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Kalakar-6



लिलानाथ  गौतम :२२ फरवरी की सुबह नेपाली फिल्मी क्षेत्र से आवद्ध कुछ निर्देशक तथा कलाकार को नक्सालस्थित भारतीय सांस्कृतिक केन्द्र के आगे जमा होने के लिए फरमान जारी किया गया था । लोग आ भी रहे थे और उत्साहित भी लगते थे । उसी क्रम में कुछ कलाकार बोल रहे थे- ‘मुझे तो पौने ८ बजे ही बुलाया गया था’, और कुछ कहते थे- ‘मुझे तो ८ बजे के लिए कहा गया था ।’ ९ बज रहा था, लेकिन आयोजक का कोई अता-पता नहीं था । इसीलिए कुछ लोग खीझें हुए से थे । ८ बजे ही निर्धारित स्थान में पहुँचने वालों में से एक आरोहण गुरुकुल के संस्थापक सुनील पोखेरल भी थे । वे भी बडÞबडÞा रहे थे, मगर चेहरा से ऐसा कुछ नहीं झलकता था । लेकिन उन्होनें कहा- ‘८ बजे बुलाकर ९ बजे तक हम को प्रतीक्षा में रखने का मतलव क्या है – मैं तो नहीं जाऊँगा ।’ उन से सहमति जतानेवाले कुछ कलाकार और भी थे । लेकिन ‘मैं नहीं जाऊँगा’ कहनेवाले वही पोखरेल बाद में ‘गाडÞी’ के भीतर १ नम्बर सिट पर बिराजमान दिखाई दिए ।
खैर, कार्यक्रम में जाने वाले पोखरेल सहित प्रायः सभी अति उत्साहित थे । हों भी क्यों नहीं ! बलिबुड के ख्यात्रि्राप्त फिल्म अभिनेता एवं निर्देशक अमोल पालेकर नेपाल आए हुए थे । उनके ही सानिध्य में आयोजित एकदिवसीय कार्यशाला में सहभागिता जताने के लिए ये सब कलाकार अगले कुछ दिनों से ही ललायित थे । कार्यक्रम स्थल था- प्राकृतिक सौर्न्दर्य से परिपर्ूण्ा धुलिखेल स्थित होटल- हिमालयन होराइजन ।
लेकिन कार्यक्रम में सहभागिता को लेकर कुछ फिल्मी कलाकार तथा निर्देशक के बीच वैमनस्यता होने की बात भी बाहर आई । समाचार यह था कि निर्देशक समाज के महासचिव पद पर आसीन दिनेश डिसी ने ‘कार्यक्रम के बारे में मुझे जानकारी क्यों नहीं दी गई -‘ कहते हुए अपने पद से ही इस्तीफा दे दिया । यद्यपि उनके इस्तीफे के पीछे कुछ और ही कारण होने की बात भी बताई जा रही है । इसी तरह ‘भारत से ख्यात्रि्राप्त निर्देशक आए हुए हैं, लेकिन बहुत फिल्मकर्मी को जानकारी भी नहीं है’ कहते हुए कुछ कलाकार आक्रोशित भी थे ।
इसके अलवा उस दिन नक्साल में नेपाली फिल्म ‘छड्के’ के बारे में भी कालाकारों के बीच खूब बहस हर्ुइ । ‘छड्के’ उसी दिन से पर््रदर्शन में आ रहा था । बहस के लिए मसाला लेकर आए थे- कान्तिपुर दैनिक के फिल्मी पत्रकार सुशील पौडेल । कालाकारों के साथ ही धुलिखेल जा रहे पौडेल कह रहे थे- ‘लगता है ‘छड्के’ नयाँ रर्ेकर्ड कायम करेगा ।’ पहले दिन में ही ‘गोपिकृष्ण भूमिज’ के दो हाँल ‘हाउसफूल’ हो गए ।’ इसी बीच ९ बजे के आसपास नेपाल स्थित भारतीय दूतावास से भेजी गई ‘वनली टुरिष्ट’ लिखी बस कलाकार को लेजाने के लिए पहुँची । सभी लोग दौडÞते हुए भीतर घुसे और चल पडे धुलिखेल की ओर, जहाँ भारत से आए हुए फिल्म निर्देशक अमोल पालेकर और उनकी धर्मपत्नी तथा पटकथाकार सन्ध्या गोखले सहित नेपालस्थित भारतीय दूतावास के कुछ अधिकारी भी इन्ही कलाकारों की प्रतीक्षा कर रहे थे ।
नेपाली फिल्मी बाजार दिनों दिन कमजोर होते जा रहा है । ऐसी अवस्था में आयोजित यह कार्यशाला बहुत ही महत्वपर्ूण्ा हो सकती है । भारतीय दूतावास की सक्रियता,  बीपी कोइराला भारत-नेपाल फाउन्डेशन द्वारा ग्राप\mर्टाई नेपाल और माउन्टेन रिभर फिल्मस् के सहकार्य में आयोजित इस कार्यक्रम को सम्बोधन करनेवाले महानुभावों ने भी इस बात की ओर ध्यानाकर्षा किया । कार्यक्रम को सम्बोधन करते हुए नेपाल स्थित भारतीय राजदूतावास के डीसीएम जयदीप मजूमदार ने कहा कि कार्यक्रम के माध्यम से नेपाली फिल्म क्षेत्र में कुछ सुधार होने की आशा रख सकते हैं । उनका कहना था- ‘दो देशों के फिल्म कलाकारों के बीच हो रहे अनुभव के आदन-प्रदान से हमारे सांस्कृतिक सम्बन्ध और भी मजबूत हो सकते हंै । इसीतरह ग्राफ्र्टाई नेपाल के अध्यक्ष बैकुण्ठ मास्के तथा दूसरे वक्ता चन्द्रकान्त झा ने भी कार्यशाला को महत्वपर्ूण्ा बताया ।
कार्यक्रम के औपचारिक उद्घाटन समारोह के बाद सन्ध्या गोखले की कथा तथा अमोल पालेकर के निर्देशन में निर्मित फिल्म ‘एण्ड वन्स एगेन’ दिखाया गया । बाद में इसी फिल्म पर आधारित होकर पालेकर



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