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बड़ा खुलासा ???: डॉ.संगीता मिश्रा को मंत्री बनने से रोकने में स्वार्थ समूह और बिकाऊ मीडिया का षड्यंत्र

 

काठमांडू, 23 सितम्बर । नेपाल की राजनीति में एक बार फिर से स्वार्थ समूहों और बाहरी दबावों की परतें खुलनी शुरू हो गई हैं। ताज़ा मामला डॉ. संगीता मिश्रा से जुड़ा है, जिन्हें स्वास्थ्य मंत्री के लिए सिफारिश किया गया था, लेकिन अंतिम समय में उनका नाम रोक दिया गया। अब यह खुलासा हुआ है कि इसके पीछे न तो अख्तियार (अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोग) की वास्तविक कार्रवाई थी और न ही कोई ठोस प्रमाण, बल्कि एक संगठित गिरोह और मिडिया ट्रायल की साज़िश थी ।

 अख्तियार की आड़ में षड्यंत्र

अख्तियार के एक उच्च अधिकारी ने साफ कहा है कि –
“किसी भी व्यक्ति के खिलाफ चल रहे अनुसन्धान की जानकारी सरकार को नहीं दी जाती। यह प्रक्रिया गोपनीय होती है और केवल अभियोजन के समय ही सार्वजनिक की जाती है। लेकिन डॉ. मिश्रा के मामले में जानबूझकर मिडिया ट्रायल और अफवाहों का सहारा लिया गया।”

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अधिकारी ने आगे बताया कि डॉ. मिश्रा के खिलाफ जो दो मुद्दे उठाए गए हैं, उनमें ठोस प्रमाण मौजूद ही नहीं हैं। फिर भी, स्वार्थी गुटों ने अख्तियार का नाम लेकर यह प्रचारित किया कि मिश्रा पर गंभीर जांच चल रही है।

 बिकाऊ मीडिया की भूमिका

खबरें यह भी बताती हैं कि कुछ तथाकथित ‘बिकाऊ मीडिया’ संस्थानों ने बिना किसी प्रमाण के मिश्रा पर कीचड़ उछालने का काम किया। विदेशी ताक़तों और नेपाल के भीतर सक्रिय स्वार्थी दलालों ने मिलकर उन्हें बदनाम करने की योजना बनाई।

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 विदेशी शक्ति और आंतरिक राजनीति

सूत्रों के अनुसार, नेपाल के जेनजी आन्दोलन में विदेशों की गहरी भूमिका रही है, वहीं सरकार निर्माण और सत्ता समीकरणों में अमेरिका व पश्चिमी देशों का दख़ल बढ़ा है। इस पृष्ठभूमि में, डॉ. संगीता मिश्रा अमेरिका और पश्चिमी शक्तियों की ‘रोज़ाई’ में फिट नहीं बैठीं। यही कारण है कि उनके खिलाफ झूठा माहौल तैयार किया गया।

इसके पीछे कांग्रेस के महामंत्री गगन थापा, पूर्व स्वास्थ्य मंत्री प्रदीप पौडेल और डॉ. विकास देवकोटा जैसे नामों की भी चर्चा हो रही है, जिन्होंने पहले भी मिश्रा को सचिव पद से रोकने की कोशिश की थी।

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 गिरोह का मकसद साफ

  • डॉ. मिश्रा ने हमेशा देशहित को प्राथमिकता दी।
  • विदेशी ताक़तों के इशारों पर काम न करने की वजह से वे निशाने पर आईं।
  • स्वार्थी गुट नहीं चाहते कि स्वास्थ्य मंत्रालय जैसी संवेदनशील कुर्सी पर कोई स्वतंत्र और सशक्त व्यक्तित्व बैठे।

निचोड़

डॉ. संगीता मिश्रा के खिलाफ न तो ठोस सबूत हैं और न ही कोई मजबूत कानूनी आधार। जो कुछ हो रहा है वह केवल स्वार्थी समूहों, विदेशी ताक़तों और बिकाऊ मीडिया का षड्यंत्र है।

👉 सच देर-सबेर सामने आएगा।
👉 देश की राजनीति में दलालों और बाहरी हस्तक्षेप के खिलाफ जनता को सतर्क होना होगा।

श्रोत : न्यूज नेपाल

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