Sun. Oct 11th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति लोकतंत्र के लिए घातक : बिमल सरार्फ

 

बिमल सरार्फ, रक्सौल27 सितम्बर 2026 । लोकतंत्र में राजनीतिक दलों के बीच विचारों का मतभेद स्वाभाविक है। सत्ता पक्ष और विपक्ष का अपना-अपना दायित्व होता है। लेकिन जब राजनीति जनहित के मुद्दों से हटकर एक-दूसरे पर आरोप लगाने और दोष मढ़ने तक सीमित हो जाती है, तो इसका सबसे बड़ा नुकसान लोकतांत्रिक व्यवस्था और जनता को होता है।

आज राजनीतिक बहस में विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, महंगाई और सामाजिक सरोकार जैसे महत्वपूर्ण विषयों की जगह आरोप-प्रत्यारोप अधिक दिखाई देने लगे हैं। एक दल दूसरे पर आरोप लगाता है और दूसरा दल उसका जवाब आरोपों से ही देता है। इससे जनता के वास्तविक सवाल पीछे छूट जाते हैं।

यह भी पढें   आज का पंचांग: आज दिनांक 10 अक्टुबर 2026 शनिवार शुभसंवत् 2083

विपक्ष का काम सरकार की कमियों को सामने लाना और सरकार का दायित्व अपने कार्यों का तथ्यपूर्ण जवाब देना है। स्वस्थ लोकतंत्र में आलोचना आवश्यक है, लेकिन आलोचना तथ्यों और मर्यादा के साथ होनी चाहिए। व्यक्तिगत आरोप, कटु भाषा और बिना प्रमाण के आरोप लोकतांत्रिक संवाद को कमजोर करते हैं।

राजनीति का उद्देश्य केवल सत्ता प्राप्त करना नहीं, बल्कि जनता की समस्याओं का समाधान करना होना चाहिए। राजनीतिक दल यदि आरोप-प्रत्यारोप की जगह स्वस्थ संवाद, सकारात्मक बहस और जनहित के मुद्दों को प्राथमिकता दें, तो लोकतंत्र अधिक मजबूत होगा।

यह भी पढें   सोने की कीमत में बढ़ोतरी

जनता भी राजनीतिक दलों से यही अपेक्षा करती है कि वे एक-दूसरे को नीचा दिखाने के बजाय देश और समाज को बेहतर बनाने की दिशा में प्रतिस्पर्धा करें। लोकतंत्र की असली जीत किसी दल की हार या जीत में नहीं, बल्कि जनता के हित और विश्वास की रक्षा में है।

बिमल सर्राफ

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com