कुलमान को पुनः नियुक्त करने में प्रधानमन्त्री अनिच्छुक, उठाया कानूनी प्रश्न
काठमांडू, १५ सितम्बर । विद्युत प्राधिकरण में कुलमान घिसिङ को पुनः नियुक्त करने के लिए प्रधानमन्त्री केपशर्मा ओली अनिच्छुक दिखाई दिए हैं । सत्ताधारी दल नेपाल कम्युनिष्ट पार्टी के अध्यक्ष एवं पूर्व प्रधानमन्त्री पुष्पकमल दाहाल प्रचण्ड घिसिङ के पक्ष में हैं, लेकिन प्रधानमन्त्री की अनिच्छा के कारण ही घिसिङ को पुन नियुक्ति नहीं मिल रही है । उनकी कार्यकाल गत आइतबार ही समाप्त हो चुकी है ।
ऊर्जा मन्त्रालय ने घिसिङ को पुनः नियुक्ति के लिए प्रस्ताव भी तैयार किया है, लेकिन सोमबार सम्पन्न मन्त्रिपरिषद् बैठक में यह विषय प्रवेश नहीं हो सका । ऊर्जा मन्त्रालय स्रोत के अनुसार प्रधानमन्त्री ओली के दबाव के कारण ही तैयार प्रस्ताव पेश नहीं हो पाया है । कहा गया है कि प्रधानमन्त्री ओली ने कुलमान को पुनः नियुक्ति में कानूनी व्यवधान संबंधी प्रश्न भी किया है । प्रधानमन्त्री का कथन उल्लेखत करते हुए कहा गया है कि घिसिङ को पुनः नियुक्ति के संबंध में ऊर्जा मन्त्री वर्षमान पुनः की ओर से तैयार प्रस्ताव में ओली ने कानुनी प्रश्न किया है, प्रधानमन्त्री ओली को मानना है कि इसमें अधिक विचार–विमर्श की आवश्यकता है । प्रधानमन्त्री ओली की यही अडान के कारण सोमबार पुनः नियुक्ति संबंधी प्रस्ताव मन्त्रिपरिषद् में पेश नहीं हो सका ।
स्मरणीय है, तत्कालीन ऊर्जा मन्त्री जनार्दन शर्मा ने वि.सं. २०७३ साल भाद्र २९ गते घिसिङ को प्राधिकरण में प्रमुख कार्यकारी के रुप में नियुक्त किया था । ४ साल का कार्यकाल आइतबार ही समाप्त हो चुका है । उनको पुनः नियुक्त करने के लिए जनदबाव भी है । । सोमबार शाम उनको पुनः नियुक्ति मांग करते हुए युवा समूह ने माइतीघर मण्डला में प्रदर्शन भी किया है । जिस वक्त घिसिङ प्राधिकरण में कार्यकारी नियुक्त हुए थे, उस समय देश में दैनिक १८ घंटा तक लोडसेडिङ होता था । घिसिङ नियुक्त होते ही लोडसेडिङ अंत हो गया और ३४ अरब ऋणात्मक अवस्था में रहे प्राधिकरण को उन्होंने ने ही अपने कार्यकाल में लगभग ११ अरब नाफा में पहुँचाया है । यही कारण आम जनता घिसिङ के पक्ष में दिखाई दिए हैं ।

