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साहित्य, प्रकाशन, विधि और समाजसेवा का एक विशिष्ट व्यक्तित्व : डॉ. संजीव कुमार

 

डॉ. संजीव कुमार भारत के साहित्य और प्रकाशन जगत का एक प्रतिष्ठित नाम हैं । वे एक सफल अधिवक्ता, विपुल लेखन करने वाले साहित्यकार, प्रख्यात प्रकाशक तथा इंडिया नेटबुक्स प्राइवेट लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक हैं । उन्होंने साहित्य, प्रकाशन और पठन संस्कृति के संवर्धन में उल्लेखनीय योगदान दिया है । उनके प्रयासों से अनेक नवोदित एवं स्थापित लेखकों को अपनी रचनाओं को व्यापक पाठक वर्ग तक पहुँचाने का सशक्त मंच प्राप्त हुआ है । इस विशेष बातचीत में हिमालिनी पत्रिका, नेपाल के दिल्ली ब्यूरो प्रमुख – प्रो. एस. एस. डोगरा ने डॉ. संजीव कुमार से उनके प्रेरणादायक जीवन–सफर, साहित्यिक साधना, प्रकाशन संबंधी पहल, सामाजिक सरोकारों तथा समकालीन साहित्य में सोशल मीडिया की बदलती भूमिका पर विस्तार से चर्चा की ।

० आप एक लेखक, अधिवक्ता और प्रकाशक हैं । इन तीनों भूमिकाओं में आपको सबसे अधिक संतुष्टि किस भूमिका से मिलती है ?

– बिना किसी संदेह के मुझे सबसे अधिक संतुष्टि एक लेखक के रूप में मिलती है । साहित्य मेरे लिए केवल एक रुचि नहीं, बल्कि मेरा जुनून है । वकालत मेरा व्यवसाय है, जबकि साहित्य मेरे व्यक्तित्व की आत्मा है । लेखन मुझे आत्मिक संतोष प्रदान करता है और समाज से सार्थक रूप से जुड़ने का अवसर देता है ।

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० एक लेखक के रूप में आपकी यात्रा कब और कैसे शुरू हुई ?

– साहित्य से मेरा जुड़ाव बहुत कम उम्र में ही हो गया था । वर्ष १९७६ में मेरी पहली कविता साहित्यिक पत्रिका ‘ऋतंभरा’ में प्रकाशित हुई थी । उस समय मेरी आयु लगभग सोलह वर्ष थी । अपनी रचना को पहली बार प्रकाशित देखकर मुझे अत्यंत प्रेरणा मिली और उसी अनुभव ने मुझे निरंतर लेखन के लिए प्रतिबद्ध कर दिया । तब से साहित्य मेरे जीवन का अभिन्न हिस्सा बना हुआ है ।

० आपके प्रकाशन समूह से जुड़ने पर लेखकों और साहित्य प्रेमियों को क्या लाभ मिल सकते हैं ?

–हमारा उद्देश्य लेखकों को एक पेशेवर, पारदर्शी और सहयोगात्मक प्रकाशन मंच उपलब्ध कराना है । हम उचित लागत पर गुणवत्तापूर्ण पुस्तक प्रकाशन, पांडुलिपि के विभिन्न पहलुओं पर विशेषज्ञ मार्गदर्शन तथा प्रकाशन प्रक्रिया के प्रत्येक चरण में व्यक्तिगत सहयोग प्रदान करते हैं । स्वयं लेखक होने के कारण मैं लेखकों की आकांक्षाओं, चिंताओं और रचनात्मक आवश्यकताओं को अच्छी तरह समझता हूँ । हमारे प्रकाशन समूह से प्रकाशित पुस्तकों को विश्व पुस्तक मेले जैसे प्रतिष्ठित आयोजनों में प्रदर्शित किया जाता है । इसके अतिरिक्त हम नियमित रूप से ‘अनुस्वार’ और ‘कथाबिंब’ जैसी साहित्यिक पत्रिकाओं का प्रकाशन भी करते हैं, जिससे लेखकों को व्यापक पाठक वर्ग तक पहुँचने का अवसर मिलता है ।

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० एक साहित्यकार, विधि विशेषज्ञ और समाजसेवी के रूप में आपके प्रमुख योगदान और उपलब्धियाँ क्या रही हैं ?

– मेरा दृढ़ विश्वास है कि साहित्य और समाजसेवा एक–दूसरे के पूरक हैं । पिछले कई वर्षों से मैं बाल विकास, साहित्यिक उन्नयन, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े अनेक कार्यों में सक्रिय रूप से योगदान देता रहा हूँ । इनमें से अधिकांश गतिविधियाँ बीपीए फाउंडेशन के माध्यम से संचालित होती हैं, जिसका उद्देश्य शिक्षा, साहित्य और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना है ।

० लेखन और साहित्य के क्षेत्र में सोशल मीडिया ने किस प्रकार का प्रभाव डाला है ?

– पिछले एक दशक में सोशल मीडिया ने अभूतपूर्व विकास किया है और इसने साहित्य के पाठकों तक पहुँचने के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है । इसकी सहज उपलब्धता के कारण लेखक अब अपनी रचनाएँ और विचार तत्काल वैश्विक पाठक वर्ग तक पहुँचा सकते हैं, जिससे साहित्य के प्रसार और पाठकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है ।

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हालाँकि, ऑनलाइन प्रकाशित होने वाली सामग्री की गुणवत्ता को लेकर कुछ चिंताएँ भी हैं । सोशल मीडिया पर लिखने और प्रकाशित करने वालों की संख्या में निश्चित रूप से बहुत अधिक वृद्धि हुई है । लेकिन अंततः वही लेखक लंबे समय तक अपनी पहचान बनाए रखते हैं, जिनके लेखन में मौलिकता, गहराई और साहित्यिक गुणवत्ता होती है । माध्यम चाहे कोई भी हो, उत्कृष्ट लेखन समय की कसौटी पर सदैव खरा उतरता है ।

टिप्पणी

“डॉ. संजीव कुमार विधि विशेषज्ञता, साहित्यिक सृजन, प्रकाशन नेतृत्व और सामाजिक प्रतिबद्धता का एक दुर्लभ एवं प्रेरणादायक संगम हैं । उनकी जीवन–यात्रा यह सिद्ध करती है कि समर्पण, दूरदृष्टि और समाज के प्रति सच्ची प्रतिबद्धता के बल पर व्यक्ति अनेक क्षेत्रों में उत्कृष्टता प्राप्त करते हुए असंख्य लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत बन सकता है ।”

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