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थाईलैंड–कंबोडिया बीच संघर्ष, ३३ लोगों की मृत्यु

 

काठमांडू, सावन ११– अभी विश्व की नजरें थाईलैंड–कंबोडिया सीमा पर जो सैन्य झड़प चल रही है उस ओर है । इस सैन्य झड़प में अब तक ३३ लोगों की मृत्यु हो चुकी है, घायलों का तो अभी आकंडा भी नहीं मिला है ।
थाईलैंड–कंबोडिया सीमा पर गुरुवार की सुबह से ही दोनों देशों के सैनिकों के बीच गोलीबारी हो रही है । थाईलैंड का कहना है कि उसने कंबोडिया के सैन्य ठिकाने पर हवाई बमबारी की है ।
ये विवाद कोई आज की नहीं है । इस विवाद की जड़ें सौ साल से भी पुरानी है, जब कंबोडिया की फ्रांसीसी कब्जे के बाद सीमाएं तय की गई थीं ।
इससे पहले भी २००८ में स्थिति तब तनावपूर्ण हो गए, जब कंबोडिया ने एक विवादित क्षेत्र में स्थित ११वीं सदी के मंदिर को यूनेस्को वल्र्ड हेरिटेज साइट के तौर पर रजिस्टर कराने की कोशिश की थी । थाईलैंड ने इसका जमकर विरोध किया था । इसके बाद दोनों देशों के बीच कई बार लड़ाईयां हुईं, जिनमें सैनिकों और आम नागरिकों की मौतें हुईं ।
मंदिर के बारे में कहा गया है कि – कंबोडिया के मैदान पर ऊँचे पठार के किनारे स्थित प्रेह विहेयर मंदिर भगवान शिव को समर्पित है । इस मंदिर में कई धार्मिक निर्माण हुए हैं । इसका निर्माण कार्य मुख्य रूप से ११वीं सदी में हुआ था । कंबोडिया के लोगों का मानना है कि यह स्थान हमारे धर्म और आस्था का केंद्र है ।
इसलिए कंबोडिया ने बार बार अंतरराष्ट्रीय न्यायालय से मांग की थी कि वह इस मंदिर पर अधिकार का फैसला उसे दे और थाईलैंड को साल १९५४ से वहां तैनात अपने सैनिकों को हटाने का आदेश दे । थाईलैंड ने कोर्ट के अधिकार क्षेत्र पर शुरुआती आपत्तियां दर्ज कीं, जिन्हें न्यायालय ने २६ मई १९६१ को खारिज कर दिया.
१५ जून १९६२ को अंतिम निर्णय में न्यायालय ने कहा कि साल १९०४ की फÞ्रैंको–सायामी संधि में विवादित क्षेत्र को वाटरशेड लाइन के अनुसार निर्धारित किया गया था और एक संयुक्त सीमा–निर्धारण आयोग के बनाए नक्शे में मंदिर कंबोडिया की सीमा में दिखाया गया था ।
लेकिन थाईलैंड इसे मानने के लिए तैयार नहीं है । जिसका नतीजा दोनों देश के लोग भुगत रहे हैं । कंबोडिया का कहना है कि यह मंदिर हमारे क्षेत्र में आता है तो हम कैसे किसी दूसरे को दे सकते हैं । इसी तरह थाईलैंड भी अपनी जिद पर अड़ा है कि यह हमारे क्षेत्र में पड़ता है । हम किसी भी हाल में यह जमीन किसी दूसरे को नहीं दे सकते हैं ।

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