राम मूर्ति बनने का रास्ता साफ
जनकपुरधाम /मिश्री लाल मधुकर । अयोध्या के आचार्य पीठ तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगत गुरु परहंस आचार्य नेकहा कि नेपाल से आयी शिला शालिग्राम शिला नहीं है व्लकि देवशीला है। इसलिए इससे प्रभु राम और सीता की प्रतिमा बनायी जासकती है। उन्होंने कहा कि शालिग्राम साक्षात बिष्णु है। इस पर छेनी हथौड़ी चलाना महा पाप है। इससे महा अनिष्ट हो सकता है। इसलिए मैं इसका विरोध किया था। लेकिन जवसे शालिग्राम पर वयान दिया तभी से स्वप्न में भोर के तीन बजेबजरंग बली दर्शन दे रहे है कि नेपाल से जो शिलाएं आयी है वह शालिग्राम नहीं है अपितु देव शिला है। लेकिन मैंने ध्यान नहीं दिया। गुरूवार की सुवह मेरे कमरे मेंएक दिव्य संत प्रकट हुए। मैंने उन संत का दणवत किया। वे अपना परिचय दिया कि मैं सूर्य वंश का कुल गुरु बशिष्ठ हूं। उन्होंने कहा कि य। शालिग्राम शिला नहीं है देव शिला है। इससे प्रभु श्री राम की प्रतिमा बनायी जा सकती है। तुम इसमें व्यवधान नहीं डालो। सभी संतो को इसके बारे में कहो कि यह शालिग्राम नहीं है देवशीला है। इसलिए मैं तुरत अपने वक्तव्य दिया कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट प्रतिमा बनावें। उन्होंने कहा कि इस में सभी लोग सहयोग करें।






