महाकवि विद्यापति और नेपाल में भजन संस्कृति विषय पर कार्यक्रम का किया गया आयोजन
काठमांडू, माघ ६– श्री हरि भजन (मृदङ्ग) सुनाकोठी द्वारा आयोजित महाकवि विद्यापति र नेपालमा भजन संस्कृति, नेपालभाषा र मिथिला भजन सांस्कृतिक संबंध विषय को लेकर अन्तरक्रियात्मक सम्मेलन आज श्री बालकुमारी मंदिर परिसर, बालकुमारी चौर सुनाकोठी में किया गया । कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रीहरिभजन (मृदङ्ग) सुनाकोठी के अध्यक्ष गोपाल महर्जन ने की ।

कार्यक्रम में प्रमुख वक्ता के रुप में उप प्राध्यापक, महाकवि विद्यापति और नेपाल पुस्तक की लेखिका, विश्लेषक तथा अनुसंधानकर्ता डॉ.मंचला झा ने कहा कि – नेपाल में शायद पहली बार इस तरह के कार्यक्रम का आयोजन किया गया है जहाँ नेपालभाषा और मिथिला भजन सांस्कृतिक संबंध को लेकर कार्यक्रम किया गया है ।
उन्होंने अपने मंतव्य में काठमांडू घाटी में विद्यापति की लोकप्रियता के बारे में विस्तार से जानकारी दी । साथ ही कैसे और कब मिथिला संस्कृति तथा विद्यापति के भजन का यहाँ से संबंध जुड़ा ? विद्यापति के नेपाल यात्रा तथा नेपाल के साथ उनके संबंध पर भी प्रकाश डाला । उन्होंने यह भी जानकारी दी कि मच्छिन्द्रनाथ की यात्रा के समय जो भजन गाए जाते हैं उनमें ५० भजन विद्यापति के हैं ।

इसी तरह वरिष्ठ साहित्यकार, विश्लेषक पूर्व प्राज्ञ धीरेन्द्र प्रेमर्षि ने कहा कि काठमांडू और मिथिला के बीच का मधुर संबंध, जो एक दूसरे से जुड़ा हुआ है उसके केन्द्र में विद्यापति हैं । उन्होंने मैथिली के उत्थान और उसका जो विस्तार हुआ था इसके बारे में जानकारी दी । साथ ही इसमें हर कालखण्ड के राजाओं का जो योगदान रहा है उसके बारे में भी बात की । उन्होंने यह भी कहा कि एक समृद्ध इतिहास रहा है मैथिली का । प्राचीन समय में मैथिली सबके हृदय में बसती थी इसके बारे में विलियम एल स्मिथ ने जो बातें कही थी, उसके बारे में बताते हुए प्रेमर्षि ने कहा कि मैथिली का जो स्थान रहा था प्राचीन समय में उसके प्रमुख कारण थे प्राचीन मैथिली का माधुर्य, प्राचीन मैथिली का पवित्र धार्मिक प्रतिष्ठा तथा विद्यापति के प्रेम गीतों में सशक्त साहित्यिक भाषा का प्रयोग ।
इसी तरह वक्ता के ही रुप में पत्रकार तथा साहित्यकर्मी प्रकाश उपाध्याय ने विद्यापति को अपने बचपन से जोड़ा । जहाँ वे विद्यापति के गीतों को, भजनों को सुनते थे । उन्होंने विद्यापति का जो १२ वर्ष का समय नेपाल में बीता उसके बारे में भी चर्चा की । विद्यापति नेपाल के सप्तरी राजबनौली में रहे थे । प्रकाश जी भी सप्तरी से हैं तो उनका अटूट स्नेह और प्रेम है महाकवि विद्यापति से ।
कार्यक्रम में श्री हरि भजन (मृदङ्ग) सुनाकोठी द्वारा कुछ भजन भी गाएं गए ।




