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जलवायु परिवर्तन और बाघ संरक्षण की चुनौती समय रहते हल करनी होगी : उपराष्ट्रपति यादव

 

काठमांडू, मंगलवार, 29 जुलाई 2025 ।

  • उपराष्ट्रपति रामसहाय प्रसाद यादव ने जलवायु परिवर्तन, मानव–वन्यजन्तु द्वंद्व और बाघ के आवास संकट को समय रहते हल करने की आवश्यकता जताई।
  • उन्होंने बाघ संरक्षण को पर्यटन विकास और आर्थिक लाभ से जोड़ा।
  • उन्होंने अंतरराष्ट्रीय साझेदारी, स्थानीय समुदाय और सरकार के सहयोग से नेपाल में बाघों की संख्या बढ़ने को एक उपलब्धि बताया, लेकिन साथ में चुनौती भी बढ़ने की बात कही।

मुख्य समाचार:
नेपाल के उपराष्ट्रपति रामसहायप्रसाद यादव ने ‘अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस’ के अवसर पर देश और समाज से बाघ संरक्षण के प्रयासों को और मजबूत करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि मानव–वन्यजन्तु संघर्ष, बाघों के प्राकृतिक आवास का नष्ट होना, जलवायु परिवर्तन और अवैध शिकार जैसे मुद्दे गंभीर चुनौती बनकर उभरे हैं, जिन्हें मिलकर हल करना आवश्यक है।

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उपराष्ट्रपति यादव ने कहा, “बाघ संरक्षण से पार्यटन का विकास संभव है, और इससे आर्थिक लाभ भी लिया जा सकता है। बाघ संरक्षित क्षेत्रों को पर्यटक स्थलों के रूप में विकसित किया जा सकता है।”

उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि बाघों की खाल, दाँत और हड्डियों के लिए किए जाने वाले अवैध शिकार के कारण उनकी संख्या दुनिया भर में चिंताजनक रूप से घट रही है। साथ ही, जंगलों की अंधाधुंध कटाई, आग और अव्यवस्थित शहरीकरण के कारण बाघों के आवासीय क्षेत्र हर वर्ष संकट में पड़ते जा रहे हैं।

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नेपाल की उपलब्धि और आगे की चुनौती
उपराष्ट्रपति ने कहा कि “नेपाल ने पिछले दशक में बाघ संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। यह सफलता सरकार, स्थानीय समुदायों, संस्थाओं और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के सामूहिक प्रयास से संभव हो पाई है।”

उन्होंने बताया कि नेपाल में संरक्षित क्षेत्रों का संतुलित प्रबंधन, चोरी-शिकार पर नियंत्रण, जनचेतना और जनसहभागिता जैसे महत्वपूर्ण उपायों के कारण बाघों की संख्या में वृद्धि हुई है। हालांकि, बाघों की बढ़ती संख्या के साथ नई चुनौतियाँ भी सामने आई हैं।

बाघ संरक्षण को बताया पर्यावरणीय संतुलन से जुड़ा विषय
उपराष्ट्रपति यादव ने कहा कि बाघ केवल एक प्रजाति नहीं, बल्कि जैविक विविधता और पर्यावरणीय संतुलन का प्रतीक हैं। बाघ संरक्षण की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं, बल्कि हर नागरिक और संस्था की है।

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उन्होंने आशा व्यक्त की कि अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस लोगों को इस जिम्मेदारी को गंभीरता से लेने और सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करेगा।

पृष्ठभूमि:
बाघ एक सुंदर और पारिस्थितिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण वन्य प्राणी है। हर वर्ष 29 जुलाई को ‘अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस’ मनाया जाता है, ताकि बाघों के संरक्षण के प्रति वैश्विक चेतना बढ़ाई जा सके।

उपराष्ट्रपति यादव ने विश्वास जताया कि यह दिवस सरकार, समाज और सभी हितधारकों को संरक्षण योजनाओं और कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से लागू करने की प्रेरणा देगा।

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