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30 जुन गुरुवार से 9 जुलाई शनिवार तक आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रा


*आचार्य राधाकान्त शास्त्री**आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा दिनांक 30 जुन गुरुवार से आरम्भ होकर आषाढ़ शुक्ल दशमी दिनांक 9 जुलाई शनिवार तक *गुप्त नवरात्रा के प्रथम दिन प्रातः 6:25 से 9 बजे तक कलाशस्थापना के साथ पूजन आरंभ किया जाएगा।* अथवा



*पूर्वाह्न 11:34 से मध्याह्न 12:27 तक अभिजित मुहूर्त में कलशस्थपना पूर्वक माता महाकाली की आवाहन पूजन जप पाठ हवन करना सबके लिए लाभकारी होगा।*

*साथ ही क्रमश दश दिनों तक शक्ति के दश रूपों की पूजन अर्चना और साधना की जाएगी।*

*इस नवरात्र में प्रतिपदा और नवमी का व्रत रख दशमी को*
या
*प्रतिपदा से पंचमी तक*
या
*पंचमी से नवमी तक*
या
*सप्तमी, अष्टमी, नवमी*
या
*अष्टमी नवमी को*
या
*केवल नवमी को व्रत रख दशमी को पारणा कर नवरात्र व्रत का लाभ लिया जा सकता है।*

*शाक्त भक्तों के अनुसार “दस रूपों में समाहित एक सत्य की व्याख्या है – महाविद्या” जिससे जगदम्बा के दस लौकिक व्यक्तित्वों की व्याख्या होती है। महाविद्याएँ तान्त्रिक प्रकृति की मानी जाती हैं जिनकी साधना एवं पूजन आराधना इस नवरात्र में दश दिनों तक निम्नवत हैं-*

*प्रतिपदा 30 जुन गुरुवार को काली साधना*

*द्वितीया 1 जुलाई शुक्रवार को तारा साधना*

*तृतीया 2 जुलाई शुक्रवार को छिन्नमस्ता साधना*

*चतुर्थी 3 जुलाई रविवार को षोडशी साधना*

*पंचमी 4 जुलाई सोमवार को भुवनेश्वरी साधना*

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*षष्ठी 5 जुलाई मंगलवार को त्रिपुरभैरवी साधना*

*सप्तमी 6 जुलाई बुधवार को धूमावती साधना*

*अष्टमी 7 जुलाई गुरुवार को भगवती बगलामुखी साधना एवं दोपहर नवमी में समर्पण पूजन*

*नवमी 8 जुलाई शुक्रवार को मातंगी साधना*

*दशमी 9 जुलाई शनिवार को कमला (कमलात्मिका) साधना किया जाएगा*

*जिस में नित्य पूजन पाठ, मंत्र जप पूर्वक क्रमशः पूजन अर्चना एवं मंत्र साधना नित्य हवन की जाएगी।*

*शाक्त दर्शन के अनुसार दस दिनों में दश महाविद्याओं को भगवान विष्णु के दस अवतारों से सम्बद्ध करता है और यह व्याख्या करता है कि महाविद्याएँ वे स्रोत हैं जिनसे भगवान विष्णु के दस अवतार उत्पन्न हुए थे। महाविद्याओं के ये दसों रूप चाहे वे भयानक हों अथवा सौम्य, जगज्जननी के रूप में पूजे जाते हैं।*
*इस नवरात्र में कामाख्या कवच, दश महाविद्या पाठ, प्रत्यंगिरा एवं विपरीत प्रत्यंगिरा, नरसिंह कवच, बगलामुखी इत्यादि समस्त विद्याओं की सिद्धि प्राप्ति का उत्तम एवं दुर्लभ संयोग मिलता है।*
*दुर्गा उपासना के लिए वर्ष में चार नवरात्रियां आती हैं, जिनमें से दो प्रकट ओर दो गुप्त होती हैं।*

*चैत्र और अश्विन महीने में प्रकट नवरात्रि तथा माघ और आषाढ़ माह में गुप्त नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है।*

