प्रवासी भारतीय, भारत की शक्ति : योगेश मोहनजी गुप्ता
*प्रवासी भारतीय, भारत की शक्ति*
यह एक प्रमाणित सत्य है कि भारतीयों का मस्तिष्क विश्व की किसी भी जाति व देश के मस्तिष्क से अत्यधिक श्रेष्ठ है। यदि हम इतिहास के पन्ने पलटते हैं तो ऐसे बहुत से उदाहरण मिलते हैं जब, भारतीयों ने अपने मस्तिष्क के बल पर विश्व में अपनी श्रेष्ठता प्रदर्शित की है। नालन्दा, तक्षशिला विश्वविद्यालय इसके सबसे बड़े उदाहरण हैं, जब 1500 वर्ष पूर्व विश्व के कोने-कोने से छात्र यहाँ आकर भारतीय आचार्याे से विद्या ग्रहण कर विभिन्न विधाओं में पारंगत होते थे। यदि हम आज की बात करे तो भारत का केरल प्रदेश एक ऐसा उदाहरण है, जहाँ 100 प्रतिशत साक्षरता होने के कारण वह वर्तमान में एक विकसित प्रदेश की श्रेणी में माना जाता है। उसके विकास के पीछे जो सबसे बड़ी शक्ति है, वह हैं केरल प्रदेश की महिलाएँ। उन्होंने नर्सिंग की शिक्षा ग्रहण कर सम्पूर्ण विश्व में फैलकर अपनी सेवाएँ दीं और वहाँ से विदेशी मुद्रा अर्जित कर अपने प्रदेश में भेजी, जिससे प्रदेश का चहुँमुखी विकास सम्भव हो पाया।
विश्व में भारतीय प्रतिभाओं का एवं प्रवासी भारतीयों का आधिपत्य फैलता जा रहा है और भारतीय युवाओं के दिमाग का लोहा पूरा विश्व मानने के लिए बाध्य हो चुका है। सबसे नवीनतम उदाहरण गूगल के सीईओ सुन्दर पिचई हैं। उनकी मूल कम्पनी अल्फाबेट ने उन्हें अपना सीईओ बना लिया। इस पद पर पहुँचने वाले पिचई पहले भारतीय है, जिन्होंने भारत का गौरव बढ़ाया और विश्व की सबसे बड़ी कम्पनी के सीईओ बने। पिचई तमिलनाडु के रहने वाले हैं तथा उन्होंने खड़गपुर से शिक्षा ग्रहण की। इसी प्रकार विश्व की प्रसिद्ध कम्पनी माईक्रोसाॅफ्ट को सत्य नडेला चला रहें हैं, जो हैदराबाद रहने वाले हैं। इसी प्रकार कानपुर के मेहरोत्रा, माइक्रोन कम्पनी के सीईओ शान्तनु नारायण एडोब के सीईओ है, आगरा के पालीवाल, हरमन इण्टर नेशनल के अजय बंगा माइक्रोकार्ड के सीईओ है, ये विश्व की प्रसिद्ध कम्पनी में सबसे ऊँचे पद पर भारत का गौरव बड़ा रहें हैं।
कनाडा के सरदार जगमीत सिंह चुनावों में भारी बहुमतों से जीतकर उपप्रधानमंत्री के पद को सुशोभित कर रहें हैं और यही नहीं चुनावों में विजय प्राप्त करने के पश्चात उन्होने पार्लियामेंट में जहाँ भँगड़ा और शबद कीर्तन किया तथा पार्लियामेंट में मौजूद कैनेडियन सांसदों को भी भँगड़े की धुन पर नाचने को प्रसन्नतापूर्वक मजबूर कर दिया। इसमें सन्देह नहीं कि विदेशों में रह रहे भारतीय मूल के कारीगरों, वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, उद्यमियों, चिकित्सकों के कार्य की उनके देश में मुक्त कंठ से प्रशंसा हो रही है। उनकी ईमानदारी, कर्मठता, मेहनत और ज्ञान का लोहा सम्पूर्ण विश्व स्वीकार कर रहा है। दुनिया के कई देशों की अर्थव्यवस्था को सुदृण करने के लिए भारतीय मूल के अर्थशास्त्रियों ने अपनी प्रशंसा करवाई है। आईटी, बैंकिग, कम्प्यूटर, मैनेजमेंट, राजनीति आदि सभी क्षेत्रों में भारतीय मूल के लोगों को ईश्वर ने स्वयं आशीर्वाद देकर भेजा है। भारत की आर्थिक सुस्ती को सम्भालनें में भी प्रवासी भारतीयों का बहुत बढ़ा योगदान है। आज उन्हीें की देशभक्ति के कारण भारत का विदेशी मुद्रा भण्डार 450 अरब डाॅलर के कीर्तिमान पर पहुँच चुका हैं।
संयुक्त राष्ट्र की संस्था इण्टरनेशनल आरर्गेनाईजेश ऑफ माइग्रेशन की वर्ष 2019 की रिपोर्ट यह दर्शाती है कि विदेशों से मुद्रा भेजने में भारतीय प्रवासी अन्य किसी भी देश के प्रवासी से बहुत आगे है। वर्ष 2018 में प्रवासी भारतीयों ने 80 अरब डाॅलर अर्थात् 5.5 लाख करोड़ रुपया भारत में भेजा, जिसने भारत की अर्थव्यवस्था को सम्भालने में बहुत बड़ा योगदान दिया। भारत के बाद विदेशी मुद्रा भेजने में चीनीयों का स्थान आता है, जिन्होने 67 अरब डाॅलर अपने देश में भेजे। वर्ष 2010 से भारतीय प्रवासी, विदेशी मुद्रा अपने देश में भेजने में प्रथम स्थान पर छाए हुए हैं और स्थिति इतनी सुखद एवं भारत के पक्ष में है कि भारत में दूसरे माध्यमों से जितना विदेशी मुद्रा भण्डार आ रहा है उससे दुगना, प्रवासी भारतीय अपनी मेहनत से धन अर्जित कर भारत में भेज रहें हैं। भारत के लिए प्रवासी भारतीय एक बहुत बड़ी पूंजी है जो विश्व के 200 देशो में करीब 3 करोड़ की जनसंख्या के रूप में फैले हुए हैं।
भारत के इस स्थिति तक पहुँचने में भारत की जनसंख्या के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। भारत की जनसंख्या, भारत देश की एक बहुत बड़ी शक्ति है जो, शिक्षित होकर पूरे विश्व में फैल रही है और वहाँ दिन रात परिश्रम कर वहाँ की बहुमूल्य विदेशी मुद्रा भारत में भेज रही है। आक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्रीयों ने इस विषय पर गहन अध्ययन किया और यह निष्कर्ष निकाला कि प्रतिभाशाली वर्ग में 7.5 प्रतिशत वृद्धि के साथ भारत, दुनिया के पहले सोपान पर स्थापित होगा। अमेरिका की ऐजेंसिया भी मानने लगी हैं कि यदि भारत इसी प्रकार युवा राष्ट्र बना रहा तथा सरकार ने जनसंख्या निरोधक बिल जैसा कोई कार्य नहीं किया और शिक्षा का प्रसार अच्छे प्रकार से किया तो भारत, अपने प्रवासी भारतीयों की शक्ति पर आगामी 10 वर्षों में विश्व का सबसे श्रेष्ठ, मजबूत और विकसित देश बनकर उभरेगा और दुनिया उसके विकास को देखकर अचम्भित होगी। *योगेश मोहनजी गुप्ता*

