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६५ जिला में मलेरिया (औंलो) रोग जोखिम में

 

mनेपालगन्ज,पवन जायसवाल ।
नेपाल अधिराज्य के  ६५ जिला में मलेरिया (औंलो) रोग जोखिम में रहा है । रोग नियन्त्रण के लियें सरकार ने विशेष कार्यक्रम सञ्चालन कर रहा है ।
मलेरिया (औलो) रोग ने मनुष्य को जल्द ही प्रभावित करना और जान भी खोने वाला होने के नाते  नियन्त्रण के लियें  सरोकारवाला निकायों के बीच समन्वय करके एकीकृत नियन्त्रण अभियान कार्यक्रम सञ्चालन करने के लियें भी  सरोकारवाला तैयारी कर रहा हैं ।
तथ्याङ्क के अनुसार, मलेरियम (औलों) प्रभावित जिला में रहा इलाम, झापा, मोरङ, धनुषा, महोत्तरी, सिन्धुली, बाँके, बर्दिया, चितवन, सर्लाही, नवलपरासी, कैलाली और कञ्चनपुर करके १३ जिला उच्च जोखिम में हैं ।
इसी तरह  सोलुखुम्बु, भक्तपुर, ललितपुर, मनाङ, मुस्ताङ, डोल्पा, हुम्ला, कालीकोट, मुगु और सिन्धुपाल्चोक मलेरियम (औलों) मुक्त जिला में  हैं ।
सरकार ने अन्य जिला में जैसे  बाँके जिला में भी मलेरिया (औलाें) रोग नियन्त्रण करने के लियें सभी स्वास्थ्य केन्द्र तथा स्वास्थ्य चौकीयों में मलेरिया (औलों) रोगका जाँच और उपचार करने का व्यवस्था मिलाया है और नियन्त्रण करने के लियें मच्छर (लामखुट्टे) मार्ने के लियें किटनाशक औषधि छिरकाउ  और चेतनामूलक कार्यक्रम सञ्चालन करते आया है बाँके जिला जनस्वास्थ्य कार्यालय के किट जन्यरोग निरीक्षक आन्देश्वर प्रसाद चौधरी ने बताया ।
सन् २००६ में बाँके जिला के फत्तेपुर,  होलिया और गंगापुर गाबिस में महामारी के रुप में पैmला हुआ मलेरिया ((औलो) रोग से ३३ लोगों का मौत होने के बाद में इस जिला में मलेरिया (औलाें) रोग नियन्त्रण का विशेष अभियान ही सञ्चालन करते आरहा है । इस के बाद इस रोग से किसी का भी मौत नही हुआ है ।
इस बाँके जिला का मलेरिया (औलों) रोग से प्रभावित २० गाविस समेत के जोखिम में रहे है जैसे फत्तेपुर, लक्षमणपुर, काँलाफाँटा, कोहलपुर और रझेना गाविस में समेत रोग नियन्त्रण करने के लियें  विशेष अभियान सञ्चालन किया जा रहा है ।
सन् २००६ में जिला  फत्तेपुर, गंगापुर और होलिया में महामारी को  एकदम कडा रुप में कडा मलेरिया सङ्क्रमण फैलने से ३३ लोगों का मौत होने के बाद जिला जनस्वास्थ्य कार्यालय बाँके के अगुवाओं में मलेरिया रोग को  नियन्त्रण और उस से  नागरिका के  सुरक्षाप्रति विशेष कार्यक्रम सञ्चालन हो रहा है । लेकिन विगत पाँच वर्ष के अन्तरालों में मलेरिया रोग उच्च जोखिम में रहे  गाविस के नागरिकों को  सुपानेट वितरण नकरने से विगत वर्षो में इस बाँके जिला में मलेरिया के बिमारियों की संख्या में बृद्धि हुआ है ।
विगत वर्षो में मात्र  जिला में  कडा मलेरिया अर्थात् ‘प्लाजमोडियम फाल्सीफार्म’ और ‘प्लाजमोडियम भाइबेक्स” के १५ बिमारियों से भेट करने से महामारी का सम्भावना नही हो सकता है  स्वास्थ्यकर्मी लोगों ने बताया ।
कडा मलेरिया सङ्क्रमण होने के नाते बिमारियों में अचानक बोखार आना, शरीर कापना और उल्टी होने जैसा लक्षणों देखाई हो सकता है चिकित्सक लोगों ने बताया ।
सरकार ने इस वर्ष मलेरिया रोग को नियन्त्रण करने के लियें “भविष्य में लगानी करें, मलेरिया को खतम करें” नारा को आगे बढाया ।
उसी नारा के अनुसार जिला जनस्वास्थ्य कार्यालय, बाँके ने बैशाख १२ गते  बिहीबार सर्वपक्षीय अन्तक्र्रिया कार्यक्रम आयोजन करके मलेरिया रोग नियन्त्रण करने के लियें साझा प्रयास होना चाहिए कहकर प्रस्ताव को आगे बढाया है ।
कार्यक्रम में नेपाल पत्रकार महासंघ बाँके शाखा के अध्यक्ष शुक्रऋषि चौलागाई, पूर्व सभापति निरज गौतम, जिला जन स्वास्थ्य कार्यालय बाँके के वरिष्ठ जन स्वास्थ्य प्रशासक जीवन कुमार मल्ल ने अपना अपना विचार व्यक्त किया, जन स्वास्थ्य अधिकृत सरोज कुमार शाह, जन स्वास्थ्य निरीक्षक अगंत बहादुर शाही, राम बहादुर चन्द, किट जन्य रोग निरीक्षक आन्देश्वर प्रसाद चौधरी, किट जन्य रोग सहायक रत्न लाल शर्मा, दुर्गा गौतम आदि लोगों का सहभागिता रही ।

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