सुनसान बनता काठमांडू, अब तक लाखों लोग छोड़ चुके हैं काठमांडू
काठमांडू, 17 अक्टूबर
अब तक लाखों लोग काठमांडू छोड़कर बाहर जा चुके हैं । पिछले दो दिनों में तीन लाख से अधिक लोग काठमांडू से बाहर जा चुके हैं वहीं सिर्फ सोमवार को रात दस बजे तक करीब ढाई लाख लोग राजधानी से बाहर निकले हैं । एक अनुमान के मुताबिक अगले हफ्ते तक पच्चीस लाख लोगों के काठमांडू से बाहर जाने का अनुमान है।
नेपाल का सबसे बड़ा त्योहार शुरू हो गया है। देश में सबसे अधिक दिनों तक मनाया जाने वाला पर्व शुरू होने के साथ काठमांडू छोडने वालों की तादाद दिन प्रतिदिन बढ़ती जाती है । देश में सबसे लम्बे समय तक अवकाश वाला यह पर्व शुरू होते ही काठमांडू में रहने वाले लाखों लोग अपने-अपने गांव, अपने शहर वापस जाते हैं।
नवरात्र को नेपाल में बड़ा दशैं के नाम से जाना जाता है। नेपाल में दशहरा का पर्व मनाने का अपना ही तरीका है। नेपाल के स्कूल कॉलेजों में दशहरा के घटस्थापना से शुरू होने वाला अवकाश छठ पर्व के बाद ही खुलता है। सामान्य रूप से जो घटस्थापना के बाद सभी निजी दफ्तर, उद्योग कल कारखाने घटस्थापना से लेकर पूर्णिमा के दिन तक बन्द रहता है।
नेपाल के सरकारी दफ्तर और बैंक भी सप्तमी जिसे नेपाल में फूलपाती के नाम से जाना जाता है उस दिन से बन्द होकर पूर्णिमा के अगले दिन ही खुलता है। अतिआवश्यक अस्पताल जैसी जगहों पर भी इमरजेंसी के अलावा सभी सेवाएं सप्तमी से पूर्णिमा तक बन्द रहता है।
काठमांडू उपत्यका ट्राफिक पुलिस के मुताबिक पिछले दो दिनों में ही तीन लाख से अधिक लोग काठमांडू छोड़ चुके हैं। काठमांडू ट्राफिक पुलिस के प्रवक्ता एसएसपी राजेन्द्र भट्ट ने कहा कि शनिवार-रविवार को ही सिर्फ तीन लाख पचास हजार लोग काठमांडू से बाहर जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि आज नवरात्र के दूसरे दिन रात दस बजे तक ढाई लाख लोग काठमांडू से बाहर निकल चुके हैं और अभी रात भर यह सिलसिला जारी रहेगा।
एक अनुमान के मुताबिक सप्तमी तक कुल पचीस लाख लोगों के काठमांडू से बाहर जाने का अनुमान है। सप्तमी के बाद पूर्णिमा तक सार्वजनिक यातायात बहुत ही कम चलता है इसलिए लोग उस दिन तक काठमांडू से बाहर निकल जाते हैं। सप्तमी से पूर्णिमा तक काठमांडू की सडकें सुनसान रहती है। मुख्य बाजार की सभी दुकानें, मॉल, सिनेमाघर आदि सभी बन्द रहता है। जो काठमांडू के मूल निवासी हैं जो ललितपुर और भक्तपुर में रहते हैं वो ही काठमांडू में दिखाई देते हैं। सारे होटल और रेस्टोरेंट भी बन्द रहते हैं क्योंकि होटलों के स्टाफ भी छुट्टियों में अपने गांव चले जाते हैं। बाहर से आने वाले पर्यटकों को सप्तमी से लेकर पूर्णिमा तक काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। काठमांडू की सड़कों पर सार्वजनिक यातायात की सुविधा भी नहीं रहती है। सप्तमी से पूर्णिमा तक काठमांडू में कर्फ्यू जैसा माहौल रहता है।


