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भारतीय राजदूतावास द्वारा अंतराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर ‘नेपाल भारत बहुभाषी काव्य उत्सव’

 

काठमांडू, १० फागुन । ‘अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस’ के अवसर पर दिनांक 21 फरवरी 2023 को भारतीय दूतावास, काठमांडू के स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र, त्रिभुवन विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग, नेपाल संस्कृत विश्वविद्यालय वाल्मीकि विद्यापीठ और भारत की संस्था अक्षर यात्री प्रतिष्ठान द्वारा संयुक्त रूप से ‘नेपाल-भारत बहुभाषी काव्य उत्सव’ का आयोजन किया गयाI

. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान के कुलपति श्री भूपल राई की गरिमामयी उपस्थिति रहीI अपने संबोधन में उन्होंने मातृभाषाओं के महत्व का उल्लेख किया और कहा कि ऐसे आयोजनों से नेपाल एवं भारत के सांस्कृतिक एवं साहित्यिक संबंध और अधिक प्रगाढ़ होंगे। भारतीय दूतावास की प्रतिनिधित्व मिशन उप प्रमुख श्री प्रसन्न श्रीवास्तव ने कियाI विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रतिष्ठित मराठी साहित्यकार डॉ स्वाति शिंदे पवार और नेपाल के वरिष्ठ लेखक एवं साहित्यकार डॉ गंगा प्रसाद अकेला उपस्थित रहेI कार्यक्रम की अध्यक्षता त्रिभुवन विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग की अध्यक्ष डॉ संजीता वर्मा ने की और कार्यक्रम का संयोजन डॉ आसावरी बापट, निदेशक, स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र द्वारा किया गयाI

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कार्यक्रम में भारत और नेपाल के कवियों द्वारा संस्कृत, हिंदी, मराठी, नेपाली, डोटेली, मैथिली, अवधी, भोजपुरी, बांग्ला, पंजाबी, उर्दू और अंग्रेजी भाषाओँ में उत्कृष्ट कविता पाठ किया और श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। कार्यक्रम में 100 से अधिक कविगण, साहित्यकार, भाषाविद एवं लेखक शामिल हुए। इनमें भारत की संस्था अक्षर यात्री प्रतिष्ठान के पदाधिकारी एवं सदस्य भी शामिल थे जो विशेष रूप से  भारत से इस कार्यक्रम में शामिल होने काठमांडू आए थेI

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विश्व में भाषाई एवं सांस्कृतिक विविधता और बहुभाषिता को बढ़ावा देने केलिए हर साल 21 फरवरी को अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाया जाता है। वर्ष 1999 में यूनेस्को ने इसे मनाने की घोषणा की थी। वर्ष 1952 में बांग्लादेश में हुए ऐतिहासिक भाषा आंदोलन की स्मृति में अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाया जाता है।

अंतराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर महाराष्ट्र से आए साहित्यकारों को भारतीय राजदूतावास की ओर सम्मान भी किया गया ।
कार्यक्रम में अपने मंतव्य को रखते हुए विवेकानंद सांस्कृतिक केन्द्र की निर्देशक आशावरी बापट ने कहा कि मातृभाषा यानी माँ से लोगों का अलग ही जुड़ाव है । मातृभाषा हमारी धरोहर है । कभी कभी हम इतने दूर चलें आते हैं अपने परिवेश से,जहाँ हमारा संपर्क टूटने लगता है अपनी मातृभाषा से । लेकिन पुरानी परम्परा को, अपनी मातृभाषा को बचा के रखना है । इसे याद रखना है । मातृभाषा में जो अपनापन मिलता है वह और किसी भाषा में नहीं मिलता । अपनी मातृभाषा सरल और सहज लगती है । इसे बचाएं ।
इस वर्ष अंतराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस २०२३ का थीम –बहुभाषी शिक्षा– शिक्षा को बदलने की आवश्यकता है ।
‘नेपाल भारत बहुभाषी काव्य उत्सव’ में त्रिभुवन विश्वविद्यालय,अक्षरयात्री प्रतिष्ठान , नेपाल संस्कृत विश्वविद्यालय वाल्मीकि विद्यापीठ सहभागी संस्थाएं थी ।

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कार्यक्रम में लगभग १२ भाषाओं की कविता पढ़ी गई । संस्कृत, हिन्दी, नेपाली, मैथिली, भोजपुरी, अवधि, डोटिली, उर्दू, अंग्रेजी, आदि भाषाओं में कविताएं पढ़ी गई ।

 

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