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समाजिक अभियंता सुमन सायमी : प्रतिनिधिसभा सदस्य बनने की सोच में

 


काठमांडू, १३ नवम्बर, एक रिपोर्ट । जीतना किसे अच्छा नहीं लगता ?फिर वो चुनाव की बात हो या फिर जिंदगी की छोटी मोटी बातें । हर कोई चाहता है कि छोटी सी छोटी बात में जीत उसकी ही हो । लेकिन जीतने के लिए कुछ काम करना होता है कोई यूँही नहीं वोट करेगा आपको । ऐसे में कालीमाटी के सुमन सायमी सड़क विस्तार अभियान के कारण काठमांडू के रैथाने के बीच चर्चित हैं । २०६८ साल में प्रधानमन्त्री डा. बाबुराम भट्टराई ने सड़क विस्तार अभियान चलाने के बाद जो लोग इसमें पीस गए थे उनकी आवाज बन गए वो ।
सरकार सड़क विस्तार कर रही है इस बात को जानकर उनके एक मित्र ने आत्महत्या भी कर ली थी । जब अपने मित्र की आत्म हत्या का कारण उन्हें पता चला तब वें डोजर आतंक का विरोध और संस्कृति–सभ्यता के संरक्षण में निकलें ।
‘कलंकी में दुकान और बालाजु में उनका छोटा सा घर था । सड़क विस्तार के नाम में सरकार ने बालाजु के घर को पूरी तरह से तौड़ दिया , कलंकी में दुकान थी उसे भी आधा अधूरा तौड़ दिया । कहाँ रहते? कैसे रहते? सामान्य लोगों का गुजारा चलना मुश्किल हो गया ।
वैसे ही सरकार का ये सड़क विस्तार अभियान बाहर से देखने में बहुत अच्छा मगर भीतर से न्यायिक नहीं है । यह देखने के बाद खुद का चुप बैठना किसी को भी बर्दाश्त नहीं होता सो सायमी को भी नहीं हुआ और वो उतर आए इस राजनीति के क्षेत्र में ।
सायमी उस समय चर्चे में आए जब गत वैशाख में स्थानीय निर्वाचन का चुनाव होने जा रहा था तब उन्होंने भी मेयर पद के लिए अपनी उम्मीदवारी दी थी और उन्हें लगभग १४ हजार मत भी मिले थे ।
स्थानीय निर्वाचन के चुनाव के बाद वो स्वतन्त्र अभियान में सक्रिय हुए । स्वतन्त्र तथा वैकल्पिक शक्ति के लौरो अभियान (लाठी अभियान )’में स्वतन्त्र को एकीकृत करने का प्रयास उन्होंने किया । लेकिन निर्वाचन आयोग ने अनन्तराज घिमिरे को हाम्रो नेपाल पार्टी को लौरो (लाठी) चुनाव चिहृन दिया है ।
स्थानीय तह निर्वाचन में लौरो (लाठी) चिहृन से काठमांडू में बालेन्द्र शाह और धरान में हर्क साम्पाङ विजयी होने के बाद अनन्तराज घिमिरे ने वो चिहृन कब्जा कर लिया था ।
इस बार इसी लौरो (लाठी) से सुमन सायमी प्रतिनिधिसभा सदस्य बनने की सोच में हैं । ऐसा नहीं है कि वो राजनीति के लिए नया चेहरा है । उनके पिता जीवनराज मानन्धर पुराने वामपन्थी नेता है । एक समय था जब सुमन सायमी के घर मनमोहन अधिकारी, मदन भण्डारी, केपी शर्मा ओली के साथ अन्य नेताओं का आना जाना हुआ करता था ।
सुमन सायमी काठमांडू –८ में सत्ता गठबन्धन के नेकपा (एकीकृत समाजवादी)के वहाल वाला संस्कृति तथा पर्यटनमन्त्री जीवनराम श्रेष्ठ आरै नेकपा (एमाले)के शिवसुन्दर राजवैद्य के साथ प्रतिस्पर्धा कर रहें हैं ।
इस बार एक नई लहर जरुर है कि हम युवाओं को राजनीति में लाए । सुमन सायमी आते हैं या नहीं, उनका सपना पूरा होता है या नहीं ये तो आने वाला समय ही बताएगा ।

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