सरकार ने मन्त्रिपरिषद के निर्णय को आधार बनाकर सुविधा को व्यवस्थित करने के लिए यह अध्यादेश लाया है– मुख्यमन्त्री कार्की
काठमांडू, माघ २९ –
कोशी प्रदेश के सत्तारुढ गठबन्धन दल के नेता को सुविधा देने के लिए सरकार द्वारा लिए गए अध्यादेश के प्रति नेकपा एमाले किस्ता बन्दी में विरोध जता रही है । संसदीय दल, पूर्व मन्त्री और पार्टी ने बारी–बारी अध्यादेश के प्रति विरोध जताया है ।
पिछले समय में नेकपा एमाले कोशी प्रदेश कमिटी ने अध्यादेश का विरोध जताया है । प्रदेशसभा के पदाधिकारी को और भी सेवा सुविधा देने के लिए लाए गए अध्यादेश को तत्काल वापस लेने के लिए प्रदेश कमिटी से आग्रह किया है ।
सत्तारुढ़ गठबन्धन दल के नेताओं को गाड़ी सुविधा देने के लिए, प्रदेशसभा के पदाधिकारी के लिए भी मुख्यमन्त्री कार्की ने ६ माघ में अध्यादेश जारी की थी लेकिन १५ माघ में नेकपा एमाले कोशी प्रदेश संसदीय दल के प्रमुख सचेतक रेवतीरमण भण्डारी ने पत्रकार सम्मेलन कर अध्यादेश विापस लेने का आग्रह किया था ।
१८ माघ में नेकपा एमाले कोशी प्रदेश संसदीय दल के नेता हिक्मतकुमार कार्की ने लिखित सुझाव देते हुए मुख्यमन्त्री कार्की से अध्यादेश को वापस लेने का आग्रह किया ।
२१ माघ में पूर्व सामाजिक विकास मन्त्री तथा नेकपा एमाले नेता जीवन घिमिरे ने संसद में पदाधिकारी बढ़ाने और प्रमुख के अधिकार कटौती करने का विज्ञप्ति जारी कर अध्यादेश वापस लेने का आग्रह किया ।
इसी तरह रविवार को प्रेस चौतारी के कार्यक्रम में अध्यक्ष घनश्याम खतिवडा ने प्रदेश सभा को बिना किसी पुछताछ के अध्यादेश लाने को लेकर निन्दा की है ।
प्रदेशसभा के पदाधिकारी तथा सदस्य की पारिश्रमिक और सुविधा सम्बन्धी ऐन २०७५ में सभामुख, उपसभामुख, प्रमुख प्रतिपक्षी दल के नेता, सत्ता पक्ष के प्रमुख सचेतक, प्रमुख प्रतिपक्षी दल के प्रमुख सचेतक, प्रतिपक्षी दल के नेता, सत्तापक्ष दल के सचेतक और प्रदेशसभा समिति के सभापति को सेवा सुविधा देने के विषय में उल्लेख किया गया था । मुख्यमन्त्री कार्की ने उसमें संशोधन कर ६ माघ में अध्यादेश जारी किया था ।
अध्यादेश जारी होने के बाद पूर्व मुख्यमन्त्री उद्धव थापा और राजेन्द्र राई गाड़ी सुविधा पा सकते हैं । माओवादी केन्द्र संसदीय दल के नेता इन्द्रबहादुर आङ्बो, राप्रपा नेता भक्ती सिटौला और जसपा नेता निर्मला लिम्बू को भी गाडी सुविधा प्राप्त होगी । लेकिन एमाले इसका विरोध कर रहा है । मुख्यमन्त्री कार्की अध्यादेश वापस नहीं लेने पर अभी तक अड़े हुए हैं । उन्होंने दाबा करते हुए कहा कि सरकार ने मन्त्रिपरिषद के निर्णय को आधार बनाकर सुविधा को व्यवस्थित करने के लिए यह अध्यादेश लाया है ।


