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नेपाल में जेलेन्स्की की संभाव्यता कितना ? : कैलाश महतो 

 

कैलाश महतो, पराशी। दुनिया जानती है कि रुस और युक्रेन तथा पुतिन और जेलेन्स्की के बीच चार से ज्यादा सालों से युद्ध चल रही है। निकास आज भी शून्य है। मगर इन चार + सालों के युद्ध से रुस ने युक्रेन के २०%+ भूमि हड़प कर ली है और युक्रेन को न तो कुछ हाथ लगने बाला है, न पांव।
विचार करने बाली बात यह है कि शूटबूट में सजने बाले युक्रेनी राष्ट्रपति Zelenskyy आज जींस पैंट और भेस्ट में दिखने लगे हैं। जिसने उन्हें उकसाया, युद्धरत बनाया और वर्षों लड़बाया, वो अपने घर बुलाकर क्रूरता के साथ उन्हें बेइज्जत किया, धमकाया और उनके राष्ट्रहित्त के विपरीत उनसे २८ बुँदे सहमति करबाया।
राष्ट्रपति के रुप में जेलेन्स्की का पदार्पण और नेपाल के लिए सीख
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कहा जाता है कि युक्रेन द्वारा NATO में जाने की जिद्द ही रुस युक्रेन का कारण है। मगर विश्लेषकों का मानना है कि यह पूरा सत्य नहीं है।
सन् १९९१ से सन् २०११ तक Viktor Yanukovych के शासन कालतक रुस और युक्रेन का सम्बन्ध बहुत सुमधुर रहा था। फिर रुस और युक्रेन के बीच दरार पैदा करने का साल रहे सन् २००८/०९ और १०। वहीं से यूरोप और अमेरिका ने रुस और युक्रेन के बीच एक ऐसा दुश्मनी पैदा कर दी, जिसकी हिसाब ग़नीतीय रुप में आज युक्रेन को चुकाना पड़ रहा है।
हुआ यह कि सन् २००८ में अचानक विद्युतीय गाड़ियों की बाजार गर्म होने लगी । विद्युतीय गाड़ियों के निर्माण में Lithium-ion cell की जरुरत भयंकर रुप से बढ़ी, जिसकी विशाल खानी युक्रेन में है। युक्रेन में पहला तो Rare Minerals की विशाल खानी है, वहीं यूरोप में दूसरा सबसे विशाल उपलब्धता Natural Gases की। यूरोप को Natural Gases और अन्य खनिज पदार्थ चाहिए थी और अमेरिका को Rare Minerals की आवश्यकता पूर्ति करनी थी। इन्हीं आवश्यकताओं के जुगाड़ में यूरोप ने एक चाल चली। उसने सन् २०११ में युक्रेन को विकास का लालच देते हुए EU Association Agreement अन्तर्गत युक्रेन से यूरोप के साथ व्यापार करने का आग्रह पत्र भेजा। उसके बाद उसके सुरक्षा के लिए NATO समेत से जुड़ने के लिए भी उकसाया। उसमें अमेरिका समेत ने दिलचस्पी दिखायी।
Petro Poroshenko नामक एक TV Journalist ने अपने सन् २०११ से स्थापित TV Channel 5 के जरिये यूरोप और अमेरिका के प्रशंसा और यूरोप तथा अमेरिका के साथ मिलकर जाना युक्रेन के लिए अकल्पनीय लाभ होने का मजबूत भाष्य (narrative) निर्माण किया। युक्रेनी जनता उस TV channel और Petro के बातों को खूब पसन्द किया।
Petro के तरह ही सन् २००३ के आसपास ही Volodymyr Zelenskyy ने भी TV सीरियलों में कॉमेडियन के रुप में काम करना शुरु किया था। Zelenskyy ने खूब प्रसिद्धि कमायी थी ।
सन् २०११ में यूरोप ने युक्रेन को जब यूरोप और नेटो में सामेल होने का प्रस्ताव किया और युक्रेन जब उत्साहित हुआ तो रुस ने उसे धमकाया। रुस के धमकी से परेशान होकर युक्रेनी राष्ट्रपति Viktor Yanukovych ने यूरोप के साथ जाने से इंकार किया। ध्यान देने बाली बात यह भी थी कि यूरोप में अवस्थित अन्य कई यूरोपेली मुल्क यूरोप में सामेल होने के लिए निवेदन देकर भी स्वीकारे नहीं जा रहे थे, वहीं युक्रेन को यूरोप, अमेरिका और नेटो खुद से उकसाता रहा। मगर TV Channel 5 और अन्य अनेक इंटरनेट माध्यमों का प्रयोग कर Petro ने युक्रेनी जनता में यूरोप, अमेरिका और नेटो के बारे में इतना अच्छा प्रभाव छोड़ डाला था कि यूरोप के साथ जाने से मना करने बाले राष्ट्रपति Viktor के विरुद्ध जनता सन् २०१३ में राजधानी कीव (kyiv) और अन्य शहरों के सड़कों पर आ गयी। उस युक्रेनी जन-आंदोलन के आग में घी डालने कई अमेरिकी सिनेटर पहुँच गये। उन अमेरिकी सिनेटरों ने जनता को उकसाकर युक्रेन के सरकारी और राष्ट्रीय संपत्तियों
