तु मेरा रक्त ताे नहीं : अंशु झा
तु मेरा रक्त ताे नहीं
तु मेरा रक्त ताे नहीं
पर संचरित हाेते हाे
धमनियाें के माध्यम से,
और पहुँच जाते हाे हृदय में,
उन रिक्तता काे भरने,
जाे रीता था ।
फिर भर देते हाे,
स्नेह, प्रेम और सद्भाव से,
उन रिक्त स्थानाें काे,
जिससे मन पवित्र और
राेम-राेम पुलकायमान
हाे जाता है ।
अनुभूति हाेती है प्रसन्नता की,
उच्च मनाेबल,
छू लेना चाहता है
क्षितिज के चाँद-तारे काे,
साक्षात्कार कर लेना चाहता है,
उन अदृश्य शक्ति से
जाे बार-बार स्नेह की
ज्याेति प्रदान कर,
प्रेमिल संसार दिखाने
का प्रयास कर रहा है ।
हार्दिक आभार उन
प्रेममय प्रवाह का
जाे मन-मस्तिष्क काे
स्वच्छ, शांत और
प्रफुल्लित कर रहा है ।
तु मेरा रक्त ताे नहीं पर
सम्बन्ध है अलाैकिक प्रेम का
जाे अनन्त काल तक
यथावत रहेगा ।।

बल्खु, काठमांडू नेपाल |


