वीरगंज रिपोर्ट
जितेन्द्र साह:रायणी उपक्षेत्रीय अस्पताल वीरंगज में गैरकानूनी ढंग से चिकित्सक और कर्मचारी की नियुक्ती हो रही है। दैनिक मजदूरी में काम करनेवाले वहाँ लगभग दो दर्जन कार्यरत हैं। मेडिकल सुपरिटेन्डेड और अस्तापल विकास समिति के अध्यक्ष ने गैरकानूनी ढंग से अस्पताल को अपना भर्ती केन्द्र बनाया है, जिस के विरोध में अस्पताल विकास समिति के कर्मचारी आन्दोलित हैं। आन्दोलित कर्मचारियों का आरोप है कि अस्पताल के संस्थागत और समूहगत विकास के बदले व्यक्तिगत लाभ के लिए यह सब नियुक्तियाँ हर्ुइ हैं। मासिक ६ लाख १६ हजार के घाटे में चल रहा अस्पताल में क्यों २९ कर्मचारी को नियुक्ति किया गया – कर्मचारी को बेतन देने के लिए मातृ सुरक्षा कोष से २५ लाख ४८ हजार रुपये का रकमान्तर किया गया है।
स्वास्थ्य तथा जनसंख्या मन्त्रालय ने भी गत पुस २९ गते उपक्षेत्रीय अस्पताल को दरबन्दी से ज्यादा कर्मचारी नियुक्त न करने के लिए पत्र दिया था। विकास समिति अर्न्तर्गत १२७ स्वीकृत दरबन्दी में अभी २२६ कर्मचारी कार्यरत हैं। समिति की ओर से कर्मचारी भर्ना करते समय भी मन्त्रालय की स्वीकृति लेनी चाहिए, पत्र में ऐसी तागित की गई है। लेकिन २९ कर्मचारी भर्ना करते समय मेडिकल सुपरिटेन्डेट ने मन्त्रालय की स्वीकृति नहीं ली है, इसे स्वयं उन्होंने स्वीकारा है। कर्मचारी यूनियन ने अपारदर्शी और अनियन्त्रित नियुक्ति को बदर करने के लिए प्रशासन में निवेदन दिया है। कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष डा. मनोज गुप्ता का कहना है- मे.सु. डा. अखिलेश सिंह ने अभी तक सिर्फएक बार अस्पताल का निरीक्षण किया है, अस्पताल की मुख्य समस्याओं की ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया है।
अपारदर्शी तरिके से कर्मचारी भर्ना करते समय हाजिरी पुस्तिका को पाँच दिन तक मे.सु. ने अपने नियन्त्रण में रखा था। ‘हम लोगों को पाँच दिन तक हाजिरी भी करने नहीं दिया गया’, कम्प्युटर प्राविधिक अख्तर हुसैन ने ऐसा बताया। मे.सु. ने दर्ता/चलानी रातोरात तैयार कर हाजिरी रजिष्टर में नये कर्मचारी का नाम रखा गया है। राष्ट्रिय स्वास्थ्यकर्मी के अध्यक्ष सुदीप लामा का कहना है- खरदार नियुक्ति के लिए मे.सु. ने १ लाख ४० हजार रुपये की मांग की थी, उसका प्रमाण भी प्राप्त हुआ है। स्मरणीय है- मध्यमधेश अर्न्तर्गत बारा, पर्सर्ाारौतहट, र्सलाही लगायत सीमावर्ती भारत के बिहार राज्य से भी रोगी उपचार के लिए यहाँ आते हैं। इस अस्पताल में रोगियों के लिए ३०० शय्या का प्रबन्ध है।

