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बुश की चेतावनी : चीन का नंबर एक दुश्मन अमेरिका है और दूसरा भारत।

 

मुंबई. अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज डब्लू. बुश ने चीन के खतरनाक इरादों से भारत को आगाह किया है। बुश ने यहां तक कह दिया है कि चीन भारत को अस्थिर कर देना चाहता है। मंगलवार देर रात मुंबई में कारोबार जगत की कुछ चुनिंदा हस्तियों के साथ रात्रिभोज के दौरान कहा कि चीन का नंबर एक दुश्मन अमेरिका है और दूसरा भारत।

कार्यक्रम में शामिल लोगों के हवाले से मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक दो बार अमेरिका राष्ट्रपति रहे बुश ने कहा कि पाकिस्तान के साथ उनके देश के रिश्ते लगातार कमजोर हो रहे हैं। बुश के मुताबिक, ‘अगर अमेरिका ने पाकिस्तान को अपना दोस्त नहीं बनाया होता तो पाकिस्तान और खतरनाक देश हो जाता। लेकिन अब अमेरिका के सब्र का बांध टूट रहा है।’ उन्होंने कॉरपोरेट जगत के अधिकारियों को आगाह किया कि वे कभी भी रूस के साथ कारोबार न करें। बुश ने यह उम्मीद भी जताई कि अगर यूरो (कई यूरोपीय देशों की साझा मुद्रा) टिका रहता है तो आने वाले पांच सालों में यूरोपीय यूनियन की तस्वीर एकदम बदली हुई होगी।

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बुश ने मध्य पूर्व में ईरान के परमाणु कार्यक्रम के चलते गर्म हो रहे माहौल पर अपनी राय जाहिर करते हुए कहा कि अगर ईरान इजरायल के पीछे पड़ेगा तो अमेरिका ईरान के पीछे पड़ जाएगा। मुंबई में हुए इस कार्यक्रम को काफी गुप्त रखा गया। गौरतलब है कि बुश की तरफ से हिदायत दी गई थी कि इस कार्यक्रम का कोई औपचारिक ऐलान नहीं होगा और न ही इसकी मीडिया कवरेज होनी चाहिए। इस कार्यक्रम में चुनिंदा लोगों को ही शामिल किया गया। भोज में एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक के अध्यक्ष, राहुल बजाज, निर्मल जैन और हर्ष गोयनका जैसे लोग शामिल हुए।

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गौरतलब है कि बुश के दावे पूरी तरह से निराधार भी नहीं हैं। चीन भारतीय सीमा पर लंबे समय से मोर्चेबंदी कर रहा है। वह न सिर्फ भारत के पूर्व और उत्तर में अपने सैनिकों और हथियारों की तैनाती कर रहा है बल्कि अब राजस्थान से सटी पाकिस्तान सीमा पर भी वह अपनी सैन्य गतिविधियां बढ़ा रहा है। हिंद महासागर में भी वह श्रीलंका और बांग्लादेश जैसे देशों के साथ नौसेना सहयोग बढ़ा रहा है। चीन इन देशों की बंदरगाह बनाने में मदद के बहाने समुद्री क्षेत्र में अपनी आवाजाही कर रहा है। कुछ दिनों पहले ही भारतीय नौसेना ने एक चीनी जहाज को जासूसी करते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया था।

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भारत और चीन के बीच कई दशकों से सीमा विवाद सुलझा नहीं है। चीन अरुणाचल प्रदेश को तिब्बत का हिस्सा मानता है। चीन के सैनिक गाहेबगाहे भारतीय सीमा का अतिक्रमण करते हुए घुस आते हैं। इन गतिविधियों से साफ है कि चीन के इरादे नेक नहीं हैं। कई जानकार यह मानते हैं कि चीन को लगता है कि तेजी से आर्थिक तरक्की कर रहा भारत शक्ति संतुलन में उसके लिए दिक्कत पैदा कर सकता है। कई जानकार इसे भी चीन की गतिविधियों के लिए जिम्मेदार मानते हैं।

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