त्रिविवि हिन्दी विभाग व्दारा ‘हिन्दी साहित्य शिक्षण संगोष्ठी’ विषयक कार्यशाला सम्पन्न
काठमाण्डू,२१ नवम्बर । त्रिभुवन विश्वविद्यलय अन्तर्गत केन्द्रीय हिन्दी विभाग के द्वारा विश्वविद्यालय परिसर स्थित शेडा के सभाकक्ष मे ‘ हिन्दी साहित्य शिक्षण संगोष्ठी ‘ विषयक कार्यशाला सम्पन्न हुई जिसकी अध्यक्षता विभाग की अध्यक्षा डा श्वेता दीप्ति ने की जबकि प्रमुख अतिथि के आसन को मानविकी एवम समाज शास्त्र संकाय के डीन प्रा डा चिंतामणि पोखरेल ने सुशोभित किया । विशिष्ट अतिथि के रुप मे कीर्तिपुर क्याम्पस के प्रमुख एँव हिन्दी विभाग के पुर्व अध्यक्ष प्रा डा सूर्यनाथ गोप , भारतीय दूतावास के डा मोहन बहुगुणा एवं अन्य विशिष्टजनों की उपस्थिति थी । इस कार्यशाला मे ‘समाजिक यथार्थ रचनात्मकता और कविता का सम्प्रेषण ‘ ‘ आधुनिक काल मे नवीन गद्द विधाओं का सृजनात्मक आयाम’ ‘ विदेशो मे हिन्दी पठन-पाठन का आयाम ‘ तथा ‘सूचना प्रद्योगिकी युग पर हिन्दी का प्रभाव’ विषयक कार्यपत्र प्रस्तुत किये गये । इसके प्रस्तोता क्रमश: मालिनी मिश्रा , विनीता साह, संगीता झा तथा कमलनाथ उपाध्याय थे । ये सभी स्नातकोत्तर के छात्र छात्रायें हैं ।
इन कार्यपत्रों पर प्रथम टिप्पणी कर्ता के रुप मे ठाकुरराम बहुमुखी क्याम्पस वीरगन्ज के उप-प्रध्यापक कुमार सच्चिदानन्द थे । उसके वाद क्रमश: मंचला झा, बसन्त विश्वकर्मा एवं विनोद विश्वकर्मा ने टिप्पणियां की ।
शुभकामना मंतव्य के क्रम मे प्रा डा चिन्तामणि पोखरेल ने कहा कि नेपाल मेे हिन्दी महत्वपुर्ण भाषा है और इसे सम्मान मिलना चहिये । उन्होने यह भी कहा कि ऊच्चशिक्षा मे हिन्दी के पठन पाठन मे जो समस्यायें हैं, उन्हे दूर करने के लिये परस्पर विचार विमर्श करना चहिये और समाधान की दिशा मे आगे बढना चहिये । अपने मंतव्य के क्रम मे भारतीय दूतावास के डा मोहनचन्द्र बहुगुणा ने कहा कि अब एक भाषा से काम नही चल सकता है । जितनी ज्यादा भाषा हम सिखेगें उतना ही ज्यादा हमे फाइदा होगा । इस कार्यक्रम का सफल संचालन लक्ष्मी जोशी ने किया जबकि स्वागत मंतव्य अध्यक्षा डा श्वेता दीप्ति ने दिया । कार्यक्रम का अन्त विभाग की शिक्षिका मौसमी सिंह के धन्यवाद ग्यापन के साथ हुआ । इसमे प्रबुद्धजनों की
उल्लेखनीय उपस्थिति थी । कुल मिलाकर त्रि वि वि हिन्दी विभाग का हिन्दी साहित्य शिक्षण संगोष्ठी का आयोजन सफल रहा ।
कुमार सच्चिदानन्द ।


