Wed. Apr 29th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

वो धरती मेरी माँ है ‘बाल कविता’ प्रतियोगिता

 

 

हिमालिनी ज्ञानकुंज

‘बाल कविता’ प्रतियोगिता

वो धरती मेरी माँ है

भाव्या झा,  कक्षा–१२,केन्द्रीय विद्यालय, भारतीय राजदूतावास (काठमांडू)

वो धरती मेरी माँ है,
हर कण में जिसकी शान है ।
जिस पर जन्मे वीर अनेक,
हर दिल में हिंदुस्तान है ।
चूमी है जिसको सूरज ने,
बगिया सी वो महक रही,
हर पर्वत, हर नदी यहाँ,
मुझसे कुछ कह रही ।
सीमा पर जो प्रहरी खड़ा,
नयनों में है ज्वाला,
सीने में उसकी आग है,
वो खुद जलता, रखे उजाला ।
खेतों में लहराते धान,
मंदिर–मस्जिद, गुरुद्वारे,
रंग–बिरंगे त्यौहारों से,
गूंजें अपने सारे द्वारे ।
ना डरते हैं आँधियों से,
ना रुकते तूफानों में,
हमने लिखे इतिहास यहाँ,
अपने ही बलिदानों में ।
जो माँ को बाँटने चले,
उनसे यही कहेंगे हम,
“भारत माँ के लाल हैं हम,
मर जाएंगे, झुकेंगे कम ”
वो धरती मेरी माँ है,
इस मिट्टी से प्यार किया ।
जननी, जन्मभूमि को,
हमने सदा नमस्कार किया ।

यह भी पढें   आज देशभर में मध्यम से भारी बारिश का पूर्वानुमान
भाव्या झा केन्द्रीय विद्यालय, भारतीय राजदूतावास (काठमांडू)

 

 

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *