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लुम्बिनी के आसपास चीनी गतिवधियां तेज

 

स्थानीयवासी आशंकित
भैरहवा। लुम्बिनी एवं उसके आसपास के क्षेत्रों में पिछले कुछ सप्ताह से चीनियों की बढÞती हर्ुइ गतिविधियों से स्थानीय ग्रामीणों में सनसनी एवं शंका व्याप्त है। वे लोग इस बात की चर्चा करते देखे जा रहे हैं कि क्या सचमुच लुम्बिनी एवं इसके आसपास के क्षेत्र का माओवादी अध्यक्ष प्रचण्ड की योजना के तहत ‘चीनीकरण’ किया जाना शुरू हो गया है –
चश्मदीदों के अनुसार लगभग डेढÞ दर्जन चीनियों का एक समूह बाजे-गाजे और झंडे-पताखों के साथ पिछले एक सप्ताह से भारतीय सीमा से निकट के नेपाली गांवों का जुलूस के रूप में चक्कर लगा रहे हैं। वे लोग टूटी-फूटी नेपाली बोलते हैं, रोज किसी एक गांव में जाते हैं, तरह-तरह के बाजे बजाकर बच्चों को इकÝा करते हैं, उनके साथ नाचगान करते हैं और उन्हें टाँफी-चाँकलेट, कोक आदि बांटकर, लुम्बिनी परिसर स्थित चाइना मन्दिर में लौट जाते हैं।
पता चला है कि एक रोज जब वे लोग लुम्बिनी से लगभग तीन किलोमीटर दक्षिण स्थित भगवानपुर गांव विकास समिति क्षेत्र के भगवानपुर गांव में टाँफी चाँकलेट बांट रहे थे और बच्चों से ‘येशू-येशू’ का नारा लगवा रहे थे, तो उसी समय वहां से गुजरते एक स्थानीय जागरूक व्यक्ति ने नेपाली में पूछा – ”के चीनमा इर्साई धर्म मान्ने मानिसहरू छन् – तपाईहरू येशू-येशूको जाप बच्चाहरूबाट गराउँदै हुनुहुन्छ, किन -”  उत्तर मिला- ‘छन्। चीनमा पनि इर्साई धर्म मान्ने मानिसहरू छन्।’ अर्थात्, क्या चीन में इर्साई धर्म माननेवाले लोग हैं कि आपलोग बच्चों से येशू का जाप करवा रहे हैं – उत्तर मिला- हैं –
उक्त चीनी समूह से पूछताछ करनेवाले सज्जन ने अपने मोबाईल फोन से उनलोगों का फोटो भी लिया। चीनियों का उक्त समूह अभी तक भगवानपुर गाविस के नन्द नगर और खुनगाई गांव सहित लगभग आधे दर्जन गांवों का दौरा कर चुका है। स्थानीय निवासी यह नहीं समझ पा रहे हैं कि एक ओर कुछ चीनी मूल के बौद्ध मिक्षु तो पहले से ही लुम्बिनी परिसर स्थित चाइनीज मंदिर में रह रहे थे, तो फिर येशू के प्रचारक के रूप में चाइनीज मंदिर में चीनियों के इस जमावडÞे को आखिर क्या समझा जाए – लेकिन, इतना तो साफ है कि यह पहला अवसर है- जब चीनी नागरिकों ने भारतीय सीमा से इतना अधिक निकट आकर, नेपाली भाषा सीखकर, अब नेपाल के पिछडÞी बस्तियों को भी अपना कार्यक्षेत्र बनाना शुरू कर दिया है।

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