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वन्देमातरम् का उदघोष विश्व पटल पर छाए ! डा.विजय दत्त

 

डा.विजय दत्त, काठमांडू, १५ अगस्त। नेपाल भारत का संबध संसार मे अत्युत्म है । ऐसी धार्मिक,सामाजिकआर्थिक,सांस्कृति सबंध को ही तो लौकिक मे अलौकिक कहाँ जाता है ।
*भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस,15 अगस्त 2026,के ऐतिहासिक अवसर पर विशेष शुभकामना !*
*वन्देमातरम् का 150 वां बर्ष अौर विकसित भारत 2047 के लिए युवाशक्ति* थीम ये दिखलाता है भारत का भिजन,मिसन एवम् डिटरमिनेशन ।

​15 अगस्त 1947 को भारत ने गुलामी की जंजीरों को तोड़कर स्वतंत्रता के एक नए शुभ प्रभात में कदम रखा था। आज, 2026 में, जब भारत अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है, तो *वन्देमातरम्* की हुंकार केवल भारत की भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं रही अपितु भारत के स्वतंत्रता संग्राम का यह अमर मंत्र आज सम्पूर्ण विश्व पटल पर भारत के बढ़ते प्रभुत्व, सांस्कृतिक गौरव और आर्थिक सामर्थ्य का प्रतीक बनकर गूंज रहा है।

​विगत 13 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने जिस तेज गति से आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और कूटनीतिक धरातल पर प्रगति की है, उसने देश को पुनः *विश्व गुरु* के पद पर आसीन करने की दिशा में एक नया मार्ग प्रशस्त किया है।

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*​आर्थिक महाशक्ति बना भारत*
​पिछले 13 वर्षों में भारत ने अपनी आर्थिक नीतियों में एक बड़ा परिवर्तन देखा है। भारत केवल वैश्विक संकटों से खुद को बचाने वाला देश नहीं रहा,अपितु विश्व अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख इंजन बन चुका है। ​वैश्विक अर्थव्यवस्था में छलांग: ब्रिटेन को पछाड़कर दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के बाद भारत अब 3सरी सबसे बड़ी आर्थिक ताकत बनने की ओर अग्रसर है।

*​आत्मनिर्भर भारत व डिजिटल क्रांति:*
डिजिटल इंडिया और UPI तकनीक ने पूरी दुनिया को अचंभित किया है। आज भारत का डिजिटल पेमेंट मॉडल विकसित देश भी अपना रहे हैं। ‘मेक इन इंडिया’ और PLI योजनाओं ने भारत को वैश्विक विनिर्माण (Manufacturing) का केंद्र बना दिया है।

*सामाजिक उत्थान और समावेशी विकास*
​”सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” केवल एक नारा नहीं, बल्कि विगत 13 वर्षों के सुशासन का मूलमंत्र रहा है। यह सर्वव्यापी हो चुका है ।

*आयुष्मान भारत* (स्वास्थ्य सुरक्षा), पीएम आवास योजना, हर घर नल से जल, और जनधन खातों के माध्यम से करोड़ों नागरिकों को गरीबी रेखा से बाहर निकालकर मुख्यधारा में लाया गया।

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*​नारी शक्ति का परचम*:
महिला-नेतृत्व वाले विकास (Women-Led Development) को प्राथमिकता दी गई है, जिससे प्रशासनिक, आर्थिक और सैन्य क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी अभूतपूर्व रूप से बढ़ी है।

*सांस्कृतिक पुनर्जागरण और राष्ट्रीय गौरव*
​13 वर्षों में भारत ने अपनी सांस्कृतिक जड़ों को पहचानते हुए वैश्विक स्तर पर अपनी सांस्कृतिक पहचान को एक नया आयाम दिया है।

*​विरासत पर गर्व:* अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण, काशी विश्वनाथ धाम और उज्जैन के महाकाल लोक का पुनरुद्धार इस बात का प्रमाण है कि विकास और विरासत साथ-साथ चल सकते हैं।
​वैश्विक धरातल पर भारतीय संस्कृति: अंतरराष्ट्रीय योग दिवस, आयुर्वेद का वैश्विक प्रसार और संयुक्त राष्ट्र में भारत के सांस्कृतिक मूल्यों की गूंज ने दुनिया को भारत के “वसुधैव कुटुम्बकम्” के दर्शन से जोड़ा है। जय श्री राम से जय सीयाराम कि ओर प्रस्थान हुआ है ।

*वैश्विक कूटनीति और ‘विश्व गुरु’ का संकल्प*
​आज की वैश्विक कूटनीति में भारत एक ‘दर्शक’ नहीं,अपितु’ ‘निर्णायक’ की भूमिका निभा रहा है।

*​संतुलित कूटनीति:* रूस-यूक्रेन संघर्ष हो या वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) का संकट, भारत ने सदैव शांति, कूटनीति और अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखकर स्वतंत्र विदेश नीति का परिचय दिया है।

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*​ग्लोबल साउथ की आवाज:* G20 की सफल अध्यक्षता के दौरान अफ्रीकी संघ को शामिल कराना और ग्लोबल साउथ के देशों के हितों की आवाज बनना यह दर्शाता है कि दुनिया आज भारत के नेतृत्व को स्वयं स्वीकार कर रही है।

*विश्व गुरु की ओर भारत के बढ़ते कदम*
​80वें स्वतंत्रता दिवस के इस ऐतिहासिक मोड़ पर, जब हम ‘अमृत काल’ के संकल्पों को पूरा कर रहे हैं, भारत का लक्ष्य केवल एक समृद्ध देश बनना नहीं है, बल्कि समस्त मानवता को शांति, बंधुत्व और सह-अस्तित्व का मार्ग दिखाना है मोदी जी का उदघोष पुर्णतः सार्थक होता दिख रहा है ।
​”वन्देमातरम्” का उदघोष आज केवल देशभक्ति का प्रतीक नहीं है, यह उस बदलते भारत का जयघोष है जो अपनी 140 करोड़ जनता की सामर्थ्य के बल पर विश्व पटल पर छा रहा है। भारत का यह स्वर्णिम काल दुनिया को दिशा देने वाला है, और यही ‘विश्व गुरु’ बनने का वास्तविक मार्ग है।

डॉ विजय दत्त
विश्लेषक

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