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अचेत अवस्था में मधेस, अचेत से सचेत अवस्थामे कैसे लाए ? : कौशल गोपालवंशी

 

कौशल गोपालवंशी । जब हम मधेस की बात करतें हैं तो , हमारे बुद्धिजीवी बड़े बड़े शब्द का प्रयोग करतें हैं। कोई पुर्ण स्वतन्त्रता , कोई समानुपातिक समावेशी , कोई स्वाधीनता और कोई स्वेतता जैसे शक्तिशाली तर्क का प्रयोग करते हैं । इन सभी तर्कों को  मुद्दा बनाके आन्दोलन करने के लिए  सन्तुलित मानसिकता (Balanced Mind And Taught ) कीजरुरी है ।
क्या हम जानतें हैं कितना प्रतिशत जनता को इसकी अधिकारक अनुभिती है । अगर हम समानुपातिक चुनाव के परिणाम के आधारपर बोले तो करिब ७०% मधेसी जनता को मधेसीऔर मधेश के बारे में जानकारी नहीं है , क्योकि मधेसी जनता अचेत अवस्था (In Coma) मे है । राजनीति चेतना के आधार मे मधेसी एक जिन्दा लास है । मधेसी जनता आन्दोलन मे जाते है लेकिन आन्दोलन से प्राप्त उपलब्धि का संरक्षण और उपयोग करना नही जानते है । हम मेहनत करके कुछ उपलब्धि हासिल करे तो , हमको उस उपलब्धि को सुरक्षित करके रख्ना चाहिए । लेकिन यहाँ मधेसी सिर्फ आन्दोलन के समय जागरुक रहता है आन्दोलन के वाद सो-जाते है , और मेहनत से प्राप्त उपलब्धि को फिरसे दलाल , व्यापारी , माफिया लोग के हात मे बेच देतें है । व्यापारी तो व्यापार करेगा ही , दलाल दलाली करेगा ही , माफीया बर्बाद करेगा ही । मधेसमे होरहे अन्याय , सामाजिक भेदभाव , व्यक्तिगत भेदभाव के बारे में हर मधेसी को पता है कि कहाँ , कैसे और कोन कररहाहै लेकिन फिरभी जनता मौन है , फिर भी जनता सो- रहेहै । जन्ता अचेत है , इन्हें कोन सचेत बनाएगा , इन्हें कोन सदाके लिए जागरुक बनाएगा ?

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अचेतन का प्रमाण
जिन पार्टी ने मधेस पर सदैव शासन किया आज भी उसी को समर्थन करतें है । इससे बडा अचेतन का प्रमाण क्या होगा ? जिस पार्टी ने शहीद के लास को  पैसा मे तौल के बेच दिया आज हम उसी पार्टीको फुलमाला लगा के मसिहा मानते है , यह अचेतन अवस्था नही तो क्या है । जिनके नेतृत्व और आदेश मे हमारे भाईबन्धु के छाती पर गोली चली, आज भी हम उनके स्वागत के लिए फुलमाला हाथ मे लिए बैठे है , यह अचेतन अवस्था नहीं तो क्या है ?

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मधेस कैसे अचेत अवस्था मे आ गए ?
जबसे महेन्द्र राजमार्ग के जरिए ऎतिहासिक हुलाकी राजमार्ग को पैदलमार्ग मे रुपान्तरण किया गया तब से ही अचेतन अवस्था की सुरुवात होने लगी । हुलाकी राजमार्ग एक पैदलमार्ग बनगए , जो ऎतिहासिक सहर थे वो गाउँ मे परिवर्तन होने लगा और जो गाउँ था वो अब जङ्गल मे परिणत हुवा है । इसी तरह जो न्यायकर्ता थे वो सव शासक बनगए , गाउँमे सामुहिक सहयोग के लिए गठित जातीय संगठन, एक शासक का रुप ले लिया, जो मधेस के लिए राजनीति कर्ते थे वो लोभी बनगाए , जिसको मधेस प्यारा था उन्हे काठमाडौ प्यारा होने लगा , और जो साधारण जनता थे उनको यहा प्रणाली ने आक्रमण करके सदैव के लिए एक जंगली जनता बना के सुला दिया है ।

अचेत से सचेत अवस्थामे कैसे लाए ?
सचेत बनाने के लिए व्यक्ति , समाजिक और राजनीति तिनो को एक साथ परिवर्तन होना पड़ेगा । यिसमे सबसे महत्त्वपूर्ण है व्यक्ति परिवर्तन । अभी के समय मे परिवर्तन के लिए मधेस में सबसे पहले शिक्षा की जरुरी है । हमें हरेक व्यक्ति के मन और मस्तिष्क में मधेसवाद को पहुंचना होगा।
डा.सिके राउत नेतृत्व के “स्वतन्त्र मधेस गठबन्धन” ने मधेसवाद के प्रचार-प्रसार के लिए Black Buddh , madhesh tutorial part 1,2,3 तथा वीर मधेसी  ,मधेस स्वराज , बैराग देखी बचाव सम्म जैसे लिखकर मधेसी को सचेत बनाने के लिए आधुनिक और बैज्ञानिक उपाई लगाइ थी , उनके कारण बहुत युवा मे मधेसबाद का ज्ञान हुआ लेकिन उन्होने प्रचारप्रसार को निरन्तरतानहीं दिया । डा राउत के तरह ही फिरसे मधेस से सम्बन्धित डकुमेन्ट्री का निर्माण करना होगा। उदाहरणके लिए , नेपाल मे कही भी कोई धर्म के बारे में बिद्यार्थी को शिक्षा नही दी जाती फिरभी सबको पता है । हमे भी इसी तरह के मधेसवाद का प्रचार-प्रसार करना होगा ताकि बिना औपचारिक शिक्षा के ही हर मधेसी के घर मधेसवाद का ज्ञान पहुंचे। यिसके लिए जिस तरह से धर्म का प्रचार-प्रसार हो रहा है हमे भी उसी तरह की  रणनीति बनानी होगी। तभी मधेश में जागरूकता बढ़ेगी |

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कौशल गोपालवंशी

 

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