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कबिता

 

एक प्रश्न-
किस का बुद्ध, कैसा बुद्ध –
वीरेन्द्र प्रसाद मिश्र
तुमने तो सिर्द्धार्थ दिया था
उसने उसको बुद्ध बनाया
फिर किसका बुद्ध – कौन बुद्ध
तुमने एक राजकुमार दिया था
एक पिता का पुत्र दिया था
एक पत्नी का श्रीमान दिया था
एक पुत्र का बाप दिया था

तुम ने केवल कोमल और
ज्ञानपिपासु कुमार दिया था
फिर किस का बुद्ध, कैसा बुद्ध –
सुन्दर पत्नी, प्यारे बच्चे
सुख सम्पत्ति सब छोडे चला तब
ज्ञान प्राप्ति में लगे निरन्तर
पहुँच गया, बैठ गया पिपल तरुतल
प्राप्त हुआ बुद्धत्व उसे
जब पहुँच गया सारनाथ तब वह
दिया शिष्यों को उपदेश वहाँ वहर्
धर्मचक्र परिवर्तन शुभारम्भ किया वह

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फिर किस का बुद्ध, कैसा बुद्ध
मगध ने बौद्ध धर्म राज्य धर्म बनाया
राजा-रानी बने भिक्षु तब
बेटा-बेटी का प्रचार में लगाया
समुद्रपार बौद्ध धर्म पहुँचाया
प्राज्ञ पारमिता बुद्धचरित्र लिखा जहाँ पर
फिर किस का बुद्ध, कैसा बुद्ध –

बुद्ध न नेपाल का न भारत का
वह तो मानव, प्रभु और शान्ति का
प्रकाशपंजु है वह विश्व का
एकाधिकार उस पर कहाँ किसी का
फिर किस का बुद्ध कैस्ाा बुद्ध –

तथागत को क्यों चाहिए नागरिकता प्रमाणपत्र
उसे क्यों सीमित करें सीमा में
बहुतों को तो मार चुके
अब भिन्नता और शान्ति फैलाओं
बना रहे क्यों उसे प्रचार सामग्री
उसके आगे शीश झुकाओ
फिर सब का बुद्ध, करुण और शान्ति का बुद्ध

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बेटी की विदाई प
सोज सिन्हा
शोषित सिंचित नेह अवगुण्ठित नीलम नाी श्रृंगा की
स् नेह सहित पालित प्रतिमर्ूर्ति तूँ ताकत के ह चाह की।
पल पल क्षण क्षण स् वप्निल जीवन को तुझ में किया साका था
तेे सु तेे नूपु से भ+mकृत मेा प्रसाद था।
आज विवस वह आया जबकि तेी कैशोर्य कल्पना मर्ूत करुँ
मातृत्व चि सान्निध्य साथ की बेसुी पुका को मूक करुँ।र्
अर्पण क दूँ मैं बेवस सी अन्यत्र किसी की गोद में
बँची हे तू प्रियतम के प्रेम पाश में नेह में
तनये क ले ट्टकपात आज से जीवन के इस भाग से
मेे आँगन की नहीं कलिका तू खिले गृह स् वामिनी रुप में
खुशियों का उल्लास भा हो तेे ह उच्छवास में
फूले वंश बल्ली तेी छाया जीवन में मधुमास हे
सत्यम् शिवम् सुन्दम् साका सा तेा जीवन वाग हे।

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