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कमला में चीन के षड्यंत्र की कहानी, सीमा पर मडराता खतरा : ललित झा (पार्ट- २)

 

ललित झा, कमला | कमला नदी में चीन द्वारा किये गये षड्यंत्र की कहानी अब परत दर परत खुलने लगी है। किस तरह से चीन नेपाल के लोगों, नेताओ एबम व्युरोक्रेट को विकास के मायाजाल में उलझा कर, एक तीर से कई निशाना साध कर अपना उल्लु सीधा करना चाहता है उसका जीवंत उदाहरण है कमला के साथ षड्यंत्र की यह कहानी।

चीन की निर्माण कंपनी जहाँ एक तरफ आम लोगों को “विकास के मायाजाल” मे उलझाता है वहीं अपने स्वार्थ सिद्धि मे काम आनेवाले नेताओं और व्यूरोक्रेट को रिश्वत अथवा विभिन्न प्रकार का प्रलोभन देकर, नेपाल के कानून की धज्जियाँ ऊड़ाते हुये अबैध स्वीकृति प्राप्त करता है। इसके साथ ही विकास के नाम पर नेपाल की धरती का उपयोग, मित्र राष्ट्र भारत के विरुद्ध भी करता है। प्रायः यह सर्वविदित है कि वर्तमान अंतराष्ट्रिय भू राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में भारत नेपाल अंतराष्ट्रीय सीमा और संबंध दोनो बहुत ही संवेदनशील हो गया है खासकर भारत चीन संबंधों में आई तनाव के परिप्रेक्ष्य में। ऐसे में यह बिल्कुल ही समझ से परे नही है कि चीन की गहरी दिलचस्पी कमला  और भारत नेपाल सीमावर्ती क्षेत्रों में क्यों जागृत हुई है ? चिनियाँ निर्माण कम्पनी चीन रेलवे न २ इंजीनियरीग् ग्रुप कम्पनी लिमिटेड द्वारा कमला में भंडारण एबम अन्य प्रयोजन हेतु प्राप्त लाइसेंस के पीछे की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है।

चीन की नीति और रणनीति-

यह कार्य सोची समझी रणनीति के तहत किया गया है। कमला में चीन की दिलचस्पी की शुरुआत डेढ़ दो वर्षो पहले इसी दिसंबर महीने में हुई थी, जब चीन के L.N.E.U विश्वविद्यालय से जुड़े नदियों का अध्यन करनेवाले वैज्ञानिकों की एक टीम कमला नदी जलाधार क्षेत्रों का अध्यन अवलोकन करने पहुंची थी। चीन की गतिविधियों पर नजर रखनेवाले विशेषज्ञों के अनुसार चीन के वैज्ञानिक डॉ. बांग तथा डॉ. फेंग की टीम द्वारा इस क्षेत्र का अध्यन अवलोकन किया गया था और इसी रिपोर्ट के आधार पर कमला का भरपूर दोहन करने की रणनीति बनाई गई है | इसमे हैरान करनेवाली बात ये है कि जब चीन द्वारा कमला नदी में भंडारण हेतु प्रदेश २ के उद्योग वन तथा पर्यटन मंत्रालय द्वारा अनुमति प्राप्त किया गया तो इससे भी नीतिगत भ्रष्टाचार का सहारा लिया गया था। तत्कालीन मंत्री राम नरेश राय द्वारा अनुमति देने से पूर्व किसी तरह का कोई भी अध्यन एबम विचार बिमर्ष नही किया गया जबकि ऐसा करना जरूरी होता है। किसी भी नदी अथवा वन का दोहन की स्वीकृति देने से पूर्व इसके प्रभाव का मुल्यकन आवश्यक होता है पर ऐसा नहीं किया गया ? कमला बचाओ अभियान के संयोजक बिक्रम यादव का कहना है कि जिस तरह से नेपाल के कानून की धज्जियाँ ऊड़ाते हुये, कमला नदी का दोहन करने की स्वीकृति प्रदान की गई है  वह काफी आपत्ति जनक है और ऐसा ठेकेदार को नाजायज फायदा पहुंचाने के उदेश्य से किया गया है। चिनियाँ कंपनी के ठेकेदार द्वारा स्थानीय लोगों को सड़क स्कूल निर्माण के नाम पर विकास का झूठा मायाजाल में उलझाया गया है वह आम आदमी के साथ विश्वासघात है।

