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साजिशों के कारण संसद भंग करने का फैसला : प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली

 

प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने सोमवार को कहा कि वह अपने खिलाफ रची जा रही साजिशों के कारण संसद भंग करने की सिफारिश करने के लिए मजबूर हुए। ओली ने कहा कि उनकी सरकार के खिलाफ संसद में अविश्वास प्रस्ताव लाने की भनक लगने पर उन्होंने यह कदम उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार गिराने के अलावा राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी के खिलाफ भी महाभियोग लाने की तैयारी चल रही थी।

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ओली ने कहा, ”मैं अपने वादे नहीं पूरा कर पाने के कारण जनता से माफी मांगना चाहूंगा, हमें अब नए चुनाव का सामना करना होगा।  एक बैठक में मौजूद सांसदों के समक्ष ओली ने कहा कि मैं संसद भंग करने की सिफारिश करने का निर्णय लेने के लिए बाध्य हो गया था। मुझे पार्टी के अंदर हाशिए पर पहुंचा दिया गया था, राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय शक्तियों के साथ साठगांठ करके मेरे खिलाफ साजिशें रची गई थीं। ओली की चौंकाने वाली सिफारिश पर राष्ट्रपति ने रविवार को संसद भंग करते हुए मध्यावधि चुनाव की तिथियों का भी ऐलान कर दिया था।”

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अनुशासनात्मक कार्रवाई के फैसले को खारिज किया
ओली ने खुद के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के अपनी पार्टी के फैसले को खारिज कर दिया है। भंग प्रतिनिधि सभा के सांसद कृष्णा राय के अनुसार ओली ने कहा- मैं पार्टी का प्रथम अध्यक्ष हूं, इसलिए द्वितीय अध्यक्ष द्वारा बुलाई गई बैठक वैध नहीं होगी। इसलिए दूसरी पंक्ति के नेताओं द्वारा कोई भी फैसला लेना पार्टी संविधान के विपरीत है। पार्टी की स्थायी समिति ने ओली के कदम को अलोकतांत्रिक, असंवैधानिक और उनकी व्यक्तिगत राय करार दिया था। समिति ने प्रधानमंत्री के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की है।

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