सभापति लामिछाने ने पार्टी के सांसदों को संसद में मर्यादित ढंग से प्रस्तुत होने का निर्देश दिया
काठमांडू
सत्तारूढ़ राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (रास्वपा) के सभापति रवि लामिछाने ने मंत्रियों और पार्टी के सांसदों को संसद में मर्यादित ढंग से प्रस्तुत होने का निर्देश दिया है। पार्टी संसदीय दल के कार्यालय, सिंहदरबार में बुधवार को हुई संसदीय दल की बैठक में सभापति लामिछाने ने मंत्रियों और सांसदों से संसद में संसदीय मर्यादा बनाए रखने को कहा।
सभापति लामिछाने ने मंत्रियों और सांसदों को सरकार के कामकाज को किस तरह आगे बढ़ाया जाए और संसद में किस तरह प्रस्तुत हुआ जाए, इस संबंध में सुझाव और निर्देश दिए। उन्होंने कहा, “अमर्यादित गतिविधियां करके तमाशा न दिखाएं। सांसद और मंत्री दोनों को अपने व्यवहार और गतिविधियों में संसदीय मर्यादा बनाए रखनी चाहिए।”
लामिछाने ने कहा कि जनता सांसदों से सवाल कर रही है और सांसद मंत्रियों से सवाल कर रहे हैं, यह वास्तविकता उनके संज्ञान में है। उन्होंने योग्यता-क्रम और समावेशिता को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ने की बात भी कही। उन्होंने कहा, “अहंकार छोड़कर आपसी समन्वय और संवाद के साथ काम करना चाहिए। सांसदों और मंत्रियों के बीच सहयोग और समन्वय होगा, तभी सरकार प्रभावी होगी। एक-दूसरे से स्पष्ट रूप से संवाद करें।”
प्रतिनिधिसभा की बैठक में बोलने से संबंधित विषयों की जानकारी मुख्य सचेतक कबिन्द्र बुर्लाकोटी तथा सचेतक प्रकाशचन्द्र परियार और क्रान्तिशिखा धिताल को देने का निर्देश भी सभापति लामिछाने ने दिया। सांसदों और मंत्रियों को अपनी गतिविधियां पारदर्शी बनाने की बात कहते हुए उन्होंने कहा, “संसद में बोलने के विषय, भ्रमण, मुलाकात आदि गतिविधियों के बारे में पार्टी को जानकारी देनी चाहिए।”
सभापति लामिछाने ने कहा कि जो नेता केवल इसी संसदीय कार्यकाल तक राजनीति करने के लिए आए हैं, उन्हें सम्मानपूर्वक विदाई दी जाएगी। सांसदों से मर्यादित ढंग से प्रस्तुत होने का आग्रह करते हुए उन्होंने कहा, “अगर केवल पांच साल राजनीति करनी है तो फूलमाला पहनाकर विदा कर दूंगा। अगर बिना किसी निवेश के रास्ते में ही पद मिल गया है, ऐसा लगता है तो फिर कुछ नहीं कहा जा सकता।”
लामिछाने ने कहा कि अतीत में रास्वपा की आलोचना और उससे नफरत करने वाले लोग आज खुद से भी बड़ी रास्वपा बन गए हैं। उन्होंने कहा, “रास्वपा से नफरत करने वाले आज रवि लामिछाने से भी बड़ी घंटी उठाने लगे हैं।”
लामिछाने के अनुसार, सरकार शक्तिशाली होने के बावजूद विपक्षी दल भी एकजुट होकर संसद में अपनी भूमिका निभा रहे हैं। इसलिए सांसदों, पार्टी और सरकार के बीच समन्वय को और मजबूत करने की आवश्यकता है।
उन्होंने मंत्रियों और सांसदों से प्रचार पर ध्यान देने के बजाय काम पर ध्यान केंद्रित करने को कहा। लामिछाने ने मंत्रियों को लेकर सांसदों की शिकायतें भी सुनीं। सांसदों ने मंत्रियों की कार्यशैली को लेकर आलोचना की। जवाब में सभापति लामिछाने ने आश्वासन दिया कि आने वाले दिनों में मंत्रियों की कार्यशैली में बदलाव किया जाएगा और सांसदों द्वारा उठाए गए मुद्दों का समाधान किया जाएगा।
उन्होंने कहा, “अब मंत्रियों की कार्यशैली बदलेगी, लेकिन मंत्री नहीं बदले जाएंगे। सभी समस्याओं का सामूहिक रूप से सामना करना होगा।” उन्होंने मंत्रियों को प्रभावी ढंग से काम करने का निर्देश देते हुए कहा, “जरूरत पड़ने पर पार्टी निर्णय करेगी, लेकिन अभी मंत्री नहीं बदले जाएंगे। निश्चिंत होकर काम करें।”
सभापति लामिछाने ने सांसदों से सरकार और मंत्रियों के कामकाज को लेकर संसद में सवाल करने को भी कहा। उन्होंने कहा कि सांसदों को सरकार के काम की समीक्षात्मक टिप्पणी करनी चाहिए, लेकिन संसदीय मर्यादा का पालन भी करना चाहिए। यदि मंत्रियों द्वारा किए जाने वाले काम पूरे नहीं होते हैं तो सांसदों से सीधे उनके पास आने को भी उन्होंने कहा।
लामिछाने ने जानकारी दी कि संसदीय दल की अगली बैठक दल के नेता तथा प्रधानमंत्री वालेन्द्र शाह की उपस्थिति में होगी। उन्होंने सांसदों को बताया कि प्रधानमंत्री शाह से संसदीय दल की बैठक को लेकर उनकी बातचीत हो चुकी है।
सभापति लामिछाने ने सांसदों से विपक्षी दलों के सांसदों द्वारा उठाए गए विषयों का प्रतिवाद नहीं करने को भी कहा। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों के सांसद अपनी भूमिका निभा रहे हैं। इसलिए आने वाले दिनों में उनकी पार्टी के सांसदों को संसद में किसी सांसद द्वारा अभिव्यक्ति दिए जाने मात्र के कारण प्रतिवाद करने के लिए नहीं उतरना चाहिए।
रास्वपा के संसदीय दल की बैठक ने संसदीय दल के विधान में समयानुकूल संशोधन के लिए एक कार्यदल भी गठित किया है। मुख्य सचेतक कबिन्द्र बुर्लाकोटी की संयोजकता में गठित कार्यदल में सचेतक प्रकाशचन्द्र परियार और क्रान्तिशिखा धिताल तथा सांसद गणेश कार्की सदस्य हैं।

