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मैं छह करोड़ साठ लाख लड़कियों में से हुं : मलाला, पाकिस्तानी बेटी भारतीय पिता से मिली है:सत्यार्थी

 

malaalaबुधवार, १० दिसंबर २०१४ । नार्वे की राजधानी ओस्लो में एक शानदार समारोह में भारत के बाल अधिकार कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी और पाकिस्तान की मलाला यूसुफ़ज़ई को नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया । नॉर्वे के शहर ओस्लो में आयोजित इस कार्यक्रम में भारतीय सरोद वादक उस्ताद अमजद अली खान ने अपने बेटे अमान और अयान के साथ रंगारंग कार्यक्रम पेश किया। इससे पहले, पाकिस्तानी सिंगर राहत फतेह अली खान ने भी कव्वाली पेश की। पीएम नरेंद्र मोदी ने भी ट्वीट करके सत्याथी को बधाई दी। साठ वर्षीय सत्यार्थी और 17 साल की मलाला यूसुफजई को यह सम्मान प्रदान किया गया। मलाला यूसुफ़ज़ई और कैलाश सत्यार्थी को नोबेल पुरस्कार केे तौर पर संयुक्त रूप से चौदह लाख डॉलर मिले हैं ।

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पुरस्कार पाने के बाद सम्मेलन को हिंदी में संबोधित करते हुए कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि मानव के हित के लिए पूरा विश्व साथ मिलकर काम करे।

उन्होंने कहा, मैं अपने माता-पिता, अपनी मातृभूमि और उन सभी बच्चों को नमन करता हूं जिनको मुक्त कराने में मैं स्वयं मुक्त होता रहा हूं। मैं अपने समस्त देशवासी बहनों और भाईयों की ओर से आपका यह पुरस्कार स्वीकार करता हूं। एक पाकिस्तानी बेटी भारतीय पिता से मिली है, एक भारतीय पिता पाकिस्तानी बेटी से मिला है । मैं मलाला को अपनी बेटी मानता हूं। असतो मा सद्गमय, तमसो मा ज्योतिर्गमय , मॄत्योर्माअमॄतं गमय। इन शब्दों के साथ कैलाश सत्यार्थी ने नोबेल सम्मान संबोधन समाप्त किया।

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अपने संबोधन में मलाला ने कहा कि मैं अपने पिता को धन्यवाद देती हूं कि उन्होनें मेरे पंख नहीं उतारे, बल्कि मुझे उड़ने दिया। उन्होंने अपनी मां को धन्यवाद दिया। मलाला बोली, उनकी मां उनके लिए प्रेरणास्रोत हैं और वे कभी झूठ नहीं बोलती हैं। मलाला ने कहा, जब मेरी दुनिया बदली तो मेरी प्राथमिकताएं भी बदल गईं। मेरे पास दो विकल्प थे, चुप रहो और मरने का इंतजार करो, और दूसरा अपनी आवाज़ उठाओ और तब मारे जाओ। मैंने दूसरा विकल्प चुना। मलाला ने कहा- ‘सत्यार्थी जी हम दिखाएं कि पाकिस्तानी और भारतीय मिलकर काम कर सकते हैं। मलाला ने कहा, मैं अकेली नहीं हूं, मैं उन छह करोड़ साठ लाख लड़कियों में से हूं जो शिक्षा से वंचित हैं। हम आधुनकि युग में जीते हैं। हम इस बात में विश्वास करते हैं कि कुछ भी असंभव नहीं है। हम सबके लिए गुणवत्तायुक्त शिक्षा प्रदान करेंगे।

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इसके साथ ही सांस थामकर इस लम्हे का इंतजार कर रहे दोनों देशों के लोगों में जश्न की शुरूआत हो गई। पुरस्कार लेने के बाद सत्यार्थी ने अपने संबो‌धन की शुरूआत ”स्वर्ग से भी महान अपनी भारत भूमि को स्मरण करता हूं” कहकर की।

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