खाओ आम करो आराम’ व्यग्ंय लेख: बिम्मी कालिन्दी शर्मा,
बिम्मी कालिन्दी शर्मा, वीरगंज । आम का मौसम आ गया मतलब यह ‘आम’ नहीं खास मौसम है । ईसी लिए तो आम की डांलिया फलों से लद कर सब का मनुहार कर रही है कि ‘आओ और मुझे तोड कर जी भर कर चूस लो’ ! आम ‘आम’ है कोई केला नहीं है जो आपको बार्हों महिने मिलेगा । आम तो बजार में आता है और आ कर छा जाता है । आम के मौसम में आम के अलावा कुछ नहीं दिखता बस चारों तरफ आम । आम भी मनसुन की तरह ही है आता है और कुछ समय बाद चला जाता है । आम के जाने के बाद बाजार भी एकदम सुना लगता है । जैसे कोई अपना रुठ कर दूर चला गया हो । हां आम अपना ही तो है । हम सबका राज दुलारा आम जिसको खाए बिना गर्मी में चैन नहीं मिलता ।
आम अर्थात अमृत यानी कि फलों का राजा । जिसे नापसंद शायद ही कोई करता हो । गर्मी में सिर्फ पसिनें से ही नहीं लोग आम्ररस से भी भीग जाते हैं । सभी को सभी फल पसंद नहीं आते पर आम एक पैसा फल है जिसे सभी चाव से खाते हैं । धनी और संपन्न लोग बढिया क्वालिटी के आम खाते हैं तो गरीब बेशक सस्ता ही सही पर आम खाते जरुर है । ईस मायनें में आम साम्यवादी हैं जिस में कोई वर्ग विभेद नहीं है ।
बजार आमों से भरा पडा है । विभिन्न प्रकार के नाम और शक्ल सुरत के आम से बजार सजा है । दुनिया में बहुत सारी मिठी चिजें मिलती है । मिठाई,चॉकलेट और आईसक्रिम भी बहुत मिठी और अच्छी होती है । पर आम मे जो मिठापन होता है वह अद्वितीय है । आम का स्वाद बेजोड होता है । सारे मिठाई एक तरफ और आम एक तरफ । फिर भी आम ही बाजी मारेगा और मिठाई पिछे रह जाएगें । आम जैसा मिठापन दुनिया के किसी भी चीज में नहीं है । क्यों कि यह प्राकृतिक मिठास है ।
आम गर्मी की दवा है । गर्मी से आक्रान्त हुए लोगों के लिए आम एक बेमिसाल तोहफा बन कर आता है । कच्चे आम का पन्ना लू से बचाता है तो पका हुआ आम कब्जियत की दवा है । कच्चे आम से अचार बनाओ, खटमिठ्ठी बनाओ या सुखा कर खटाई या अमचूर बनाओ । पका हुआ आम काट कर खाओ और तृप्त हो जाओ और ज्यादा पका हुआ आम हो तो निचोड कर डगरी में रख कर धूप में सुखा कर रखो । और आम का सिजन खत्म हो जाने पर ईस ‘अमावट’ को खा कर मजे लो । तो देखा आम के कितने फायदे हैं और ईस को किस किस तरह और वीधियों से खाया जा सकता है । ईसी को कहते हैं ‘आम के आम गूठलियों के दाम’ ।
शाम को आफिस से घर लौट रहें हैं, पसिने से लस्त पस्त है पर घर लौटते हुए बजार में आम खरिदना नहीं भुलते । क्योंकि बच्चे घर में आम का बेसब्री से ईंतजार कर रहे है । घर लौटते समय सभी के थैले से गोल गोल कुछ बाहर झांक रहा होता है । और उस थैले को खोल कर देखिए वहां पर अवश्य आम महाशय विराजमान होगें । तो ऐसा है आम का जादू जो आम के सिजन में सब के शीर चढ कर बोलता है । गाँव मे लोग आम के पेड के निचे खटिया डाल कर बैठ जाते हैं और पेड में ही पका हुआ ‘गछपक्कु’ आम का रसास्वादन करते हैं । आम को चूस कर खाने में जितना मजा है वह किसी और तरिके से खानें में नहीं है । ईसी लिए तो आम बच्चो का सब से पसंदीदा फल है । रात के खाने के बाद यदि आम नहीं खाए तो खाने का मजा ही बैकार है ।
