काठमांडू में भव्य रूप से संपन्न हुई रातो मच्छिन्द्रनाथ की भोटो जात्रा, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री रहे मौजूद
काठमांडू, 20 जून। नेपाल की राजधानी काठमांडू घाटी के सबसे प्राचीन और महत्वपूर्ण धार्मिक-सांस्कृतिक उत्सवों में से एक रातो मच्छिन्द्रनाथ की भोटो जात्रा शनिवार को ललितपुर के जावलाखेल में पारंपरिक श्रद्धा और भव्यता के साथ संपन्न हुई।
वर्षा, समृद्धि और अच्छी फसल के देवता माने जाने वाले रातो मच्छिन्द्रनाथ की रथयात्रा के समापन अवसर पर बहुमूल्य रत्नों से जड़ी पारंपरिक भोटो (विशेष बनियान) को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया गया। इस अवसर पर नेपाल के राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल ने राष्ट्रप्रमुख के रूप में समारोह में भाग लेकर भोटो का अवलोकन किया तथा रातो मच्छिन्द्रनाथ के दर्शन कर प्रसाद ग्रहण किया।
समारोह में उपराष्ट्रपति रामसहाय यादव, प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह सहित अनेक विशिष्ट अतिथि, जनप्रतिनिधि और हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे।
परंपरा के अनुसार, रातो मच्छिन्द्रनाथ के रथ को लगनखेल से जावलाखेल पहुंचाए जाने के चार दिन बाद भोटो जात्रा का आयोजन किया जाता है। मान्यता है कि मणि, माणिक्य और अन्य बहुमूल्य रत्नों से सुसज्जित इस भोटो को प्रत्येक वर्ष रथयात्रा के अंतिम दिन सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया जाता है।
भोटो दर्शन के बाद रातो मच्छिन्द्रनाथ की प्रतिमा को प्राचीन कलात्मक पालकी (खट) में विराजमान कर पारंपरिक बाजा-गाजे और धार्मिक शोभायात्रा के साथ जावलाखेल से बुङ्मती स्थित मच्छिन्द्रनाथ मंदिर ले जाया जाता है।
नेपाल की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाने वाली यह जात्रा केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक ही नहीं, बल्कि वर्षा, कृषि समृद्धि, अन्न उत्पादन और प्राकृतिक संतुलन की कामना से जुड़ी सदियों पुरानी परंपरा का भी प्रतिनिधित्व करती है। इस कारण रातो मच्छिन्द्रनाथ को अन्नदाता, वर्षा के देवता तथा अनिष्ट और अकाल से रक्षा करने वाले देवता के रूप में विशेष श्रद्धा के साथ पूजा जाता है।



