वैवाहिक बलात्कार के आरोप में न्यायाधीश गिरी को हिरासत में लेने का आदेश
काठमान्डू 4अप्रैल
सर्वोच्च अदालत ने वैवाहिक बलात्कार के आरोपी न्यायाधीश भुवन गिरी को मामले की सुनवाई के लिए जेल भेजने का आदेश दिया है.
न्यायाधीश हरि फुयाल और तिल प्रसाद श्रेष्ठ की पीठ ने जिला और उच्च न्यायालय के आदेश को खारिज कर दिया और गिरि को जेल भेजने का आदेश दियाहै ।
पति-पत्नी के रिश्ते में विवाद होने के बावजूद पीड़िता के कमरे में जज गिरी के अकेले जाने पर ,सर्वोच्च अददालत ने कहा है कि यह स्वाभाविक नहीं है इसलिए वैवाहिक बलात्कार के मामले में उन्हें दोषी नहीं ठहराया जा सकता.
आदेश में कहा गया है, ”समग्र परिस्थितियों और साक्ष्यों को देखते हुए इन प्रतिवादियों को अभी दोषी नहीं कहा जा सकता, इसलिए कानून के मुताबिक मामले की सुनवाई के लिए उन्हें हिरासत में रखा जाएगा.”
जिला न्यायालय काठमांडू और उच्च न्यायालय पाटन ने न्यायाधीश गिरी को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था ।
बुधवार को जब जिला और हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई तो कोर्ट रूम में मौजूद आरोपी जज की पत्नी ने गुटखा के पैकेट से संदिग्ध पदार्थ निकालकर खा लिया. इसके बाद उन्हें सुप्रीम कोर्ट से वीर हॉस्पिटल ले जाया गया.
भुवन गिरि की पत्नी ने लगातार विरोध करते हुए कहा है कि गिरी के जज होने के कारण उन्हें उनके द्वारा किए गए अपराध के लिए न्याय नहीं मिल सका है । इससे पहले उन्होंने प्रदर्शन कर मांग की थी कि उन्हें गिरफ्तार किया जाए और मुकदमा चलाया जाए.
जज गिरी की पत्नी ने पिछले साल पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके साथ रेप हुआ है. जज गिरी के कपिलवस्तु में कार्यरत होने के कारण कपिलवस्तु पुलिस ने जांच आगे नहीं बढ़ाई।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की. जज गिरी पर अपनी पत्नी को बंधक बनाकर यौन शोषण करने का आरोप है ।
फिर पुलिस ने गिरि को गिरफ्तार कर जांच की. कोर्ट केस के बाद उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया था । कोर्ट में मामला दायर होने के बाद से जज गिरी निलंबित हैं.