गर्मी की उमसभरी दोपहरी में सो कर उठ्ने के बाद सुबह बाल्टी मे डुबो कर रखा गया आम को काट कर या चूस कर खाने में जो आनंद है वह और किसी चीज में नहीं । शाम या रात को जिस तरह शराब पिने वाले को शराब की तलब लगती है । ठीक उसी तरह गर्मी में आम का नशा भी वैसा ही होता है । गर्मी में जब बाजार में आम आ जाता है तब बहुत से लोगों का नशा ही आम होता है । कोई ऐसा नहीं जो आम के मिठे नशे से अछूता हो । प्रकृति ने मनुष्य को अमृतफल के रुप में आम का जो उपहार दिया है वह हम सब पर एक ‘मीठा कर्ज’ है जो हम किसी भी हालत में चूका या लौटा नहीं सकते । हम सब आममय हैं और आम हमारे नस नस में है ।
जब आम का सिजन खत्म होने लगता है और आम से पटा हुआ बाजार से आम हटने लगता है तब ऐसा सूनापन महसुस होता है जैसे बेटी को शादी कर के विदाई करने के बाद घर का होता है । पूरा बाजार उजाड लगने लगता है ‘ । आम के साथ ही बाजार में लिच्ची, कटहल,तरभुजा,जामुन और बडहर भी आता है । पर नजर सबकी आम पर ही टिकी होती है । और कोई फल खाने के साथ नहीं खा सकते पर आम खाने के साथ भी मौजुद रहता है । ईसी लिए कि यह आम है एकदम खास फल । प्रकृति खे बगिचें का सब से बेमिशाल फल जिसकी तुलना किसी और फल से नही हो सकती । लिच्ची, तरभुजा या जामुन का अचार नहीं बन सकता पर आम का अचार बनता है ।
देखिए आम के ही कारण आमजनता, आमसभा और आमचुनाव का नाम पडा है । क्यों नही लिच्चीजनता कहते हैं जब कि आम के सिजन में लिच्ची भी बाजार में आता है । न लिच्ची चुनाव होता है न लिच्ची सभा ही होती है । आम हर साल आता है ईसी लिए साधारण लग सकता है पर यह आम नही खास है । और फलों के ईतने नाम और प्रजाति नही होती जितनी आम की होती है । बम्बै, मालदह (लंगड़ा), जर्दा, केरुवा, दशहरी, कृष्णभोग, दलमा, कलकत्तिया, चौसा, आम्रपाली आदि। देखा आम के कितने सारे नाम और प्रजाति है । जैसे ईंसान के नाम वैसे ही आम के भी नाम हैं । ईसी लिए जनता को आम से तुलना कर के आमजनता कहा गया है । जो आमचुनाव मे आम की तरह अपना जलवा और रुतबा प्रदर्शित करते हैं जैसे गर्मी में आम अपनी महत्ता सिद्ध करता है ।
आम रुठे हुए को मनाने के लिए भी कारगर है । अपनी पदोन्नति करवानी है तो अपने हाकिम या बस को अच्छी क्वालिटी का एक पेटी आम भेज दें । देखिए झट से पदोन्नति कैसे हो जाती है । कार्यकर्ता अपने से सिनियर नेता को खुश करने के लिए अपने गाँव या बगिचे से उम्दा नश्ल का आम उपहार में दे कर अपना मनमाफिक काम करवा लेता है । मां अपने रुठे बच्चो को मनाने के लिए भी यही आम को शस्त्र बना कर प्रयोग करती है । बच्चा रुठ कर मूंह फुलाए बैठा है मां झट से मैंगोशेक बना कर रुठे बच्चे का गाल हंसा कर पिचका देती है । तो देखा आपने आमक्षकैसा जादुई फल है जो बिगडी बातों को भी बना देता है । ईसी लिए तो यह आम है फलों का राजा और अमृतफल । ईसी लिए तो यह आम हो कर भी सब से खास है । (व्यंग्य)

