Wed. Aug 19th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

अचेत अवस्था में मधेस, अचेत से सचेत अवस्थामे कैसे लाए ? : कौशल गोपालवंशी

 

कौशल गोपालवंशी । जब हम मधेस की बात करतें हैं तो , हमारे बुद्धिजीवी बड़े बड़े शब्द का प्रयोग करतें हैं। कोई पुर्ण स्वतन्त्रता , कोई समानुपातिक समावेशी , कोई स्वाधीनता और कोई स्वेतता जैसे शक्तिशाली तर्क का प्रयोग करते हैं । इन सभी तर्कों को  मुद्दा बनाके आन्दोलन करने के लिए  सन्तुलित मानसिकता (Balanced Mind And Taught ) कीजरुरी है ।
क्या हम जानतें हैं कितना प्रतिशत जनता को इसकी अधिकारक अनुभिती है । अगर हम समानुपातिक चुनाव के परिणाम के आधारपर बोले तो करिब ७०% मधेसी जनता को मधेसीऔर मधेश के बारे में जानकारी नहीं है , क्योकि मधेसी जनता अचेत अवस्था (In Coma) मे है । राजनीति चेतना के आधार मे मधेसी एक जिन्दा लास है । मधेसी जनता आन्दोलन मे जाते है लेकिन आन्दोलन से प्राप्त उपलब्धि का संरक्षण और उपयोग करना नही जानते है । हम मेहनत करके कुछ उपलब्धि हासिल करे तो , हमको उस उपलब्धि को सुरक्षित करके रख्ना चाहिए । लेकिन यहाँ मधेसी सिर्फ आन्दोलन के समय जागरुक रहता है आन्दोलन के वाद सो-जाते है , और मेहनत से प्राप्त उपलब्धि को फिरसे दलाल , व्यापारी , माफिया लोग के हात मे बेच देतें है । व्यापारी तो व्यापार करेगा ही , दलाल दलाली करेगा ही , माफीया बर्बाद करेगा ही । मधेसमे होरहे अन्याय , सामाजिक भेदभाव , व्यक्तिगत भेदभाव के बारे में हर मधेसी को पता है कि कहाँ , कैसे और कोन कररहाहै लेकिन फिरभी जनता मौन है , फिर भी जनता सो- रहेहै । जन्ता अचेत है , इन्हें कोन सचेत बनाएगा , इन्हें कोन सदाके लिए जागरुक बनाएगा ?

यह भी पढें   पत्रकार किशोर श्रेष्ठ रिहा

अचेतन का प्रमाण
जिन पार्टी ने मधेस पर सदैव शासन किया आज भी उसी को समर्थन करतें है । इससे बडा अचेतन का प्रमाण क्या होगा ? जिस पार्टी ने शहीद के लास को  पैसा मे तौल के बेच दिया आज हम उसी पार्टीको फुलमाला लगा के मसिहा मानते है , यह अचेतन अवस्था नही तो क्या है । जिनके नेतृत्व और आदेश मे हमारे भाईबन्धु के छाती पर गोली चली, आज भी हम उनके स्वागत के लिए फुलमाला हाथ मे लिए बैठे है , यह अचेतन अवस्था नहीं तो क्या है ?

यह भी पढें   हिन्दू स्वयंसेवक द्वारा गुरु दक्षिणा समर्पण कार्यक्रम संपन्न

मधेस कैसे अचेत अवस्था मे आ गए ?
जबसे महेन्द्र राजमार्ग के जरिए ऎतिहासिक हुलाकी राजमार्ग को पैदलमार्ग मे रुपान्तरण किया गया तब से ही अचेतन अवस्था की सुरुवात होने लगी । हुलाकी राजमार्ग एक पैदलमार्ग बनगए , जो ऎतिहासिक सहर थे वो गाउँ मे परिवर्तन होने लगा और जो गाउँ था वो अब जङ्गल मे परिणत हुवा है । इसी तरह जो न्यायकर्ता थे वो सव शासक बनगए , गाउँमे सामुहिक सहयोग के लिए गठित जातीय संगठन, एक शासक का रुप ले लिया, जो मधेस के लिए राजनीति कर्ते थे वो लोभी बनगाए , जिसको मधेस प्यारा था उन्हे काठमाडौ प्यारा होने लगा , और जो साधारण जनता थे उनको यहा प्रणाली ने आक्रमण करके सदैव के लिए एक जंगली जनता बना के सुला दिया है ।

अचेत से सचेत अवस्थामे कैसे लाए ?
सचेत बनाने के लिए व्यक्ति , समाजिक और राजनीति तिनो को एक साथ परिवर्तन होना पड़ेगा । यिसमे सबसे महत्त्वपूर्ण है व्यक्ति परिवर्तन । अभी के समय मे परिवर्तन के लिए मधेस में सबसे पहले शिक्षा की जरुरी है । हमें हरेक व्यक्ति के मन और मस्तिष्क में मधेसवाद को पहुंचना होगा।
डा.सिके राउत नेतृत्व के “स्वतन्त्र मधेस गठबन्धन” ने मधेसवाद के प्रचार-प्रसार के लिए Black Buddh , madhesh tutorial part 1,2,3 तथा वीर मधेसी  ,मधेस स्वराज , बैराग देखी बचाव सम्म जैसे लिखकर मधेसी को सचेत बनाने के लिए आधुनिक और बैज्ञानिक उपाई लगाइ थी , उनके कारण बहुत युवा मे मधेसबाद का ज्ञान हुआ लेकिन उन्होने प्रचारप्रसार को निरन्तरतानहीं दिया । डा राउत के तरह ही फिरसे मधेस से सम्बन्धित डकुमेन्ट्री का निर्माण करना होगा। उदाहरणके लिए , नेपाल मे कही भी कोई धर्म के बारे में बिद्यार्थी को शिक्षा नही दी जाती फिरभी सबको पता है । हमे भी इसी तरह के मधेसवाद का प्रचार-प्रसार करना होगा ताकि बिना औपचारिक शिक्षा के ही हर मधेसी के घर मधेसवाद का ज्ञान पहुंचे। यिसके लिए जिस तरह से धर्म का प्रचार-प्रसार हो रहा है हमे भी उसी तरह की  रणनीति बनानी होगी। तभी मधेश में जागरूकता बढ़ेगी |

यह भी पढें   इंडोनेशिया के फ्लोरेस द्वीप में 7.7 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप, सुनामी की चेतावनी
कौशल गोपालवंशी

 

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may missed

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com