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नेपाल वर्तमान समय में एक महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक केंद्र के रूप में स्थित है :पुन

 

काठमाडौं, ६ जेठ।

नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (नेकपा) के नेता वर्षमान पुन ने कहा है कि नेपाल वर्तमान समय में एक महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक केंद्र के रूप में स्थित है।

शनिवार को राजधानी में पार्टी से संबद्ध बुद्धिजीवी संगठन की राष्ट्रीय एकता सभा को संबोधित करते हुए पुन ने कहा कि नेपाल नई और पुरानी वैश्विक शक्तियों के बीच चल रही प्रतिस्पर्धा के प्रभाव में है। उनके अनुसार विश्व राजनीतिक संतुलन में हो रहे बदलावों का असर नेपाल पर भी पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि विश्व शक्ति का केंद्र धीरे-धीरे एशिया की ओर स्थानांतरित हो रहा है और चीन तथा भारत के आसपास वैश्विक शक्तियों का प्रभाव बढ़ रहा है। ऐसे में पुरानी और नई शक्तियों के बीच स्वाभाविक रूप से खींचतान बढ़ी है, जिसका एक महत्वपूर्ण केंद्र नेपाल भी बन गया है। पुन ने कहा कि नेपाल चाहकर भी इस भू-राजनीतिक स्थिति से अलग नहीं रह सकता।

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पुन ने स्पष्ट किया कि संभावित भू-राजनीतिक हस्तक्षेप या दबावों के लिए केवल नेपाल की आंतरिक कमजोरियाँ जिम्मेदार नहीं हैं, लेकिन देश को विभिन्न अंतरराष्ट्रीय हितों और प्रभावों से निपटने के लिए सतर्क और दूरदर्शी नीति अपनानी होगी। उन्होंने कहा कि इस विषय पर एक स्पष्ट राष्ट्रीय दृष्टिकोण की आवश्यकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि पिछले चुनावों में कम्युनिस्ट दलों के जनाधार में आई कमी का प्रमुख कारण वर्ष २०७४ (2017) में बने नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (नेकपा) के एकीकरण को बनाए रखने में असफल होना था। उनके अनुसार लगभग दो-तिहाई जनमत प्राप्त करने के बावजूद कम्युनिस्ट नेतृत्व उस जनादेश का अपेक्षित उपयोग नहीं कर सका, जिससे जनता में निराशा उत्पन्न हुई।

पुन ने कहा कि कम्युनिस्ट आंदोलन को अपनी विचारधारा, नेतृत्व, कार्यशैली और संगठनात्मक कमजोरियों की ईमानदार आत्मसमीक्षा करनी होगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि जनता से दूरी बनने के कारणों को समझे बिना आगे का रास्ता तय नहीं किया जा सकता।

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समाजवादी आंदोलन के भविष्य पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया में समाजवाद की संभावनाएँ अभी समाप्त नहीं हुई हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि श्रीलंका में कम्युनिस्ट पृष्ठभूमि की पार्टी सत्ता में लौटी है और अमेरिका जैसे पूंजीवादी देश में भी समाजवादी विचारों को समर्थन मिल रहा है। उनके अनुसार अमेरिका और यूरोप के कई देशों में लोग कम्युनिस्ट झंडे लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं, जो समाजवादी विचारधारा की निरंतर प्रासंगिकता को दर्शाता है।

पुन ने तर्क दिया कि गणतंत्र, समावेशिता, धर्मनिरपेक्षता और सामाजिक न्याय स्थापित करने में कम्युनिस्ट आंदोलन की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, लेकिन इन उपलब्धियों के महत्व को जनता तक प्रभावी ढंग से नहीं पहुँचाया जा सका, जिसके कारण पार्टी रक्षात्मक स्थिति में पहुँची।

उन्होंने कहा कि नेपाल के राजनीतिक इतिहास में जनता ने हमेशा उन शक्तियों का समर्थन किया है जिन्होंने अन्याय, भ्रष्टाचार और अव्यवस्था के खिलाफ संघर्ष किया। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि जनता को लगा कि राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) सुशासन और परिवर्तन के मुद्दों पर संघर्ष कर रही है, इसलिए उसे जनसमर्थन मिला।

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पुन ने कहा कि अब नेकपा को भी भेदभाव, मनमानी, राष्ट्रीय हितों पर आघात, संवैधानिक अधिकारों पर अंकुश तथा संसद की उपेक्षा जैसी प्रवृत्तियों के खिलाफ संघर्ष करना होगा। उनका कहना था कि यदि पार्टी जनता के मुद्दों के लिए सक्रिय रूप से संघर्ष करती है तो उसे फिर से जनविश्वास प्राप्त हो सकता है।

पूर्व राजा ज्ञानेन्द्र शाह का उल्लेख करते हुए पुन ने कहा कि इतिहास गवाह है कि जनता ने ही उन्हें सत्ता से बाहर किया था। उन्होंने यह भी कहा कि केवल सोशल मीडिया या आभासी माध्यमों से प्राप्त लोकप्रियता लंबे समय तक टिकाऊ नहीं होती और वास्तविक जनसमर्थन का कोई विकल्प नहीं है।

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