सच निकला हिमालिनी का आशंका–

हिमालिनी द्वारा व्यक्त यह आशंका सच सावित हुआ है जिसमे यह कहा गया था कि चीन की कंपनी का असल उद्देश्य कमला में सिर्फ भंडारण नही, उसका बेतहासा दोहन है ताकि कमला को खत्म किया जा सके। पिछले सप्ताह प्रदेश २ सरकार के वन उद्योग तथा पर्यटन मंत्रालय के सचिव के पास चीन की कंपनी में काम करने वाले एक इंजीनियर और एक चीनी कर्मचारी पहुंचे थे और उनसे कमला में क्रसर प्लांट लगाने की अनुमति देने का अनुरोध कर रहे थे। चिनियाँ कंपनी की इस करतूत से हमारी आशंका सच सावित हुई है कि चीन का असली मकसद विकास नही विनाश है।

कमला में चीन की उपस्थिति भारत के लिए सुरक्षा चुनौती—

चीन को आबंटित जगह भू राजनीतिक और सामरिक दृष्टिकोण से भी काफी संवेदनशील मुद्दा है। भौगोलिक रूप से नंद बाबा सामुदायिक वन क्षेत्र का इलाका चारों तरफ से पहाड़ों से घिरा हुआ है और यह नेपाल के चार महत्वपूर्ण सीमावर्ती जिला धनुषा, सिरहा उदयपूर और सिंधुली का जंकसन् है। भारतीय सुरक्षा एजेंसीयों को ऐसी आशंका है कि भौगोलिक रूप से महत्वपूर्ण इस जगह का चीन दुरूपयोग भी कर सकता हैं। इस संवेदनशील क्षेत्र में  चीन यदि  अपने beidou नविगेशन सिस्टम का ग्राउंड स्टेसन् लगा दे तो भारत के लिए बड़ी सुरक्षा चुनौतियाँ उत्पन्न हो सकती हैं।
https://youtu.be/848lKS-VBQU
उद्योग वन तथा पर्यटन मंत्रालय के निर्णय पर सवाल उठ रहा है और सवाल उठना लाजमी भी है क्योकि पूरब पशिचम राजमार्ग के नजदीक में भंडारण के लिए दर्जनों स्थानों पर पर्याप्त खाली भूमि उपलब्ध रहने के बाबजूद,, कमला नदी में भंडारण केंद्र क्यों बनाया जा रहा है?

स्थानीय लोगों द्वारा चीन की कंपनी का विरोध—

इधर स्थानीय लोगों द्वारा कमला में गलत उदेश्य से किये जा रहे कार्यो का विरोध शुरू हो गया है। कमला संरक्षण पर कार्य करने वाली संस्था कमला बचाओ अभियान के संयोजक बिक्रम यादव ने हिमालिनी को बताया है कि हम लोग उच्च न्यायालय से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक जाने के लिए तैयार है और किसी भी कीमत पर कमला से नदी जन्य पदार्थों का उतखनन एबम दोहन नही होने देंगे। कमला नदी मिथिला की  सांस्कृतिक, धार्मिक अस्मिता से जुड़ा हुआ है इसे बचाने के लिए जो भी होगा हम सब करेंगे।
कमला नदी में चिनियाँ कंपनी की साजिशों एबम उसका स्थानीय लोगों और संगठनो द्वारा हो रहे तीब्र विरोध के बीच अब महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या कमला में चीन की साजिश विफल होती है या सफल ? अब देखना यह है कि प्रदेश २ की सरकार द्वारा चीन की निर्माण कंपनी को दिया गया लाइसेंस रद्द होता है या नही ?
ललित झा, वरिष्ठ पत्रकार एवं सिमा विशेषज्ञ।

 

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