प्रेम, वासना या आकर्षण : सावधान कहीं प्यार ना कर बैठना
श्वेता दीप्ति ,काठमाण्डू, ११ दिसम्बर । कभी मैंने कहीं पढ़ा था — ए पवन ! तू वहाँ तक बह कर जा, जहाँ मेरी प्रिया है । उसे स्पर्श कर के आ और फिर मुझे स्पर्श कर । मैं तेरे माध्यम से उसके कोमल स्पर्श का अनुभव करुँगा…….एक व्यक्ति इन्हीं के सहारे जी सकता है कि वह और उसकी प्रिया एक ही वायु में साँस लेते हैं और एक ही धरती पर वास करते हैं । अब जरा सोचिए अगर ये प्यार है तो आज जो कुछ इस प्यार के नाम पर हमारे आस पास घटित हो रहा है उसे हम कौन सा नाम दें ? ताजा तरीन घटना है रीतु महासेठ की । एक बीस वर्षीया लड़की असमय काल कवलित हो गई । ये और बात है कि हत्यारा आज गिरफ्त में आया है किन्तु अटकलें पहले से ही यही लगाई जा रही थीं कि यह हत्या प्रेम प्रसंग की वजह से ही हुई होगी । और आज यह साबित भी हो गया । जो पकड़ा गया उसके अनुसार वह पिछले छ वर्षों से उसके पीछे पड़ा था । यानि उस वक्त से जब रीतु १४ या १५ की थी । स्पष्ट है कि अगर उसकी तरफ से कुछ झुकाव भी होगा तो उसे प्यार तो कदापि नहीं कह सकते एक आकर्षण मात्र हो सकता है और आज जब उसे सही गलत का अंदाजा लगा और उसने अपने कदम पीछे किए तो उसे दर्दनाक मौत मिली । सवाल है कि जिसने उसे मौत दी तो क्या वो उसे प्यार करता था ? नहीं यह प्यार नहीं मानसिक विक्षिप्तता है और ऐसी विक्षिप्तता आज हर ओर देखने को मिल रही है । रोज बलात्कार की घटना हो रही और जो इसमें लिप्त हैं वो निःसन्देह पाशविक वृत्ति के वो व्यक्ति हैं जो विक्षिप्त हैं । भले ही सारा दोष लड़कियों के मत्थे मढ़ दिया जाय कभी उसके पहनावे को लेकर या कभी उसकी स्वच्छंदता को लेकर किन्तु कई ऐसी बलात्कार की घटना सामने आ जाती हैं जहाँ रिश्ते शर्मशार हो जाते हैं यहाँ ना तो कोई सेक्स अपील का मुद्दा होता है और ना ही पहनावे का यहाँ सिर्फ और सिर्फ बीमार मानसिकता सामने होती है ।
आज के खुलेपन में शारीरिक सम्बन्ध आम सी बात हो गई है । सम्बन्ध सहमति से बनते है. पर एक घिनौना पहलु यह भी है जिसके लिए लड़कियाँ स्वयं जिम्मेदार हैं और यह कड़वा सच आँकड़े बयान करते हैं । आपसी सहमति से हुआ शारीरिक सम्बन्ध कब बलात्कार में तब्दील हो जाएगा कहा नहीं जा सकता । मतभेद हुआ और प्यार बलात्कार और शोषण में बदल गया । यहाँ कानून लड़कियों के पक्ष में होता है और कल तक जो लड़के प्यार के बहलावे में होते थे वो हवालात के भीतर होते हैं । ऐसे कई केस थाने और अदालत की शोभा बढ़ा रहे हैं । यहाँ तो लड़कों को ही नसीहत देनी होगी कि सावधान कहीं प्यार ना कर बैठना । समाज का यह खुलापन हमारी संस्कृति का हिस्सा नहीं है लेकिन पाश्चात्य संस्कृति इस कदर हावी हो गया है कि समाज गर्त में जा रहा है और अपराध तथा अपराधिक प्रवृत्ति बढ़ रही है ।
इन एकाध उदाहरण से ऐसा नहीं लगता कि प्यार की अनुभूति कहीं है ही नहीं । प्यार, समर्पण चाहता है यह सच है, पर प्यार वो जज्बा है जो अपने प्यार को हर हाल में सुखी और खुश देखना चाहता है और आज के प्यार में यह अहसास कहीं नहीं है । आज की पीढ़ी जिसे प्यार कहती है वह महज चंद लम्हों का आकर्षण है । ना तो उसमें विश्वास है, ना धैर्य है और ना ही शरीर की सीमा से परे सोचने की चाहत । वह शरीर देखता है, शरीर खोजता है और उसे भोगना चाहता है और यही चाहत रोज एक अपराध को जन्म दे रही है । सामने वाले ने चाहा और आपने मना कर दिया तो कहीं तेजाब तो कहीं हथियार यही मिलते हैं । कदम लड़खड़ाए और सम्भालने की कोशिश की तो मौत मिलती है और आए दिन कई रीतु इनकी शिकार हो जाती है ।

