प्रतिगमन को पररास्त करने के लिए परिवर्तनकारी शक्ति को फिर इकठ्ठा होना होगाः प्रचण्ड
काठमांडू, २२ जनवरी । नेकपा (प्रचण्ड–माधव) समूह के अध्यक्ष पुष्पकमल दाहाल प्रचण्ड ने कहा है कि प्रतिगमन को पररास्त करने के लिए एक बार फिर परिवर्तनकारी शक्ति को इकठ्ठा होना जरुरी है । उनका मानना है कि संसद् बिघटन प्रतिगमनकारी कदम है ।
संसद् बिघटन विरुद्ध शुक्रबार काठमांडू में आयोजित शक्ति प्रदर्शन में अध्यक्ष प्रचण्ड ने कहा– ‘संविधान, संघीय लोकतान्त्रिक गणतन्त्र के पक्षधर शक्ति को एक बार फिर एकजूट होना चाहिए, परिवर्तनकारी शक्ति मिलकर ही प्रतिगमन को पररास्त किया जा सकता है ।’ उनका यह भी मानना है कि प्रधानमन्त्री ओली ले सिर्फ संसद् को बिघटन नहीं किया, संविधान और शान्ति प्रक्रिया को भी बिघटन करने का प्रयास किया है ।
प्रचण्ड ने यह भी कहा है कि प्रधानमन्त्री ओली की मानसिकता निरंकुश और स्वेच्छाचारी है, जो देश को ही बर्बादी की ओर ले जा रही है । उन्होंने आगे कहा– ‘ओली में राजा–महाराजा की प्रवृत्ति है, लेकिन उनको यह भी पता है कि बड़े–बड़े तानाशाह और राजाओं को जनता ने परास्त किया है । हम लोग भी ओली प्रवृत्ति को परास्त करेंगे ।’
इसीतरह कार्यक्रम के दूसरे वक्त एवं पूर्व प्रधानमन्त्री माधव कुमार नेपाल ने भी कहा कि आज पूरा देश ओली के विरुद्ध में है । उन्होंने आगे कहा– ‘हम लोग मूल्य–मान्यता की राजनीति करते हैं, विचार और सिद्धान्त की राजनीति करते हैं । ओली की तरह साइबर सेना की बात हम लोग नहीं करते ।’ नेता नेपाल ने यह भी दावा किया कि ५० साल तक ओली ने उनको दुःख दिया है, उनका यही चरित्र है ।
कार्यक्रम के तीसरे वक्त एवं पूर्व प्रधानमन्त्री झलनाथ खनाल ने भी कहा कि असली नेकपा आज सडक में आया है । उन्होंने प्रधानमन्त्री ओली से आग्रह किया कि असली कम्युनिष्ट को देखने के लिए वह भी सडक पर आए ।

