रक्षासूत्र : कवि दिनेश सिंह सेंगर
रक्षासूत्र
(१)
आज हमारे घर में देखो,
प्यारी बहिना आई है
भाई का अभिनन्दन करने,
थार सजाकर लाई है।
जिसमें सब धागे स्नेह के,
आशाओं के मोती हैं
आज बांधने रक्षा का वो,
सूत्र साथ में लाई है।।1
(२)
तिलक लगाकर वो ललाट पर,
विजयकामना करती है
दीप जला कर करे आरती,
मंगल चारण करती है।
चिरंजीवी हो भाई मेरा,
ईश्वर दे वरदान मुझे
वो स्नेह के सारे मोती,
सहज लुटाया करती है।। 2
कवि दिनेश सिंह सेंगर
अम्बाह जिला-मुरैना मध्यप्रदेश


