बांग्लादेश में शेख हसीना के संबोधन के बाद और भड़की हिंसा, अब तक २५ मौतें
काठमांडू, सावन ४ – आरक्षण के विरोध में जारी देशव्यापी आंदोलन में अब तक बांग्लादेश के विभिन्न हिस्सों में कम से कम २५ लोगों की मौत हो चुकी है ।
इसके अलावा सैकड़ों लोग घायल हुए हैं । आंदोलन और हिंसा लगातार तेज हो रही है । प्रदर्शनकारी कई जगहों पर पुलिस बल के साथ हिंसक संघर्ष में आमने–सामने हैं । देश के कई हिस्सों में इंटरनेट सेवाओं को निलंबित कर दिया गया है । प्रदर्शनकारियों की मांग है कि सरकारी नौकरियों में आरक्षण को खत्म कर दिया जाए । यूनिवर्सिटी के छात्र बीते कुछ दिनों से १९७१ के मुक्ति युद्ध में लड़ने वाले सैनिकों के बच्चों के लिए सरकारी नौकरियों में आरक्षण का विरोध कर रहे थे ।
१९७१ में पाकिस्तान से आजादी की जंग लड़ने वालों को यहां मुक्ति योद्धा कहा जाता है । देश में एक तिहाई सरकारी नौकरियां इनके बच्चों के लिए आरक्षित हैं ।
इसीके खिलाफ छात्र बीते कुछ दिनों से रैलियां निकाल रहे थे । छात्रों का कहना है कि आरक्षण की ये व्यवस्था भेदभावपूर्ण है, जिसकी जगह पर मैरिट के आधार पर नौकरी दी जानी चाहिए । प्रधानमंत्री शेख हसीना बुधवार को जब राष्ट्र के नाम संबोधन कर रही थीं तो सबकी निगाहें इस पर लगी थीं कि वो क्या बोलती हैं । लोग इंतजार कर रहे थे कि सरकार मौजूदा परिस्थिति में किस राह पर आगे बढ़ेगी । साथ ही यह उत्सुकता भी थी कि आरक्षण विरोधी आंदोलनकारी प्रधानमंत्री के भाषण पर क्या प्रतिक्रिया जताएंगे । प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री के भाषण को खारिज करने में ज्यादा देरी नहीं की । इस भाषण के बाद आरक्षण विरोधी आंदोलनकारियों ने ‘पूर्ण बंद’ का आह्वान किया । रात से ही देश के विभिन्न इलाकों में हिंसक प्रदर्शन शुरू हो गए । एक ओर आरक्षण का विरोध करने वाले सड़कों पर उतरे तो दूसरी ओर सत्तारूढ़ पार्टी के विभिन्न संगठन भी सड़कों पर उतर आए । उसके बाद राजधानी ढ़ाका समेत विभिन्न इलाकों से मौत की खबरें सामने आती रहीं । मौजूदा हालात को देखकर लग रहा है कि बुधवार की रात को प्रधानमंत्री के भाषण के बाद टकराव और बढ़ गया है ।

