विभाग के प्रमुख श्री पुरुषोत्तम पोखरेल ने किया था ।

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    कार्यक्रम में विद्यालय के अध्यक्ष श्री अनिल केडिया ने उपस्थित सभी महानुभावों का स्वागत करते हुए कहा कि आज के दिनों में विद्यार्थियों को संस्कारयुक्त शिक्षा देना अत्यन्त जरूरी है जो डीएवी विद्यालय प्रदान कर रहा है । समाज निर्माण में संस्कारवान व्यक्तियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है इसलिए संस्कार जीवन पर्यंत आवश्यक है । उन्होंने आगे बताया कि धन से विचार बडा होता है और विचारवान व्यक्ति समाज में महत्वपूर्ण भूमिका निर्वाह करता है ।

   कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री कल्याणजी तिमल्सिना ने विद्यार्थियों की प्रस्तुति की प्रशंसा करते हुए इस प्रकार के कार्यक्रमों को निरन्तरता देते रहने कि बात बताई । उन्होंने राम और लक्ष्मण के चरित्र को अपनाने की बात कही ।

   डीएवी विद्यालय एक वैदिक विद्यालय है । यह विद्यालय सभी पंथ, सम्प्रदाय, धर्म को सम्मान करते हुए वैदिक अध्यात्म और वैदिक संस्कृति के प्रति आस्था रखता है । विद्यालय के कईं कार्यक्रमों में से एक कार्यक्रम – `एक आध्यात्मिक सन्ध्या´, जिसका उद्देश्य है – विद्यार्थियों में आध्यात्मिक चेतना जगाना । आज के इस व्यस्त, भागदौड और प्रतिस्पर्धात्मक युग में विद्यार्थियों में संयमता और धैर्यता स्थिर करने के लिए अध्यात्म को अति आवश्यक महसुस करते हुए विद्यालय ने इस आध्यात्मिक सन्ध्या कार्यक्रम को रखा था । विद्यालय समय समय पर ऐसे आध्यात्मिक कार्यक्रम करता आ रहा है । कभी हवन करके, कभी संघ दान करके, कभी आध्यात्मिक प्रवचन करके और कभी यौगिक क्रियाकलाप करके । ऐसे कार्यक्रमों में सहभागी होकर अभिभावक वर्ग ने हमेशा प्रसन्नता व्यक्त की है ।

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   जब हम विद्यालय के प्रवेश द्वार से प्रवेश करेंगे तो हम ओम भूर्भुव: स्वः जैसे पवित्र गायत्री मन्त्र और बसुधैव कुटुम्बकम अर्थात विश्व के सारे लोग हमारे अपने हैं, लिखा हुआ देख सकते हैं क्योंकि सभी को अपना आत्मीय मानना, सभी में भगवान का रूप देखना, सभी में भगवान का निवास स्वीकारना वैदिक मान्यता और संस्कृति है । इसी मान्यता और संस्कृति को आत्मसात करते हुए डीएवी विद्यालय परिवार ने यह कार्यक्रम आयोजन किया था । कार्यक्रम श्री राम से सम्बन्धित था और इसे संयोग ही कहना चाहिए कि आज विश्व राममय हो रहा है । श्रीराम हमारी सीता माता के प्राण हैं, हमारी माता जानकी के अर्धांग हैं, नेपाल के दामाद हैं और हमारी संस्कृति में दामाद को विशेष महत्व दिया जाता है । और श्रीराम सभी सनातनियों के लिए आदर्श हैं । श्रीराम संयम, धैर्यता, नैतिकता, न्याय,  सरलता, वीरता, करुणा, शान्ति, प्रेम, समानता और पुरुषार्थ के प्रतिमूर्ति हैं । साथ ही सुविचार, स्वस्थ आचरण, नैतिक आत्मबोध, अध्यात्म बोध, सत्मार्ग प्रेरणा, विश्व परिवार भावना, विश्वबन्धुत्व और सद्गुण प्रवृत्ति के विचार प्रवाह करने वाले सनातन जीवन दर्शन के प्रतीक हैं ।

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   कार्यक्रम में विद्यालय के संगीत विभाग के शिक्षकों ने राम के महत्वपूर्ण भजन से उपस्थित महानुभावों को आनन्द विभोर कराया । अन्त में श्रीराम की आरती से कार्यक्रम समाप्त किया । कार्यक्रम प्रसंशनीय था । कार्यक्रम का संचालन डिल्लीराम शर्मा ने किया था । प्रस्तुति :  डिल्लीराम शर्मा

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