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कोरोना के नए वायरस के लिए छ सप्ताह में वैक्सिन तैयार हो सकता है

 

ब्रिटेन में कोरोना के नए स्ट्रेन के मिलने से हड़कंप मचा हुआ है तो जर्मनी की दवा कंपनी बायोएनटेक (BioNTech) ने आज मंगलवार को कहा कि हाल ही में इंग्लैंड में मिला कोरोना वायरस का नया म्युटेशन संक्रामक हो सकता है और इसके खिलाफ वैक्सीन छह हफ्ते में बनायी जा सकती है. इस दौरान बायोएनटेक ने दावा किया कि कोरोना से बचाव के लिए उसका टीका नए स्ट्रेन के खिलाफ भी असरदार है, हालांकि पूरी तरह सुनिश्चित होने के लिए आगे और स्टडी की जरूरत होगी.

बायोएनटेक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) उगुर साहीन ने कहा, ‘वायरस के नए स्वरूप से लड़ने के लिहाज से वैक्सीन को तैयार कर लिया जाएगा और इसमें छह हफ्ते लग सकते हैं.’ उन्होंने आगे कहा कि वैज्ञानिक रूप से, इसकी अत्यधिक संभावना है कि यह वैक्सीन वायरस के नए स्वरूप के खिलाफ भी प्रतिरक्षा तैयार करने का काम करेगी.लंदन और दक्षिणी इंग्लैंड में पिछले दिनों कोरोना वायरस के नए स्ट्रेन का पता लगा जिससे दुनिया में महामारी को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं. हालांकि ऐसे संकेत नहीं मिले हैं कि यह नया स्ट्रेन ज्यादा घातक है. ब्रिटेन के सरकारी अधिकारियों को संदेह है कि नया वेरिएंट वायरस के पहले के वेरिएंट्स की तुलना में अधिक संक्रामक हो सकता है. लेकिन वैज्ञानिक इसके सटीक स्पष्टीकरण को समझने की कोशिश कर रहे हैं, उनमें से कुछ सरकार के तर्क से सहमत हैं. फिलहाल यूरोप और भारत समेत कई देशों ने इंग्लैंड से यात्रा पर रोक लगा दी है.

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उगुर साहीन ने कहा कि इंग्लैंड में वायरस के नए स्ट्रेन पर प्रोटीन अंश 99 फीसदी तक मौजूदा ‘स्ट्रेन’ के समान ही है इसलिए वैज्ञानिक आधार पर बायोएनटेक को उम्मीद है कि उसकी वैक्सीन नए स्ट्रेन पर भी प्रभावी रहेगी. उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक इस पर टेस्टिंग कर रहे हैं और अगले दो हफ्ते में आंकड़े मिल जाएंगे.

साहीन ने कहा, ‘उम्मीद है कि हमारा वैक्सीन काम करेगी. वायरस के नए स्वरूप से लड़ने के हिसाब से वैक्सीन को तैयार कर लिया जाएगा और इसमें 6 हफ्ते का वक्त लग सकता है. हालांकि, इसके इस्तेमाल के पहले नियामक की मंजूरी लेनी होगी. बता दें कि जर्मन कंपनी बायोएनटेक ने अमेरिका की अग्रणी दवा कंपनी फाइजर के साथ मिलकर कोरोना वायरस से रोकथाम का वैक्सीन तैयार की है.

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इस बीच सीएसआईआर के महानिदेशक डॉक्टर शेखर मांडे ने कहा है कि वैक्सीन को वायरस से किसी भी उत्परिवर्तन (म्युटेशन) से लड़ने के लिए माना जाता है क्योंकि ये बहुत मामूली उत्परिवर्तन होते हैं. वैक्सीन या शरीर में पैदा होने वाले एंटीबॉडी पूरे वायरस के खिलाफ होते हैं. इसलिए वैक्सीन उत्परिवर्तित वायरस के खिलाफ प्रभावी होगी.

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