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 ज़िन्दगी का दूसरा नाम ही है संघर्ष : कुसुम गोयल

 

 अभी है बाकी : कुसुम गोयल

चेहरे से घूंघट,
तो हट गया है।
समाज की सोच से,
हटना अभी है बाकी।

परंपरा की बेड़ियां,
तो टूट गई है।
बदलाव आना,
अभी है बाकी।

घर की दहलीज,
तो लांघ ली है।
चांद को छूना,
अभी है बाकी।

चरित्र पर दोष,
लगाना अब मुमकिन नहीं।
पर सूरज सी तपिश,
अभी है बाकी।

अत्याचार सहना,
तो छोड़ दिया है।
शक्ति को सलाम,
अभी है बाकी

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‌‍कुसुम गोयल

 ज़िन्दगी का दूसरा नाम
ही है संघर्ष,
असम्भव के विरूद्ध,
सम्भव की है ये शुरुआत।

परिसि्थतिया॑ होती नहीं,
कभी एक समान।
कभी सम्मुख, कभी विरोधी,
का देती है आभास।

संघर्ष के लिए रहना,
है हर पल तैयार।
चुनौतियों को करते,
रहना है स्वीकार।

कुछ किए बिना कभी,
नहीं होती जय जयकार।
कर्म से ही सम्भव है,
वैभव के अलंकार।

संघर्ष से मुंह मोड़ने वालों की,
होती है हर पल हार।
दृढ़ संकल्प से बनजाते है,
दुनिया के सरताज।

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असम्भव को बनाना हैं,
हर हाल में सम्भव।
मजबूत प्रयास से ही होंगे सफल,
वर्तमान के उत्सव…..

 

कुसुम गोयल, बिरतामोड

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