विराटनगर भन्सार में एमआरपी विवाद समाप्त, जाम खुलने लगा
विराटनगर (नेपाल), 7 मई । केही दिनदेखि पूर्ण रूपमा जामग्रस्तरहेको विराटनगरको रानीस्थित एकीकृत भन्सार जाँच चौकी (आईसीपी) अब सहज होने की दिशा में अग्रसर हो गया है। अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) अनिवार्य रूप से उल्लेख करने की सरकारी कड़ाई के कारण रोके गए सैकड़ों मालवाहक ट्रक और कंटेनर अब सशर्त नेपाल प्रवेश करने लगे हैं।
समस्या की पृष्ठभूमि
लगभग एक सप्ताह से अधिक समय तक **एमआरपी** संबंधी अन्योल और सख्ती के कारण करीब **४०० ट्रक व कंटेनर** भन्सार परिसर में फंसे हुए थे। इनमें तेस्रो मुलुक से आयातित विद्युतीय सामग्री, तैयार पोशाक, खाद्यान्न, लत्ताकपड़ा, टायर, बीज-बिजन, सौंदर्य सामग्री समेत दैनिक उपयोग की वस्तुएँ शामिल थीं।
अरबों रुपैयाँ मूल्य के सामान लंबे समय तक रोके जाने से बजार में अभाव और मूल्यवृद्धि का खतरा बढ़ गया था, जिससे स्थानीय व्यवसायी चिंतित थे।
नई व्यवस्था और समाधान
भन्सार विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी कर नई प्रक्रिया अपनाई है। अब आयातकर्ताओं को **‘प्रतिबद्धता पत्र’** (Commitment Letter) देना अनिवार्य किया गया है।
नई व्यवस्था के मुख्य बिंदु:
– भन्सार जाँच के समय वस्तु पर MRP न होने पर भी आयातकर्ता **स्वघोषणा** कर सकता है।
– सामान बाजार में भेजने से पहले **अनिवार्य रूप से MRP लेबल** चिपकाना होगा।
– आयातकर्ता अपने कंपनी के लेटरहेड पर 3 सूत्रीय सहमति पत्र देगा।
– विभाग ने साफ किया है कि MRP प्रिंटेड होना अनिवार्य है और इसमें कोई लचीलापन नहीं बरता जाएगा।
विराटनगर भन्सार कार्यालय प्रमुख **उमेश श्रेष्ठ** ने कहा कि अब इस नियम को कड़ाई से लागू किया जाएगा। भन्सार एजेंट संघ की अध्यक्ष **देवकी शर्मा** ने भी नई व्यवस्था की पुष्टि की।
वर्तमान स्थिति
नई व्यवस्था लागू होते ही भन्सार नाके पर जाम कम होने लगा है। अधिकांश ट्रक और कंटेनर अपने गंतव्य की ओर रवाना हो चुके हैं, जबकि बचे हुए वाहन भी प्रक्रिया पूरी कर छूटने की कतार में हैं।
समस्या वैशाख १५ (नेपाली कैलेंडर) से शुरू हुई थी, जब MRP कड़ाई लागू की गई। बाद में विभाग ने कुछ श्रेणियों (औद्योगिक कच्चा माल, मशीनरी, जल्द खराब होने वाले सामान) के लिए छूट का प्रस्ताव दिया था, लेकिन उच्च स्तर से मंजूरी न मिलने के कारण स्थिति और जटिल हो गई थी।
निष्कर्ष
सरकार की सख्त MRP नीति और आयातकर्ताओं की जिम्मेवारी तय करने वाली नई व्यवस्था के बीच समझौता होने से विराटनगर भन्सार का लंबे समय से चला आ रहा गतिरोध समाप्त होने लगा है। इससे बजार में सामान की आपूर्ति सामान्य होने और मूल्यवृद्धि पर अंकुश लगने की उम्मीद है।

