राष्ट्रपति की कुर्सी पर है नजर एमाले की
काठमांडू, ५ पुस –
एमाले की भी नजरें अब पड़ रही है राष्ट्रपति की कुर्सी पर । पार्टी अध्यक्ष के केपी ओली को भावी प्रधानमंत्री के रुप में रखते हुए ही चुनाव को लड़ा गया था । कहीं न कहीं यह आस थी कि वो बहुतमत में आऐंगे । लेकिन गठबंधन होने के बाबजूद ज्यादा सीटें नहीं आ पाई है और जो सहकार्य बना था चुनाव के समय लगभग सभी पार्टियोंसे टूट चुका है क्योंकि जसपा अध्यक्ष उपेन्द्र यादव ने साफ तौर से कह दिया है कि वो चुनाव तक का सहकार्य था जो खत्म हो चुका था । इसके साथ ही राप्रपा ने भी पहले ही कह दिया है कि वह सरकार में नहीं जाएगी । इससे यही देखने को मिलता है कि एमाले पार्टी कहीं न कहीं अकेली रह गई है । वो बहुमत नहीं जुटा पाऐगी ।
इधर नेपाली कांग्रेस लगातार बैठक कर भाग –भंडा कर रही है लेकिन इतना तय लग रहा है कि सत्तारुढ़ दल ही गठबधन सरकार बनाएगी ।
एमाले के बहुत से नेता यह कह रहे हैं कि हमें जनादेश नहीं मिला है सो हम सत्ता निर्माण में नहीं लगे हैं । लेकिन उच्च श्रोत के अनुसार एमाले भी चुप नहीं बैठा है वह नए सरकार निर्माण और सत्ता साझेदारी के बारे में चर्चा कर रहे हैं । सरकार गठबंधन में प्रक्रिया में सहभागी होने के लिए एमाले अभी की सत्ता गठबंधन को किसी भी तरह से तोड़ने की कोशिश कर रही है । स्त्र्रोत के अनुसार एमाले ने कांग्रेस और माओवादी केन्द्र के साथ समान्तर का प्रस्ताव रख रहा है जिसके केन्द्र में राष्ट्रपति पद की मांग है ।
यहाँ तक कि राष्ट्रपति पद हमें दें तो हम सरकार बनाने में भी सहयोग करेंगे । स्त्र्रोत अनुसार ओली ने तो चुनाव से पहले ही कांग्रेस और एमाले मिलकर आगे बढ़ने की आवश्यकता पर जोड़ दी थी । अभी भी एमाले ने स्पष्ट प्रस्ताव रखा है कि राष्ट्रपति पद हमारी पार्टी के लिए छोड़ दें तो हम सरकार बनाने में सहयोग करेंगे । लेकिन कांग्रेस प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति दोनाें पद स्वयं रखना चाहती है ।
स्त्र्रोत के अनुसार वें चाहें तो एकबार फिर वाम सरकार बनें । प्रधानमंत्री बनाने में एमाले बहुमत जुटा सकते हैं । उनका कहना कि जसपा, और राप्रपा का सर्मथन अगर मिल जाता है तो एकबार फिर वाम सरकार बन सकती है । एमाले के पास ७८, माओवादी केन्द्र के ३२, राप्रपा से १४, जसपा से १२ औरु एकीकृत समाजवादी से १० सीटें हैं ।
लेकिन प्रचंड ओली के प्रति सकारात्मक नहीं हैं । ०७४ में ओली के साथ सहमति होने के बाद ओली ने धोखा दे दिया था इसलिए उनपर प्रचण्ड को विश्वास नहीं है । ये प्रचंड के निकटतम नेताओं ने बताया है ।
आगे क्या गठ जोड़ हो जाए नहीं कहा जा सकता है क्योंकि ये राजनीति है ।

