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जिमूतवाहन देवता की पूजा अर्चना कर तराई-मधेश कें महिलाओं नें मनाया जितिया पर्व

 

हिमालिनी डेस्क
काठमांडू, १३ सितंबर ।
तराई–मधेश के महत्वपूर्ण पर्व जितिया अंतर्गत आज महिलाओं ने व्रत पूर्वक जिमूतवाहन देवता की पूजा अर्चना के साथ साथ कथा श्रवण किया ।

मैथिली, भोजपुरी, राजवंशी, थारू लगायत समुदाय कल से ही राजधानी में भी जितिया के संदर्भ में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन कर रहे हैं, जो आज तक जारी रहा ।

चांद्र मास के आधार पर आश्विन कृष्ण अष्टमी को किए जाने वाले इस व्रत के एक दिन पूर्व यानी सप्तमी की रात को अष्टमी तिथि पड़ने से पूर्व दही, चिउड़ा, अमावट आदि भोजन करते हैं, जिसे अंगुठन कहा जाता है ।

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इस तिथि में सुबह नहाय खाय के साथ साथ मड़ुवा की रोटी और मछली भोजन को सांस्कृतिक माना गया है । और यह प्रथा अब भी किसी न किसी रूप में विद्यमान है ।

इस व्रत के प्रभाव से खास तौर पर संतान का हर तरह से कल्याण होने के साथ साथ सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होने का जन विश्वास है ।

 

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