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जनवादी कवि राजेश जोशी की जयंती मनायी गयी

 

जनकपुरधाम/मिश्रीलाल मधुकर । समकालीन हिन्दी कविता के साथ-साथ आज के दौर के महत्वपूर्ण जनवादी कवि राजेश जोशी की 75वीं जयंती पूरी शिद्दत के साथललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय हिंदी विभाग में विभागाध्यक्ष प्रो.राजेन्द्र साह की अध्यक्षता में मनायी गई। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. राजेन्द्र साह ने कहा कि समकालीन हिन्दी कविता में विराट मानवीय संवेदना के महत्वपूर्ण कवि हैं राजेश जोशी।अपनी सरल एवं सहज भाषा-शैली में
जनवादी मूल्यों के लिए चलनेवाले जद्दोजहद को अभिव्यक्त करने के साथ ही मानवीय संवेदना को झंकृत करनेवाले अनूठे कवि हैं।

इस अवसर पर विभाग के वरिष्ठ शिक्षक डॉ. सुरेंद्र प्रसाद सुमन ने कहा कि “पूरे समकालीन हिन्दी कविता के दौर के साथ ही मौजूदा बर्बर फासिस्ट दौर के भी बहुत ही महत्वपूर्ण जनवादी कवि हैं राजेश जोशी। इंदिराकालीन तानाशाही आपातकाल से लेकर आज तक के फासिस्ट सत्ता प्रायोजित अघोषित आपातकाल में भी सत्ता से मूठभेड़ करनेवाले चर्चित जनवादी कवि के रूप में लोगों की जुबान पर हैं राजेश जोशी। खासकर उनकी ‘मारे जाएंगे’ शीर्षक कविता आज के दौर में समरगान के बतौर प्रस्तुत की जाती है।”

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राजेश जोशी को याद करते हुए डॉ. सुमन ने कहा कि इस निरंकुश सत्ता की बर्बरता को समझने के लिए राजेश जोशी को समझना अनिवार्य है। उन्होंने साठोत्तरी दौर की कविता को छुई मुई कविता बतलाते हुए स्वाधीनता आंदोलन में अर्जित जनवादी मूल्यों को समकालीन कविता के केंद्र में स्थापित किया। राजेश जोशी के महत्वपूर्ण काव्य संग्रह ‘एक दिन बोलेंगे पेड़’, ‘नेपथ्य में हंसी’, ‘दो पंक्तियों के बीच’ आदि का भी उन्होंने उल्लेख किया।

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विभाग की सहायक प्राचार्या डॉ. मंजरी खरे ने अह्लादित स्वर में कहा कि ऐसे कवियों को बारंबार याद करने की जरूरत है। उन्होंने जोशी जी की चर्चित कविता ‘बच्चे काम पर जा रहे हैं” का पाठ भी किया।

उपस्थित छात्र–छात्राओं में स्नातकोत्तर तृतीय छमाही के छात्र विद्यासागर कुमार ठाकुर ने राजेश जोशी की कविताओं का पाठ करते हुए उसका अर्थ बतलाया। शोधार्थी वर्ग से ज्योति कुमारी ने अपनी बात रखते हुए उनका परिचय देते हुए एक छोटी कविता का पाठ किया। इन्होंने कविता में बिम्ब और अनुभूति को रेखांकित किया।

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मौके पर शोधार्थी अभिषेक कुमार सिन्हा, सियाराम मुखिया, शिखा सिन्हा, ज्योति कुमारी, दुर्गानंद ठाकुर, नबी हुसैन के साथ ही भारी संख्या में सनातकोत्तर प्रथम तथा तृतीय छमाही के छात्र-छात्राएं उपास्थित थे। मंच संचालन शोध छात्रा शिखा सिन्हा ने किया।

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