उत्तर प्रदेश सरकार भारत-नेपाल सीमा पर फैले गैर मान्यता प्राप्त मदरसों की फंडिंग का लगाएगी पता
बहराइच
भारत-नेपाल सीमा पर फैले गैर मान्यता प्राप्त मदरसों पर शिकंजा कसने की तैयारी है। पिछले साल हुई जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर अब उत्तर प्रदेश सरकार ऐसे मदरसों में पढ़ रहे विद्यार्थियों व आय स्रोतों का ब्योरा जुटाएगी। इसके लिए अल्पसंख्यक विभाग की प्रदेश स्तरीय टीम गठित हो गई है, जो अगले महीने दस्तक देगी। सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, मदरसों के फंड के स्रोत की जांच के लिए अधिकारियों की चार टीमें उत्तर प्रदेश में भारत-नेपाल सीमा पर या उसके आस-पास के जिला का द्वारा करेंगी। टीम 13 जुलाई तक अपनी रिपोर्ट देगी। सीमा पर या उसके पास के नौ जिलों में 3049 मान्यता प्राप्त और 2419 गैर मान्यता प्राप्त मदरसे हैं, लेकिन उनमें से कई के पास विभिन्न स्रोतों से प्राप्त धन का वैध रिकॉर्ड नहीं है।
भारत-नेपाल के समानांतर बहराइच की लगभग 100 किलोमीटर की सीमा फैली हुई है। सीमा पर पिछले पांच सालों में धड़ल्ले से इमारतें तान दी गई हैं। मदरसों का नाम देकर बड़े पैमाने पर फंडिंग हो रही है। फंडिंग के बारे में क्षेत्रीय लोग भी अनजान हैं। पिछले साल सरकार ने जिले भर में संचालित हो रहे मदरसों की जांच कराई गई थी। इस दौरान 300 से अधिक मदरसे गैर मान्यता प्राप्त मिले थे। इन तालीम ग्रहण कर रहे बच्चों के बारे में भी सटीक जानकारी मदरसा संचालकों की ओर से साझा नहीं किया गया था। आय के स्रोत के बारे में जकात का हवाला दिया गया था। जिला अल्पसंख्यक विभाग की ओर से शासन को भेजी गई रिपोर्ट के परीक्षण के बाद सरकार ने अब नेपाल सीमा से लगे भारतीय क्षेत्र में संचालित ऐसे मदरसों पर नजरें टेढ़ी कर ली हैं ।।
इन मदरसों का पूरा ब्योरा जुटाने के लिए टीम गठित की है। उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के विशेष सचिव आनंद कुमार सिंह व विभाग के निदेशक जे रिभा, संयुक्त निदेशक आरपी सिंह और मदरसा बोर्ड के रजिस्ट्रार जगमोहन सिंह इन मदरसों की जांच करने तीन जुलाई को बहराइच आएंगे। सरकार की ओर से मदरसों की जांच के लिए टीम गठित किए जाने के बाद से नेपाल सीमा से सटे मदरसों के संचालकों में हड़कंप मचा हुआ है।
बहराइच जिला अल्संख्यक कल्याण अधिकारी संजय कुमार मिश्र ने बताया कि जिले में गैर मान्यता प्राप्त मदरसों की रिपोर्ट पहले ही शासन को भेजी जा चुकी है। वित्तीय जांच को लेकर टीम तीन जुलाई को आएगी।