आन्दोलन महाविद्रोह में तब्दील हो गयी और तीन महीने दो दिनोंतक चले उस अनियंत्रित तूफानी विद्रोह ने युक्रेन को तवाह कर दिया। राष्ट्रपति Viktor पद से राजीनामा देकर अन्तत: देश छोड़कर रुस पालयन हो गये ।
युक्रेन में अमेरिकी दबदवा को बढ़ते देख रुस ने अपने सुरक्षा के लिए युक्रेन से सटे हुए सीमाओं पर सख़्ती बढ़ा दी। रुस युक्रेन सीमाओं पर गृहयुद्ध का माहौल दिख पड़ी। सीमाओं पर अशान्ति का अवस्था व्याप्त रहा। अपने रणनीतिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रुस ने सीमा नाकाओं पर अपने लोगों को तैनात कर दिया और युक्रेन अधीनस्थ क्रिमिया को अपने कब्ज़े में कर रुस में मिलाने को बाध्य हो गया ।
सन् २०१४ से युक्रेन में अन्तहीन युद्ध
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युक्रेनी राष्ट्रपति भिक्टर यानुकोवभीच (Viktor Yanukovych) का देश छोड़कर भागने के बाद सन् २००३ में TV 5 के संचालक पेट्रो पोरोशेंको (Petro Poroshenko) के राष्ट्रपतीय उम्मीदवारी को युक्रेनी जनता ने पसन्द किया और भारी बहुमत से जिताया। पेट्रो (Petro) ने सत्ता में आने के बाद केवल यूरोप, अमेरिका और नेटो के प्रशंसा में समय बिताया और जनसरोकार के बातों से ध्यान हटा दिया। उनके चापलूसपूर्ण राजनीति से तंग आकर जनता ने उन्हें नापसंद करना वाज़िव समझा।
उसी सन् २०१४ के दौरान भोलोदिमीर जेलेन्स्की (Volodymyr Zelenskyy) अपने TV पर Servant of the People नामक एक नाटक चलाया, जिसमें उन्होंने एक शिक्षक के रुप में देश और समाज विकास की अनेक तरकीवों की आकर्षक बातें की जिसे युक्रेनी जनता ने बेहद पसन्द किये । उस नाटक में हिन्दी फ़िल्म नायक के नायक अनिल कपूर के जैसा ही जेलेन्स्की ने चरित्र प्रदर्शन किया। देश के समस्या समाधान का क्रान्तिकारी और जादुई प्रदर्शन की। लोगों ने पसन्द किया, विश्वास किया और सन् २०१९ के राष्ट्रपतीय निर्वाचन में ज़ेलेन्स्की को राष्ट्रपति का उम्मीदवार बनाकर उन्हें भारी मतों से जिताया और युक्रेन का उन्हें अपना राष्ट्रपति बनाया।
जेलेन्स्की (Zelenskyy) के राष्ट्रपति बनने के बाद Petro द्वारा प्रचारित यूरोप, अमेरिका और नेटो का भूत Zelenskyy को भी दबोचे रहा। उन्होंने भी NATO से जुड़ने की जिद्द पकड़ ली जिसे रुस और पुतिन ने पसन्द नहीं किये और उन्होंने फरबरी २४/२०२२ को युक्रेन पर आक्रमण कर दी। उसका भुगतान युक्रेन ने अपनी २०%+ की जमीनी भूभाग गंवाने और उसके पास रहे बहुमूल्य खनिज पदार्थ और Rare Minerals पर अमेरिकी आधिपत्य ज़माने के कष्टकर राहों से गुजाड़ना है।
शिक्षा लेने योग्य घटनाएं
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हो सकता है कि रुस द्वारा युक्रेन पर हुए आक्रमण से पूर्व ही अमेरिका और रुस के बीच कोई गोप्य सम्झौता (silent agreement) हुआ हो जिसके आधार पर रुस से लड़ने के लिए छोटी छोटी दूरी की मिसाइल, हथियार और ड्रोन युक्रेन को उपलब्ध करायी गयी हो जिससे रुस को कोई खास क्षति ना हो और युक्रेन को भी लगे कि अमेरिका उसके साथ खड़ा है। उसके आड़ में रुस युक्रेन का जमीन हड़पे और अमेरिका उसका खनिज पदार्थ। यूरोप चुपचाप तमाशा देख रहा है।
चीन और भारत के बीच अवस्थित नेपाल आज उसी हालात के मुहाने पर तो खड़ा नहीं है, जहाँ X और Y अपना गहरा खेल खेलना चाहते हैं और Z उसका गवाह और विवश दर्शक ?
वैसे नेपाल अब अपने सुरक्षा सीमा से बाहर जा चुका है। फ़िरभी अभी भी नेपाली शासक समय पर होश में नहीं आए तो नेपाल में भी जेलेन्स्की का निर्माण और बर्बादी दोनों तय है। क्योंकि युक्रेन के ज़ेलेन्स्की एक हास्य कलाकार और TV Drama में एक राजनीतिक शिक्षक रहे थे, वहीं नेपाल के कार्यकारी प्रमुख भी राजनीतिक रुप से नेपाली राजनीति में व्याप्त कुरीतियों के भण्डाफोर करने बाले रर्याप कलाकार रहे । दोनों एक ही मैदान के दो यात्री रह चुके हैं।

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कैलाश महतो

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