*इस गुप्त नवरात्रियों का महत्व प्रकट नवरात्रियों से अधिक होता है। यह देवी की साधना करने वाले साधकों के लिए काफी महत्वपूर्ण होता हैं।*
इन दिनों में साधक विभिन्न प्रकार की सिद्धिया प्राप्त कर सकता है। दस महाविद्याओं की साधना करके उनसे आशीर्वाद प्राप्त किया जा जाता है ।
*आषाढ़ गुप्त नवरात्रि में खास कर दस महाविद्याओं की साधना करना चाहिए।*
*सामान्य गृहस्थ साधक भी यदि गुरू के मार्गदर्शन में गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं की साधना करें तो वह समस्त प्रकार के सांसारिक सुख , ऐश्वर्यशाली जीवन, मान सम्मान, पद, प्रतिष्ठा, भूमि, संपत्ति प्राप्त कर सकता है। ये दस महाविद्याएं हैं काली, तारा, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगसामुखी मातंगी और कमला है। इन दस महाविद्याओं के तीन समूह है। पहला सौम्य कोटि, दूसरा उग्र कोटि और तीसरा सौम्य उग्र कोटि है।*
साधक अपने गुरू के मार्गदर्शन में गुप्त नवरात्रि में देवी के इन स्वरूपों की साधना और इनके मंत्र का जप कर सकता है ।
सुबह शाम दोनों ही समय आरती और देवी को भोग लगाना आवश्यक है। इसमें देवी की प्रकृति के अनुसार भोग लगाया जाता है ।
पूरे नौ दिन अपना खान पान और आहार सात्विक रखें।
साथ ही अपने कामना के अनुसार *अपराजिता, विपरीत एवं बगला प्रत्यंगिरा, कामाख्या कवच , सहित सभी कवचों की साधना अत्यंत लाभकारी होता है।*
जो साधक या व्यक्ति किसी विशेष मनोकामना की पूर्ति के लिए देवी के विशेष स्वरूप की साधना नहीं करना चाहता उसके लिए सामान्यतः
दुर्गा सप्तशती का पाठ प्रतिदिन किया जाना आवश्यक है।
जो लोग विधिवत दीक्षा ग्रहण किये है और उनसे गुरू मंत्र प्राप्त किया है तो उस मंत्र का जप करें।
पूर्णत: सात्विक आचरण करते हुए यदि साधक देवी की आराधना करे तो वह जीवन की समस्त इच्छाओं की पूर्ति कर सकता है।
सामान्य नवरात्रि में सात्विक और तांत्रिक दोनों प्रकार की पूजा की जाती है किन्तु गुप्त नवरात्रि में ज्यादातर तांत्रिक एवं कामना परक पूजा की जाती है।
गुप्त नवरात्रि में साधना को गोपनीय रखा जाता है । साधक को केवल अपने गुरू से ही साधना की चर्चा करने की अनुमति होती है ।
इस गुप्त नवरात्रि में पूजा और मनोकामना जितनी ज्यादा गोपनीय होगी, सफलता उतनी ही ज्यादा मिलेगी,
गुप्त नवरात्र के गुप्त अनुष्ठान के प्रभाव से माता जी मेरे सभी शुभचिंतकों की सभी समस्याओं को सन्तप्त कर सबकी सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करें,
माता जी को हमारी प्रार्थनाओं से संतुष्टि और प्रसन्नता प्राप्त हो, माता जी विभिन्न रूपों में आकर सभी को संतुष्ट और प्रसन्न रखें, सब लोग हर समय मुस्कुराते रहें, कभी भी किसी को कोई समस्या न हो?
*जय माता जी, हर हर महादेव …*

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*हरि ॐ गुरुदेव.. ज्योतिषाचार्य आचार्य राधाकान्त शास्त्री*

*✍? हरि ॐ गुरुदेव.. ज्योतिषाचार्य आचार्य राधाकान्त शास्त्री*
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